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ओवरलोड डंपर ने ली जेई की जान; एसो. भड़की साढ़े 4 घंटे नहीं उठाया शव, शहीद का मांगा दर्जा

ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हाईवे पर बेरिकेड्स लगा रहे पंचायती राज विभाग के जेई को डंपर ने रौंद दिया।...

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 04:10 AM IST
ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हाईवे पर बेरिकेड्स लगा रहे पंचायती राज विभाग के जेई को डंपर ने रौंद दिया। घटना के बाद चालक आसानी से डंपर को मौके से भगा ले लिया। सोमवार को घटना पर गुस्साई जेई एसोसिएशन धरने पर बैठ गई। दोपहर के समय जिला प्रशासन के लिखित आश्वासन पर धरना समाप्त कर दिया गया। बावल थाना पुलिस ने मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है। घटनाक्रम पर गौर करें तो हाईवे पर चालान काटने को भेजे गए अधिकारी पूरी तरह अनट्रेंड थे। इन्हें प्रशासन की ओर से वाहनों को रोकने और बैरिकेड्स लगाने जैसी कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई। हैरानी की बात ये है कि मौके पर सुरक्षा के लिए केवल 3 ही पुलिसकर्मी तैनात थे। आसपास जिप्सी तक नहीं। इसी के चलते जेई को रौंदते हुए डंपर चालक आसानी से मौके भागने में कामयाब हो गया। पुलिस अफसरों का कहना है कि प्रशासनिक अफसरों ने जितना पुलिसबल मांगा उतना दे दिया था।

डीएसपी बोले- जितनी पुलिस सुरक्षा मांगी हमने कर्मी भेजे : डीएसपी सुरेश हुड्डा का कहना है कि डीसी पंकज के निर्देशानुसार ड्यूटियां लगाई गई थीं। टीम के साथ हमसे जितनी पुलिस सुरक्षा मांगी गई थी, हमने उतने कर्मी भेजे। रही बात पेट्रोलिंग जिप्सी की तो वो आसपास ही गश्त पर थी। घटना के तुरंत बाद नाकाबंदी कर जांच भी की गई थी। इसका कुछ सुराग भी लगा है, जल्द ही आरोपी पुलिस गिरफ्त में हाेगा।

अस्पताल में धरने पर बैठी जेई एसो.

साथियों ने मृतक के बच्चे के लिए मांगी सरकारी नौकरी, डंपर चालक के विरुद्ध किया कहत्या का मुकदमा दर्ज, सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

घटना की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। देर रात शव नागरिक अस्पताल लाया गया। मंगलवार सुबह शव का पोस्टमार्टम हुआ। इस दौरान सुबह करीब 10 बजे जेई एसोसिएशन ने अस्पताल परिसर में शवगृह के सामने ही धरना शुरू कर दिया। उन्होंने मांग रखी कि मृतक के परिवार से एक बच्चे को सरकारी नौकरी, 5 करोड़ का मुआवजा तथा शहीद का दर्जा दिया जाए। बावल एसडीएम सुरेश कुमार ने मांगें मानने का लिखित आश्वासन देकर दोपहर करीब 2.30 बजे धरना समाप्त कराया।

एसडीएम केे सरकार तक मांगें पहुंचाने के लिखित आश्वासन पर माने

आर्मी के बाद मई 2016 में बने थे जेई, ये पहली ज्वाइनिंग थी : चरखी दादरी के गांव अचीना के रहने वाले हरिओम परिवार के साथ चरखी दादरी की विद्या विहार कॉलोनी में रह रहे थे। पहले वे आर्मी में थे, जहां से सेवानिवृति लेकर वे मई 2016 में पंचायती राज में जेई के पद पर भर्ती हुए। रेवाड़ी के नाहड ब्लॉक में यह उनकी पहली ही ज्वाइनिंग थी। हरिओम का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव अचीना में गमगीन माहौल में किया।

हरिओम के दोनों बच्चों ने की है इंजीनियरिंग की पढ़ाई : हरिओम का 27 वर्षीय बेटा बीटेक की पढ़ाई के बाद प्राइवेट कंपनी में काम कर रहा है। वह विवाहित है तथा उसके एक साल की बेटी भी है। योगेश से छोटी बहन ज्योति ने जयपुर से एमटेक की पढ़ाई की है तथा वर्तमान में कॉलेज में प्राइवेट ही पढ़ाती भी हैं। एसोसिएशन सदस्यों ने योगेश को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है।

सर्विसलेन से निकलने लगे डंपर, जेई बेरिकेड्स लगाने लगा तो कुचला

सरकारी निर्देशानुसार ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए डीसी पंकज ने जिला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की टीमें गठित की हुई हैं। सोमवार रात को नाहड ब्लॉक से पंचायती राज के एसडीओ बलवंत सिंह के नेतृत्व में एक टीम खेड़ा मुरार बैरियर पर तैनात थी। रात करीब साढ़े 11 बजे कुछ ओवरलोड डंपर व हाईवा एनएच-8 की सर्विसलेन से होकर गुजरने लगे। इन्हें रोकने के लिए टीम में शामिल जेई हरिओम (48) बेरिकेड्स लगाने लगा। इसी दौरान एक चालक डंपर को तेज रफ्तार में दौड़ाते हुए लाया तथा ब्रेक लेने की बजाय डंपर को सीधा जेई के ऊपर से गुजार दिया। डंपर का पहिया जेई के शरीर के बीचों-बीच से गुजर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

मिलीभगत से चलता है ओवरलोडिंग का खेल, डंपर ले चुके बहुतों की जानें ओवरलोड डंपर पहले भी दर्जनों जानें ले चुके हैं। ओवरलोडिंग और अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चलता रहा है। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने जमकर जेबें भरी। इन आरोपों में कुछ पुलिसकर्मी सस्पेंड तक हो चुके हैं। जनवरी 2018 से सरकार ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को ओवरलोड व अवैध वाहनों पर चालान का अधिकार दिया।