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किसी वार्ड में 17 सौ, किसी में 5 हजार वोट, 2011 की वार्डबंदी बिगाड़ेगी चुनावी समीकरण, नए उम्मीदवारों को नुकसान

Bawal News - राज्य चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के साथ ही नगर परिषद में चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। नगर परिषद में मतदाता सूची...

Dainik Bhaskar

Jan 31, 2018, 09:23 PM IST
किसी वार्ड में 17 सौ, किसी में 5 हजार वोट, 2011 की वार्डबंदी बिगाड़ेगी चुनावी समीकरण, नए उम्मीदवारों को न
राज्य चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के साथ ही नगर परिषद में चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। नगर परिषद में मतदाता सूची तैयार करने का काम शुरू हो गया है। 12 मार्च से तक इनका प्रकाशन किया जाना है। महत्वपूर्ण बात ये है कि इस बार भी वर्ष 2011 में हुई पुरानी वार्डबंदी से ही चुनाव होने हैं तथा उस वार्डबंदी के अनुसार किसी वार्ड में 17 सौ तो किसी में 5 हजार तक भी वोट हैं। 7 साल पुरानी वार्डबंदी इस बार भी चुनावी समीकरण बिगाड़ेगी। वार्डों में वोटों बिगड़े अनुपात का असर ये रहेगा कि पार्षदों को उसी अनुरूप भागदौड़ भी करनी होगी। क्योंकि किसी को महज कुछ सौ वाेट में जीत मिल जाएगी तो कुछ को हजारों लोगों को अपने समर्थन में लाने के लिए जोर लगाना पड़ेगा। जैसे यदि किसी वार्ड में 17 सौ वोट हैं और 4 उम्मीदवार मैदान में है तो जो उम्मीदवार 500 वोट भी ले आए तो जीत का दावेदार होगा । जबकि 5 हजार वोटर संख्या वाले वार्ड में उम्मीदवार को दो हजार वाेट भी लेने पड़ सकते हैं।

वर्ष 2013 में चुनाव से पहले वार्डबंदी में गड़बड़ाया अनुपात

रेवाड़ी नगर परिषद के पिछले चुनाव वर्ष 2013 में कराए गए थे। इसके लिए वर्ष 2011 में वार्डबंदी कराई गई। उस वार्डबंदी पर आज तक सवाल उठते रहे हैं। अधिकारियों की माने तो नियम है कि सभी वार्डों में मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर या फिर ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए। जबकि उस समय हुई वार्डबंदी को देखें तो भारी अंतर है। वार्ड 22 में वर्तमान में ही करीब 17 सौ से 18 सौ के बीच वोटर हैं। यही स्थिति वार्ड 16 व 17 में भी है, इनमें भी वोट दो-ढाई हजार के आसपास हैं। जबकि वार्ड-20 में 48 सौ, वार्ड- 18 में 4 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। इस कारण चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों को भी आपत्ति रहती हैं।

वोटर संख्या कम ज्यादा होने से ऐसे असर... काेई 500 वोटों में जीत जाएगा, किसी को दो हजार चाहिए

रेवाड़ी शहर

बावल चौक

सवाल... 25 लाख रुपए से ज्यादा खर्च का सर्वे किस काम का?

नप ने जनवरी माह की शुरूआत में कंपनी को सर्वे के लिए टेंडर दिया हुआ है। यह एजेंसी 62 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से सर्वे का काम कर रही है। इस लिहाज से 25 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च पूरे सर्वे पर आना है। जबकि पुरानी वार्डबंदी से चुनाव होने हैं। ऐसे में सवाल तो यही है कि आखिर नप की टेंडर प्रक्रिया में देरी से सर्वे भी लेट हुआ, अब यह सर्वे किस काम का।

पुरानों को फायदा नए के लिए चुनौती


बस अड्डा

नई वार्डबंदी से होने चाहिए थे चुनाव


रोडवेज कार्यशाला

माॅडल टाउन

हम रिपोर्ट भेजेंगे, आगे सरकार का फैसला


नई वार्डबंदी से बदलता वार्डों का भूगोल ...मगर नोटिफिकेशन हो गया : नगर परिषद द्वारा पिछले करीब 6-7 माह से ही नई वार्डबंदी को लेकर माथापच्ची की जा रही है। नई वार्डबंदी अगर होती तो मतदाता संख्या के हिसाब से कुछ हिस्सा दूसरे वार्ड में चला जाता। वार्डों की संख्या भी बढ़ने की संभावना भी। जो एजेंसी सर्वे कर रही है उसे 28 जनवरी तक काम पूरा कर रिपोर्ट देनी थी। लेकिन समय पर पूरा नहीं हा़े सका, जबकि राज्य चुनाव आयोग ने पुरानी वार्डबंदी से ही चुनाव कराने को लेकर 23 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर दिया।

आंकड़ों से समझें आगामी चुनावी स्थिति...





आगे क्या? सर्वे जारी, 27 वार्ड कवर- विभाग को भेजेंगे रिपोर्ट

शहर के 31 में से 27 वार्डों में फील्ड सर्वे काम पूरा हो चुका है, जिसमें एजेंसी की टीमें घर-घर जाकर जनसंख्या का डाटा जुटा चुकी हैं। सर्वे के बाद अब डाटा इंटीग्रेशन का काम होगा। इसमें आंकड़ों को सेटेलाइट से लिंक किया जाना है। एजेंसी प्रोपराइटर डीके भारद्वाज का कहना है कि वे 10 फरवरी तक काम पूरा कर देंगे। नप द्वारा यह रिपोर्ट अर्बन लोकल बॉडीज को भेजी जाएगी।

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