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एससी-एसटी एक्ट पर केंद्र ने नहीं की ठोस पैरवी

सभी दलित व प्रगतिशील संगठनों रविदास धर्मशाला में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में एससी व एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 04:05 AM IST
एससी-एसटी एक्ट पर केंद्र ने नहीं की ठोस पैरवी
सभी दलित व प्रगतिशील संगठनों रविदास धर्मशाला में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में एससी व एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा की गई। इसके बाद दो अप्रैल को अंबेडकर चौक पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करते हुए एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ज्ञापन भेजने का फैसला लिया गया। जनसंगठनों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्यायसंगत नहीं है। फैसले पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट में एससी व एसटी एक्ट के कानून की पैरवी करने में नाकाम रही है। बैठक की अध्यक्षता मांगेराम चिनिया ने की। संत शिरोमणि रविदास सेवा समिति हांसी, हजरथ के ब्लॉक के नेता प्रेम बापोलिया, दलित अधिकार मंच के जिला संयोजक रामअवतार सुलचानी, जनवादी महिला समिति की नेता आशा खन्ना, डॉ. भीमराव अंबेडकर सभा के मोहनलाल खिंची, वाल्मीकि समाज से राजकुमार, दलित अधिकार मंच के संयोजक पवन लाडवाल, भवन निर्माण कामगार यूनियन के दयानंद ढाणी केंदू, रेगर युवा मित्र मंडल के सोनू दिनोलिया, अनिल कुमार, हरिज्ञान जनागल, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के कृष्ण हाजमपुर मौजूद थे।

बरवाला में दलित अधिकार मंच ने की बैठक

बरवाला | दलित अधिकार मंच हरियाणा की तहसील कमेटी की मीटिंग शनिवार को कामरेड मिया सिंह बिठमड़ा की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग को दलित अधिकार मंच हरियाणा के राज्य कमेटी सदस्य मास्टर रोहतास बहबलपुरिया ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है वह दलित विरोधी व संविधान की गरिमा के खिलाफ है। रोहतास ने कहा कि जबसे देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है तभी से दलितों, अल्पसंख्यकों व वंचित तबकों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि दलित अधिकार मंच सभी दलित संगठनों, प्रगतिशील सामाजिक संगठनों, कर्मचारी व युवा-छात्र संगठनों, महिला व मजदूर व न्याय प्रिय लोगों के साथ दलित विरोधी फैसले के विरोध में 2 अप्रैल बरवाला व उकलाना में प्रदर्शन किया जाएगा व राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा जाएगा। मीटिंग में सुशीला बहबलपुर, रोहतास राजली, जगदीश किनाला, सरदानंद राजली, राधेश्याम लितानी, ऋषिकेश राजली, ब्रह्म प्रकाश ,सुभाष पैंतिया, रामनिवास खेड़ी बर्की, दिलबाग बरवाला, बलवान किरमारा आिद थे।

दो अप्रैल को होने वाले प्रदर्शन को लेकर दलित संगठनों की बैठक को संबोधित करते नेता।

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