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बच्चों को मिले

वर्ष 2008 में बच्चों को रिझाने और उनके मनोरंजन के लिए एक योजना तैयार की गई थी योजना के तहत शहर के राव तुलाराम पार्क में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 10, 2018, 04:05 AM IST

वर्ष 2008 में बच्चों को रिझाने और उनके मनोरंजन के लिए एक योजना तैयार की गई थी योजना के तहत शहर के राव तुलाराम पार्क में 8 लाख रुपए खर्च कर जिगजैग फिसल पट्‌टी, रोलिंग फिसल पट्‌टी, बैलेंसिंग झूले लगा दिए गए। लेकिन इन्हें पार्क मंें लगाने के बाद नगर परिषद के अधिकारी इन्हें देखना भी भूल गए। समय बीतने के साथ और देखभाल के अभाव में ये झूले धीरे-धीरे टूटते चले गए। इस समय हालात ये है कि झूले बच्चों के मनोरंजन की बजाय जोखिम भरे ज्यादा हो गए हैं। फिसल पट्‌टी में बड़े -बड़े होल हो गए हैं। ऐसे में बच्चे इन पर झूलें तो कैसे झूलें? पार्क में खेलने के लिए बच्चे हर दिन आते हैं, लेकिन वे कैसे झूलें? बता दें कि यह शहर का एक मात्र ऐसा पार्क है जहां बच्चों के खेलने के लिए इतने महंगे और अलग-अलग तरह के झूले लगाए गए थे। वहीं पार्क में कई कुर्सियां भी टूट चुकी हैं। स्थानीय निवासियों की मांग है कि जिला प्रशासन शहर को एक पार्क तो ऐसा दे जहां बच्चों के झूलने के खास झूले हों।

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शहर को एक पार्क तो ऐसा दें- जहां बच्चों के झूलने के खास झूले हों

जिगजैग फिसल पट्‌टी टूटी

इन झूलों को लगे काफी समय हो गया। अब कई जगह से टूट गए हैं। इनके सुधार को प्रयास होंगे। यदि कोई पार्ट बदलकर इन्हें चालू हालत में किया जा सके तो उस पर भी विचार होगा। -अजय सिक्का, एमई, नगर परिषद।

रोलिंग फिसल पट्‌टी में होल

बैलेंस झूले पर पत्थरों का बैलेंस

कैसे निखरें प्रतिभाएं- ट्रैक उखड़ा, जाल गायब

92 लाख का स्टेडियम, एक साल में कोई प्रतियोगिता नहीं

बावल | खेल विभाग की ओर से बावल कस्बे में युवाओं के लिए बनवाया मिनी खेल स्टेडियम शुभारंभ से ही बंद पड़ा है। साढ़े 4 एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैले इस स्टेडियम को 92 लाख रुपए की लागत से पंचायतराज विभाग ने तैयार किया था। अप्रैल 2017 में यह खेल विभाग के अधीन आ गया था। हैरानी की बात ये है कि बनने से लेकर आज तक इस स्टेडियम में कोई प्रतियोगिता तक नहीं कराई गई। नियमानुसार अभ्यास के लिए एक खिलाड़ी तक नहीं पहुंचा। खेल विभाग द्वारा भी देखरेख के लिए यहां कोई केयर टेकर नहीं लगाया। अब हालात ऐसे हैं कि बगैर खेल शुरू हुए ही इसमें बनाए गए बास्केटबॉल कोर्ट की जालियां तक गायब हैं। सीमेंटेड कोर्ट में दरारें भी आने लगी हैं। एथलेटिक ट्रैक उखड़कर उबड़-खाबड़ हो चुका है। बिल्डिंग के ज्यादातर शीशे भी तोड़ दिए गए हैं। इतना ही नहीं बाइक व पैदल जाने के लिए चारदीवारी को भी कुछ दूरी में तोड़ा हुआ है।

अभी तक प्रशिक्षिकों की कमी रही है। अब कुछ नए कोच मिले हैं। जल्द ही व्यवस्था बनाकर बावल मिनी स्टेडियम में भी ट्रेनिंग के लिए कोच की ड्यूटी लगाई जाएगी। स्टेडियम में जो भी कमी है उसे दुरूस्त कराया जाएगा।-सुकन्या यादव, जिला खेल अधिकारी, रेवाड़ी।

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