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कबूतरबाजी मामला

मलेशिया से वापिस लौटे सुनील नारनौंद, प्रवीन उर्फ सिटू व सुनील बरवाला ने बताया कि चंद्र प्रकाश से उनकी जान पहचान...

Dainik Bhaskar

Feb 10, 2018, 04:05 AM IST
कबूतरबाजी मामला
मलेशिया से वापिस लौटे सुनील नारनौंद, प्रवीन उर्फ सिटू व सुनील बरवाला ने बताया कि चंद्र प्रकाश से उनकी जान पहचान थी। उसने दिसंबर माह में बताया था मलेशिया में वह उन्हें एक कंपनी में लगवा देगा। वहां जाने के लिए उसने कुल डेढ़ लाख रुपए खर्च की बात कही। उसने कहा था कि वहां 45 हजार रुपए प्रतिमाह मिलेंगे, हर रोज 8 घंटे काम करना है। खाना व आवास भी कंपनी ही देगी। उसकी बातों में आकर हमने चंद्र व उसके पिता बलवंत सैन को पैसे दे दिए।

युवकों ने कहा कि उनका परिवार तंग हालत में है। परिजनों ने ब्याज पर पैसे उठाकर दिए थे। 8 जनवरी को वे यहां से रवाना हो गए। 11 जनवरी से उन्होंने दस्ताने बनाने की कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। यहां एक दिन में एक व्यक्ति से 40 हजार दस्ताने पैकिंग करवाए जाते थे। चंद्र प्रकाश 8 घंटे काम करने की बात कह कर ले गया था लेकिन वहां 13 घंटों से अधिक काम करना पड़ा। यदि कम दस्ताने पैक करते थे तब पैसे काट लिए जाते। 45 हजार रुपए प्रतिमाह देने की बात सब कोरी साबित हुई।

प्रवीन ने कहा कि चंद्र ने उसका मोबाइल भी चुरा लिया था। 45 हजार तो दूर उनका वहां गुजर बसर भी मुश्किल हो गया। मलेशिया के जलान शहर में बनी कंपनी की फैक्ट्री में उनसे बंधुआ जैसा व्यवहार किया जा रहा था। युवकों ने कहा कि मलेशिया पहुंचने के बाद उन्होंने चंद्र को 40 व 30 हजार रुपए अलग से दिए। यही नहीं चंद्र ने उनका पासपोर्ट भी लेकर साजिद खान को दे दिया। कंपनी ने जंगल के बीच रहने के लिए केबिन दिए हुए थे। यहां वे केबिन में जमीन पर सोते थे। 26 लोगों के लिए 2 शौचालय थे। दो रोज पहले साजिद ने उन्हें टार्चर कर पासपोर्ट के साथ फोटो खींच कर उनके परिजनों के पास भिजवा दी। साजिद खान व चंद्र ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि यदि अब कोई वीडियो वायरल किया तो वे यहां जान से मरवा देंगे। युवकों ने बताया कि जहां वे काम करते थे वहां 50 से अधिक लोग फंसे हैं। युवकों ने आरोप लगाया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर चंद्र के परिजनों ने भी उन्हें धमकाया। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

मलेशिया गए तीनों युवक वापस लौटे, आरोपित भी साथ आया

मलेशिया गए बरवाला के प्रवीन व सुनील तथा नारनौंद के सुनील शुक्रवार शाम को बरवाला पहुंच गए। साथ ही आरोपित युवक चंद्र प्रकाश भी तीनों युवकों के साथ आया है। युवकों को पुलिस स्वयं दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर आई है। चौकी प्रभारी जयपाल सिंह ने सभी के बयान दर्ज किए। पुलिस ने चंद्र को भी पूछताछ कर परिजनों के हवाले कर दिया। आरोपित चंद्र प्रकाश का पिता बलवंत सैन कहीं नजर नहीं आया।

चंद्र झूठ बोलकर हमें ले गया और वहां फंसा दिया, 8 की जगह 13 घंटे करना पड़ रहा था काम, पैकिंग कम होती तो काट लेते थे पैसे

अपने भतीजे सुनील और बेटे प्रवीन को दुलार करतीं संतोष।

सब बेरोजगार थे, मैं मलेशिया जा रहा था तो इन्हें भी रोजगार के लिए साथ ले गया

भास्कर न्यूज | बरवाला

मामले के आरोपित चंद्र प्रकाश से जब इस बारे बात की तो उसने बताया कि उसकी सुनील, प्रवीन व सुनील के साथ पिछले 3-4 साल से दोस्ती है। वह जब मलेशिया से पिछली बार आया था तो इन्होंने उससे विदेश जाने की बात कही थी। इन्हें ग्लव्स कंपनी में काम करने के बारे पहले ही बताया था। इन्हें रोजगार दिलवाने के लिए इनकी इच्छा पर वहां बुलाया था। चंद्र प्रकाश ने कहा कि वहां पहुंचने के बाद बरवाला निवासी सुनील ने बहुत कम दिन काम किया बाकी दिन इसने मौज मस्ती में बिताए। नारनौंद के सुनील ने केवल दो तीन दिन काम नहीं किया बाकी दिन वो लगातार कंपनी में काम के लिए गया। इनका मन मलेशिया से ऊब चुका था। ये लोग सिंगापुर जाने के सपने ले रहे थे। 10 फरवरी को सेलरी मिलने से पहले ही हिसाब करने की बात शुरू कर दी जबकि कंपनी द्वारा 10 फरवरी को सेलरी दी जानी तय थी। इन तीनों ने अनाप शनाप इल्जाम लगाने शुरू कर दिए। कंपनी में करीबन 34 हजार रुपए पसेलरी थी। तीनों से डेढ़ लाख रुपए नहीं लिए गए हैं। प्रवीन से एक लाख 10 हजार, सुनील नारनौंद से 1 लाख 20 रुपए लिए थे। ये सब राशि कागजातों व आने जाने पर खर्च हुए हैं।

आरोपित चंद्र प्रकाश बोला

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