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ये महिलाएं हैं उदाहरण... कामकाज के साथ संभाला परिवार के खर्च का जिम्मा

बावल क्षेत्र के गांव शाहपुर निवासी कांता ने दो साल पहले कृषि विज्ञान केंद्र बावल से सिलाई-कढ़ाई में प्रशिक्षण लिया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 08, 2018, 03:05 AM IST

बावल क्षेत्र के गांव शाहपुर निवासी कांता ने दो साल पहले कृषि विज्ञान केंद्र बावल से सिलाई-कढ़ाई में प्रशिक्षण लिया और घर में ही बुटिक खोल लिया। कांता बताती हैं कि वह घर का काम निपटाने के बाद दिन में 4-5 घंटे सिलाई-कढ़ाई करती हैं। गांव से काफी कपड़े सिलाई के लिए आते हैं और वह मेहनत के दम पर हर माह ठीक-ठाक आमदमी कर लेती हैं।

कांता का कहना है कि अब से कुछ साल पहले घर की आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर नहीं थी, जिससे घर खर्च भी चलाना मुश्किल हो जाता था। उनके पति राजेंद्र सिंह ने भी केवीके बावल से ही मधुमक्खी पालन में प्रशिक्षण लिया है और अब दोनों मिलकर घर खर्च आसानी से चला रहे हैं। कांता ने बताया कि उनके 4 बच्चे हैं। बड़ी लड़की स्कूल के बाद कुछ समय सिलाई-कढ़ाई में भी हाथ बंटा लेती हैं। बच्चों की पढ़ाई में भी अब कोई दिक्कत नहीं आती है।

पहले खुद सीखा, आज दूसरी महिलाओं को भी सिखा रही सिलाई कढ़ाई : बावल निवासी सीमा सैनी की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। गृहिणी होने के कारण एक समय ऐसा था जब घर से बाहर निकलकर कुछ सीखने या कमाने की बात भी सोचना मुश्किल था। वर्ष 2008 में कृषि विज्ञान केंद्र बावल से जुड़ी। वहां सिलाई-कढ़ाई में ट्रेनिंग प्राप्त की और अब बावल में खुद का बुटिक भी है और महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। सीमा बताती हैं कि केवीके बावल में डॉ. वीना जैन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेकर खुद का बुटिक खोलने के साथ ही वह सबसे पहले सन फाउंडेशन, उसके बाद पीएनबी स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र और अब दक्ष संस्थान से जुड़ी हैं। उनके अंतर्गत 13 से ज्यादा गांव आते हैं। वह उन सेंटरों पर जाकर महिलाओं काे सिलाई-कढ़ाई के बारे में ट्रेनिंग देती हैं। उनके पति धीरज सैनी का भी अब इस काम में पूरा सहयोग मिल रहा है।

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