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न कहीं नाके न कोई चेकिंग; गुड्स ट्रांसपोर्टर बोले- हमें नहीं जानकारी

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के अंतर्गत 1 फरवरी को रात 12 बजे से गुड्स ट्रांसपोर्ट बिल सर्विस में नई व्यवस्था...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 04:05 AM IST
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के अंतर्गत 1 फरवरी को रात 12 बजे से गुड्स ट्रांसपोर्ट बिल सर्विस में नई व्यवस्था सरकार की आधी-अधूरी तैयारी के चलते ‘सिर्फ कागजों’ में ही लागू होती नजर आई। इंटर-स्टेट व राज्य के अंदर सामान ले जाने के लिए एकल बिल सर्विस ‘ई-वे बिल’ अभी धरातल से कोसों दूर है। बुधवार को रात 12 बजे से 12.40 बजे तक दैनिक भास्कर की लाइव रिपोर्ट में सरकार की अधूरी योजना व इंतजामात की खामियां सामने आईं।

गुड्स ट्रांसपोर्ट के लिए ई-वे बिल लागू होने पर भी एनएच-8 पर न कहीं नाके मिले और न ही कोई अधिकारी चेकिंग करते दिखे। जबकि यहां से हर रोज हजारों की संख्या में दिल्ली, धारूहेड़ा, बावल से राजस्थान तक गुड्स ट्रांसपोर्टर के वाहन सरपट दौड़ते हैं। संगवाड़ी चौक, कसौला चौक, एचएसआईआईडीसी, आईएमटी बावल से बनीपुर चौक तक गुड्स ट्रांसपोर्टर के वाहन निकलते रहे। बनीपुर चौक पर रात सवा 12 बजे से 12.40 तक लगे जाम में फंसे ट्रांसपोर्टर्स से बातचीत की तो अलग ही वाकया सामने आया। दिल्ली से जनरल स्टाेर का सामान लेकर जा रहे ट्रांसपोर्टर सतीश व सदर बाजार दिल्ली से कपड़ों की डिलीवरी राजस्थान करने जा रहे मानव कुमार ने कहा कि ई-वे बिल को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं है। मालिक ने कागजी बिल ही दिए हैं। अगर आगे काेई चेकिंग करता है, तो मालिक से बात करा देंगे।

व्यापारियों को राज्य से बाहर सामान भेजने या मंगवाने के लिए ई-वे जरूरी है। वहीं राज्य के अंदर भी 50 हजार रुपए या इससे ज्यादा का सामान 10 किलोमीटर से दूर भेजना है तो ई-वे बिल जनरेट करना होगा। अगर सामान के साथ ई-वे बिल नहीं मिला तो टैक्स के साथ जुर्माना भुगतना पड़ेगा। बता दें कि पहले राज्य के अंदर ई-वे बिल की अनिवार्यता 1 जून से लागू करने की योजना थी।

लेट नाइट लाइव रिपोर्ट

गुड्स ट्रांसपोर्ट बिल सर्विस में बदलाव

रेवाड़ी. बुधवार रात 12:40 पर एनएच आठ स्थित बनीपुर चौक से गुजरते वाहन।

व्यापारी ऑनलाइन जनरेट करें ई-वे बिल

व्यापारियों को ऑनलाइन ई-वे बिल जनरेट करना होगा। यह 2 अलग-अलग हिस्सों में जनरेट किया जा सकेगा।

पार्ट-1 में व्यापारी या कोई भी व्यक्ति ewaybill.nic.in पर जाकर खरीदे गए सामान या भेजे जाने वाले सामान का मूल्य, नंबर ऑफ गुड्स, डिलीवरी स्थान व अन्य जरूरी जानकारियां भरकर ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं।

पार्ट-2 में ट्रांसपोर्टर को गाड़ी संख्या, कैटेगरी के अनुसार कुल सामान व अन्य जानकारी भरनी होगी, इसके बाद ई-वे बिल जनरेट होगा।

यह है जुर्माने का प्रावधान

नंबर-1 : 0 % जीएसटी यानि टैक्स फ्री सामान ले जाने के लिए भी ई-वे बिल जनरेट करना जरूरी है। अगर चेकिंग के दौरान सामान पकड़ा जाता है, तो पेनल्टी लगाई जाएगी। सामान की कुल कीमत का 25 प्रतिशत जुर्माना वसूला जाएगा। यानि अगर 1 लाख रुपए का टैक्स फ्री सामान लेकर जा रहे हो व ई-वे बिल नहीं है, तो 25 हजार रुपए जुर्माना देना होगा।

जीएसटी के अंतर्गत 15 दिन के ट्रायल के बाद राज्य के अंदर व राज्य के बाहर एक साथ लागू

नंबर-2: अगर आप 18 प्रतिशत जीएसटी वाला एक लाख रुपए का सामान बिना ई-वे बिल लेकर जा रहे है, तो पेनल्टी के तौर पर माल की कीमत का 50 प्रतिशत यानि 50 हजार व 18000 रुपए जीएसटी, कुल मिलाकर 68000 रुपए पेनल्टी भरनी होगी। लगातार लापरवाही सामने आने पर कानूनी केस किया जाएगा व तदानुपरांत सजा मिलेगी।

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