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पैसा कमाने के लिए खुले इंजीनियरिंग कॉलेजों में लग रहे ताले अब तक 61 बंद, क्वालिटी पर फोकस करने वालों की अब भी डिमांड

बराड़ा/मुलाना में भारत पॉलीटेक्निक व स्वामी दिव्यानंद कॉलेज टंगैल बंद हो चुके हैं। शिवालिक कालेज में संचालक ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 02:15 AM IST

पैसा कमाने के लिए खुले इंजीनियरिंग कॉलेजों में लग रहे ताले अब तक 61 बंद, क्वालिटी पर फोकस करने वालों की अब भी डिमांड
बराड़ा/मुलाना में भारत पॉलीटेक्निक व स्वामी दिव्यानंद कॉलेज टंगैल बंद हो चुके हैं। शिवालिक कालेज में संचालक ने स्कूल व गुरुकुल कॉलेज खोल लिया है।

करनाल जिले में एमएम कॉलेज गांव रंबा में इंजीनियरिंग कॉलेज, जेके कॉलेज रंबा, मंगलमय कॉलेज समौरा, एपैक्स कॉलेज घरौंडा, स्वामी विवेकानंद पहले इंजीनियरिंग कॉलेज थे, जो अब स्कूल में बदल चुके हैं।

11इंजीनियरिंग कॉलेज और हुए बंद

150डबल से सिंगल शिफ्ट में बदले

कोई सिंगल शिफ्ट का हुआ तो कोई ला रहा लुभावने कोर्स

जब प्रदेश में इंजीनियरिंग की बहुत ज्यादा डिमांड थी, उस समय कुछ व्यापारियों ने पैसे कमाने के लिए बिना प्लानिंग और बिना सोचे समझे ही इंजीनियरिंग कॉलेज खोल लिए। जिन कोर्सों की ज्यादा डिमांड थी, उन्हें शुरू कर दिया। यह भी नहीं देखा कि भविष्य में चल कर उनमें बच्चों को नौकरी मिलेगी भी या नहीं। काफी ट्रेड हैं, जिनमें पहले काफी डिमांड थी, अब उनमें कोई दाखिला नहीं लेना चाहता है। ऐसे में काफी संस्थान तो बंद हो गए, क्योंकि उनके पास कोई प्लानिंग नहीं थी। जिनको संस्थान चलाने हैं, उन्होंने उन सभी कोर्स को बंद कर दिया है कि जिनकी डिमांड नहीं या फिर उस कोर्स को डबल से सिंगल शिफ्ट में कर लिया है। करीब 150 संस्थान जो कुछ ट्रेड में डबल शिफ्ट में चल रहे थे, वो अब सिंगल शिफ्ट के रह गए हैं। काफी कॉलेजों ने उन ट्रेड को बिलकुल बंद कर दिया हैं, जिनमें छात्र नहीं मिल रहे हैं। इनकी जगह विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज नए कोर्स शुरू कर रहे हैं और नई-नई योजना लेकर आ रहे हैं।

सोनीपत | टेकचंद मान इंजीनियरिंग कॉलेज में फिल्म स्टूिडयो का निर्माण करते कारीगर।

478से कम होकर रह गए 417इंजीनियरिंग कॉलेज

पिछले 5 वर्ष में एआईसीटीई से संबंधित प्रदेश के 61 संस्थान बंद हो गए हैं। वर्ष 2013 में इनकी संख्या कुल 478 थी, जो अब कम होकर केवल 417 रह गई है। इनमें से सबसे ज्यादा कुल 21 संस्थान वर्ष 2015-16 में बंद हुए हैं। वहीं हाल ही में भी 11 संस्थान बंद हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रदेश में बड़ी मात्रा में इंजीनियरिंग संस्थान हैं। इनके सामने भी सीट भरने की बड़ी चुनौती है।

पड़ोसी देशों से भर रहे सीट

वर्ष 2012-13 में प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल 1,70,361 का रजिस्ट्रेशन हुआ और उनमें से 76883 विद्यार्थियों का एनरोलमेंट हुआ। जो अब कम होकर रजिस्ट्रेशन तो 152603 और एनरोलमेंट केवल 51163 का रह गया है। यानी अब तक 25,720 का एनरोलमेंट कम हो चूका है। काफी कॉलेजों इस तरह के कोर्स लेकर आए हैं, जिनकी जम्मू-कश्मीर और पड़ोसी देश नेपाल व चीन आदि में डिमांड है। इनमें वो विद्यार्थियों को कान्ट्रैक्ट के तहत लाकर सीटें भर रहे हैं।

पानीपत में 4 कॉलेज बंद हुए हैं। इनमें से एक ही जगह पर स्कूल तो एक ही जगह एनसी मेडिकल कॉलेज खोल दिया गया है।

कुरुक्षेत्र जिले में 16 पॉलीटेक्निक कॉलेज थे। इनमें से 10 से अधिक कॉलेज बंद हो चुके हैं।

कैथल से भीमराव अंबेडकर पॉलीटेक्निक कॉलेज, पुंडरी और इंद्रप्रस्थ पॉलीटेक्निक कॉलेज रसीना बंद होकर स्पोर्ट्स अकेडमी खुल गई। सरस्वती पॉलीटेक्निक कॉलेज टीक, बंद होकर बिल्डिंग खाली पड़ी है। एसबी इंजीनियरिंग कॉलेज, पुंडरी के भवन में गुरुकुल नाम से स्कूल खुल गया।

