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लॉजिस्टिक हब को केंद्र ने 1 हजार करोड़ की वित्तीय ग्रांट के साथ दी मंजूरी, ‌Rs.30 लाख प्रति एकड़़ ली जा रही जमीन

दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के साथ बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 03:05 AM IST

दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के साथ बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार रास्ता साफ कर दिया है। केंद्र ने इस हब के निर्माण को अपनी ओर से मंजूरी प्रदान करने के साथ ही इसके लिए एक हजार करोड़ रुपए की राशि देने का भी ऐलान किया है। इस हब के निर्माण के लिए किसानों से जमीन खरीदने का काम एचएसआईआईडीसी (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रीयल इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉर्पोरेशन) कर रही है।

यह जमीन 30 लाख रुपए प्रति एकड़़ की दर से ली जा रही है। अब तक 857 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है। एचएसआईडीसी व डीएमआईसीडीसी इस प्रोजेक्ट को दो फेज में बनाएगी। इसके लिए कई विदेशी कंपनियां अपना रुझान दिखा रही हैं। कइयों के प्रतिनिधियों ने मौके पर मुआयना भी किया है। बता दें कि इस हब के लिए सरकार ने 1212 एकड़ जमीन खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत तलोट की करीब 250 एकड़, घाटाशेर की 450 तथा बसीरपुर की 500 एकड़ जमीन लेने के प्लान के तहत शामिल है। जमीन के लिए नवंबर 2016 में किसानों व एचएसआईआईडीसी के बीच एग्रीमेंट शुरू हुए थे। अब तक दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के साथ बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए सरकार ने अब तक लगभग 857.114 एकड़ भूमि सीधे किसानों से खरीद ली है। हब का पहला फेज शुरू करने के लिए 886 एकड़ की जरूरत होगी। शेष बची हुई जमीन को लेने के लिए सरकार कनसॉलिडेटड प्रोजेक्ट लैंड, विशेष प्रावधान एक्ट- 2017 के तहत उन किसानों को अन्य जगह पर जमीन देगी। ये वे किसान हैं, जो अपनी जमीन नहीं देना चाहते।

1212 एकड़ जमीन खरीदने का लक्ष्य निर्धारित

अब तक खरीदी जा चुकी है 857 एकड़ जमीन

क्या है लॉजिस्टिक हब

सामान की ढुलाई के लिए दिल्ली-मुंबई डेडिकेटेड फ्रेट रेल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। जो अटेली, नारनौल, निजामपुर होकर गुजर रहा है। इस कॉरिडोर से देश के उत्तरी क्षेत्र से दक्षिणी क्षेत्र तक सामान की व्यापक स्तर पर ढुलाई होगी। लॉजिस्टिक हब के तहत सर्वप्रथम इस कॉरिडोर पर कंटेनर डिपो बनाने की योजना है। इन कंटेनर डिपो पर सामान की लोडिंग-अनलोडिंग होगी। एक तरह से यह कंटेनर शुष्क बंदरगाह की तरह काम करेगा। इसके बाद इससे संबंधित औद्योगिक इकाइयां विकसित की जाएंगी। रेल तथा रोड की सुगम कनेक्टिविटी होने के कारण अन्य उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

पहले बावल में प्रस्तावित था हब

औद्योगिक क्षेत्र के लिए हुडा राज में सरकार द्वारा पहले बावल क्षेत्र के 16 गांवों की 3664 एकड़ 4 कनाल जमीन अधिग्रहित की जानी थी। इसका वहां के किसानों ने विरोध करते हुए प्रति एकड़ 2 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग कर दी। इतने भारी भरकम रेट को लेकर सरकार व किसानों के बीच विवाद हो गया। विवाद को सुलझाने के लिए तीन मंत्रियों की कमेटी का गठन किया गया, किंतु जब बात नहीं बनी तो एचएसआईआईडीसी (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रीयल इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉर्पोरेशन) तथा डीएमआईसीडीसी (दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रीयल डेडिकेटेड कॉरिडोर कार्पोरेशन) की टेक्नीकल व कंसल्टेंसी टीमों ने जिले में निजामपुर क्षेत्र में इसे लगाने के लिए अपनी मंजूरी दी थी।

प्रोजेक्ट के लिए अब तक हो चुकी करीब 1930 सेल डीड: एसएस लांबा

सीनियर मैनेजर एस्टेट एसएस लांबा ने बताया कि अब तक प्रोजेक्ट के लिए करीब 1930 सेल डीड हो चुकी हैं तथा इसमें बनने वाले 60 मीटर रोड के लिए 720 डीड हो चुकी हैं। यह रोड़ गांव शाहपुर अव्वल, बसीरपुर, मुकंदपुरा व ताजीपुर की जमीन से होते हुए सभी अंदरूनी हिस्सों को मुख्य मार्ग से जोड़ेगा। यह सड़क हब को नेशनल हाईवे-148बी(नारनौल-नांगल चौधरी-कोटपूतली) से मांदी गांव के समीप जोड़ेगी।

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