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सर्वे टीम के आने से पहले कर्मियों की मानी मांगें

स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम के 12 फरवरी के आगमन को देखते हुए नगर परिषद प्रशासन सफाई कर्मचारियों के सामने झुकने पर मजबूर...

Dainik Bhaskar

Feb 10, 2018, 04:05 AM IST
सर्वे टीम के आने से पहले कर्मियों की मानी मांगें
स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम के 12 फरवरी के आगमन को देखते हुए नगर परिषद प्रशासन सफाई कर्मचारियों के सामने झुकने पर मजबूर हो गया। परिषद प्रशासन द्वारा सभी मांगें मानने का आश्वासन दिया गया। सफाई कर्मचारियों के रुके हुए एरियर देने से लेकर जूते तक देने तक की मांगें मान ली गई है। परिषद के अधिकारियों ने लिखित पत्र जारी करके हड़ताल करने वाले सर्व कर्मचारी संघ व नगर परिषद सफाई यूनियन के पदाधिकारियों को बुलाया। पदाधिकारी सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान सुरेंद्र यादव व ऋषिकेश ढांडा के नेतृत्व में बैठक में शामिल हुए। बैठक परिषद के हाल कमरे में बुलाई गई। बैठक के दौरान कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र सिंह, चेयरपर्सन प्रतिनिधि रिंकू सैनी, सेनेटरी इंस्पेक्टर दीपक झांब, एसओ वजीर सिंह, राजेंद्र दुआ, संघ के उपप्रधान रविंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष भगवान सिंह, रमेश कुमार, संतोष देवी व प्रेम कुमार उपस्थित रहे। संघ के द्वारा उनकी मांगों को एक-एक करके परिषद के अधिकारियों के समक्ष रखा गया। पहली मांग रही कि सफाई कर्मचारियों के रुके हुए एरियर दिलवाए जाएं। एरियर सिनियोरिटी के हिसाब से दिलवाए जाएं। परिषद के अधिकारियों ने इस पर सहमति जताई। कर्मचारियों को ड्रेस, जूते, सेफ्टी किट देने की मांग की गई। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि दस दिन में टेंडर लग जाएगा। संघ द्वारा कहा गया कि कर्मचारियों का ईएसआई कार्ड की किस्त जनवरी 2014 से काटी जा रही है। लेकिन अभी तक कर्मचारियों को न तो ईएसआई नंबर दिया गया व न ही कार्ड दिया गया। परिषद के अधिकारियों ने कहा कि पूरे प्रदेश की किसी भी नगर परिषद या पालिका में कर्मचारियों को कार्ड नहीं दिए गए हैं। संघ ने इसके लिए 15 दिन का समय दिया। ईपीएफ के कितने पैसे कटते है, इसकी दो दिन में लिस्ट दी जाएगी।

बोले-पार्षद करवाते हैं घरों की सफाई

सफाई कर्मचारियों ने कहा कि पार्षद उनसे घरों की, खाली प्लॉट की सफाई करवाते हैं। यह गलत है। जिस पर परिषद के कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र सिंह तैश में आ गए और कहने लगे कि पार्षद ही परिषद के हाऊस को चलाते हैं, पार्षद जिस एजेंडा को पास करते हैं। शहर में उसी आधार पर कार्य होते हैं। पार्षदों का विरोध करना सही नहीं है। सेनेटरी इंस्पेक्टर ने कहा कि अगर प्लॉट का कूड़ा सड़कों पर आएगा, तब भी तो उन्हें ही साफ करना होगा।

ईओ बोले-लोग टैक्स नहीं देते

सफाई कर्मचारियों ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार उन्हें हर माह की सात तारीख को वेतन मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें माह के अंत में वेतन मिलता है। परिषद के कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि नगर परिषद के पास सभी कर्मचारियों के वेतन देने के लिए कोई अलग से फंड नहीं आता। लोग अपना टैक्स नहीं भरते, भवन निर्माण के लिए नक्शे नहीं पास करवाते व न ही फीस भरते हैं। ऐसे में परिषद के पास आमदनी नहीं होती। परिषद विकास कार्यों के फंड से कर्मचारियों का वेतन देकर गुजारा कर रही है।

बरवाला रोड पर डलवाएंगे कचरा

संघ व यूनियन के पदाधिकारियों कहा गया कि सफाई कर्मचारियों को शहर का कचरा एकत्रित करके उसे डंप करने में समस्या आती है। लोग अपने घरों के आस पास कचरा एकत्रित नहीं करने देते व शहर में कचरा डंपिंग की जगह नहीं है। जिस पर चेयरपर्सन प्रतिनिधि रिंकू सैनी ने कहा कि बरवाला रोड पर विराट नगर से आगे कचरा डंपिंग के लिए जगह तय की गई है। थोड़े दिनों में वहीं कचरा डंप करवाया जाएगा।

कर्मियों की संख्या बढ़ाने की भी मांग

बैठक में शहर में सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई। अधिकारियों ने कहा कि उनके पास 118 कर्मचारियों की मंजूरी है। इसलिए इतने ही कर्मचारी लगाए जा सकते हैं। अगर सरकार या डीसी मंजूरी देंगे, तभी कर्मियों की संख्या बढ़ा सकते हैं।

हड़ताली सफाई कर्मचारियों के नेताओं से बात करते नगर परिषद के अधिकारी।

झाडू के लिए मिलते हैं पांच रुपये

पक्के कर्मचारियों ने कहा कि झाडू के लिए उन्हें मात्र पांच रुपये मिलते हैं। इतने रुपये में झाडू नहीं आती। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि नगर परिषद पांच रुपये वेतन से काटकर उन्हें झाड़ू दिलवाए। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि यह सरकार के निर्देश हैं।

हाजिरी की एसओ को दें सूचना

बैठक में कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र सिंह ने सेनेटरी इंस्पेक्टर को निर्देश दिए कि कर्मचारियों की हर रोज हाजिरी दर्ज हो। कुछ कर्मचारी फरलो मारते हैं व दोपहर दो से शाम पांच बजे तक काम पर नहीं आते। इसलिए हर रोज हाजिरी लेकर एसओ को सौंपी जाए। जिस पर संघ के पदाधिकारियों ने भी सहमति जताए।

आरोप-कुछ शरारती लोगों को बुलाया

संघ के प्रधान सुरेंद्र यादव व सचिव ऋषिकेश ढांडा ने परिषद के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि कुछ शरारती लोगों को माहौल खराब करने के लिए बुलाया गया। बैठक में कुछ रिटायर्ड कर्मचारी भी उपस्थित रहे। जिनका बैठक से लेना देना नहीं था।

72 घंटे का दिया था समय: यादव



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