छात्रों व आय में कमी से कॉलेज मालिकों का घट रहा इंजीनियरिंग में रुझान

कोर्स का बदलता स्वरूप

कुछ ट्रेड जिन्हें कॉलेज बड़ी तेजी से बंद कर रहे हैं, जिनमें कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग जैसे कोर्स हैं। अब इन्हें बंद करके संस्थान उन कोर्स को शुरू कर रहे हैं, जिनमें प्लेसमेंट अच्छी है या जो कुछ अलग तरह के कोर्स हैं। उन्हीं में मैनेजमेंट, मार्केट स्टडी, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, डिजाइनिंग और फाइनेंस जैसे कोर्स शामिल हैं। वैसे एआईसीटी भी अब स्टार्ट अप के नए कोर्स लाने की तैयारी कर रही है। इससे इंजीनियरिंग का स्वरूप बदल रहा है।

सोनीपत जिले में टेकचंद मान कॉलेज की जगह पर मॉडर्न कान्वेंट स्कूल शुरू हो गया है। इसके साथ फिल्म सेटअप चालू किया जा रहा है। पिपली खेड़ा मोड़ के नजदीक खुले श्री वेंकटेश्वरा इंजीनियरिंग कॉलेज खुला था, कुछ साल चलने के बाद इस कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या नाममात्र हो गई थी। बताया जाता है कि कॉलेज पर बैंक से लोन के चलते ब्याज तक चुकता न होने पर बैंक ने कॉलेज को सीज कर दिया गया। रयात बाहरा इंजीनियरिंग कॉलेज सोनीपत को बंद कर दिया गया।

इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होकर कहीं भवन बने खंडर तो कहीं खुले स्कूल

सब्सिडी का खेल बंद होना प्रमुख कारण

इंजीनियरिंग में सरकार एससी और कुछ अन्य वर्ग के छात्रों को पढ़ाई करने के लिए सब्सिडी देती है। पहले यह सब्सिडी कैश में दी जाती थी। बच्चों की सूची लेकर कॉलेजों के खाते में पैसे भेजे जाते थे। लेकिन जब सरकार की तरफ से जांच करवाई गई तो सामने आया कि कुछ संस्थान जिनके पास इस वर्ग के बच्चों की संख्या तो काफी कम होती थी वो गलत दाखिले दिखाकर सरकार से मुफ्त की सब्सिडी ले रहे थे। इसमें कुछ बड़े संस्थानों का नाम आया था। इसके बाद सरकार ने सीधे बच्चों को आधार से लिंक करके उनके खाते में सब्सिडी भेजनी शुरू कर दी और संस्थानों का सब्सिडी वाला खेल बंद हो गया।

छात्रों को प्लेसमेंट नहीं संस्थानों को आय नहीं

कॉलेजों के बंद होने के कारणों की बात करें तो हरियाणा के आसपास नई कंपनियां स्थापित नहीं हो रहीं और पुरानी कंपनियों में इतने खाली पद नहीं रहे। कॉलेजों के बार-बार आग्रह के बावजूद प्लेसमेंट के लिए कंपनियां नहीं आती। जो कंपनियां आती हैं, वो एक-दो वर्ष एक लिए विद्यार्थियों को अंडर ट्रेनिंग पर 10 से 15 हजार रुपए में मुश्किल से रखती हैं। इससे छात्रों का रुझान कम हो गया है। पिछले साल से बंद हुए एक इंजीनियरिंग कॅालेज के प्रधान विनीत कुमार ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेज चलाने के लिए करोड़ों रुपए इनवेस्ट करने पड़ते हैं। टीचर्स को महंगी फीस देनी पड़ती है। कंपीटिशन के चलते फीस भी अब उतनी नहीं रही और विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसके चलते अध्यापकों और स्टाफ की सैलरी भी निकालना मुश्किल हो गया है। इसलिए संस्थान बंद किए जा रहे हैं।

हिसार जिले में 3 पॉलीटेक्निक कॉलेज बंद हुए हैं। इसमें श्री बाला जी पॉलीटेक्निक कॉलेज, कल्पना चावला पॉलीटेक्निक कॉलेज, हिसार और यूनिवर्सल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हांसी शामिल हैं।

यमुनानगर में आईपीआर इंस्टीट्यूट, कृष्णा इंस्टीट्यूट, शिवालिक इंस्टीट्यूट, मां शारदा इंस्टीट्यूट, स्वामी विवेकानंद पॉलिटेक्निक, देव, आर्यन, वर्टेक्स व बालाजी इंस्टीट्यूट पॉलिटेक्निक के लिए खोले गए थे। छात्रों के न आने की वजह से दो साल से ये बंद पड़े हैं। इनके भवनों पर ताले लगे हैं।

ये कहते हैं

केवल कागजों में तैयार हो रहे थे इंजीनियर

इन कॉलेजों में इंजीनियर तैयार नहीं हो रहे थे केवल कागजों में ज्ञान दे रहे थे। बड़ी कंपनियों में काम करने लायक इंजीनियर निकल नहीं रहे थे, जिससे प्लेसमेंट कम हो गई। छोटी कंपनी वाले लेते हैं, तो केवल अंडर ट्रेनी ही काम करवाते हैं। बच्चे अब अपना भविष्य देख रहे हैं। - डॉ. एमएम गोयल, रिटायर्ड डीन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय

उद्देश्य स्पष्ट होने जरूरी

संस्थान खोलने से पहले उसके उद्देश्य स्पष्ट होने चाहिएं। संस्थान का पैसा जब तक बच्चों पर नहीं लगेगा तब तक उसे आगे नहीं बढ़ा सकते। जो बिना प्लानिंग के आए वो बंद हो गए। हमने केवल क्वालिटी पर ध्यान दिया जिससे डिमांड बनी रही। - राकेश तायल, मैनेजिंग डायरेक्टर, पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नाेलॉजी।

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