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कम पानी में पैदा होने वाली अरंड की फसल की खेती करें किसान इसमें खर्च कम व मुनाफा ज्यादा

रेवाड़ी. केवीके बावल की ओर से जड़थल में आयोजित अरंड खेती पर प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित कृषि अधिकारी व किसान।...

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 03:05 AM IST
रेवाड़ी. केवीके बावल की ओर से जड़थल में आयोजित अरंड खेती पर प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित कृषि अधिकारी व किसान।

भास्कर न्यूज | रेवाड़ी

कृषि अनुसंधान केंद्र बावल की ओर से सोमवार को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत जड़थल में अरंड की खेती को लेकर एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्र के निदेशक डॉ. सत्यवीर यादव ने कहा कि बावल स्थित यह केंद्र फसलों के लिए एम्स का कार्य कर रहा है। किसानों को इसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अरंड की खेती कम पानी में पैदा होने वाली फसल है। कृषि विभाग के उपनिदेशक चांदराम ने किसानों को कृषि विभाग की ओर से किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली योजनाओं की जानकारी दी। अरंड की फसल के विशेषज्ञ डॉ. जोगिंद्र यादव ने किसानों को बताया कि अरंड की फसल कम पानी में पैदा होने वाली फसल है। इससे न केवल अधिक बचत मिलती है, बल्कि अन्य फसलों की तुलना में अधिक लाभ भी मिलता है। डॉ. यशपाल यादव ने उन्नत किस्म के बीजों के बारे में जानकारी दी। डॉ. बलबीर सिंह ने कीटनाशकों के बारे में बताया। इस मौके पर एसडीओ डॉ. दीपक यादव, डॉ. नरेश कौशिक व प्रमोद यादव ने भी किसानों को विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। इस मौके पर तुलसीराम, अशोक, मनीराम, लक्खीराम, बिजेंद्र सिंह, रतनलाल, करण सिंह व शिवचरण आदि मौजूद रहे।