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श्रमिकों की संख्या एक लाख पार, प्रशासन की साइट पर महज 22600, कच्चे कर्मियों को गिनते तक नहीं

जिले में चल रही बड़ी-छोटी तीन हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों में 1 लाख से ज्यादा कर्मी (श्रमिक) काम कर रहे हैं। लेकिन...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 03:10 AM IST

जिले में चल रही बड़ी-छोटी तीन हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों में 1 लाख से ज्यादा कर्मी (श्रमिक) काम कर रहे हैं। लेकिन सरकार एवं प्रशासन की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जिला प्रशासन की वेबसाइट पर यह संख्या महज 22 हजार 600 दर्शाई गई है। ऐसे में सरकार से इन श्रमिकों के कल्याण की आस करना बेमानी है। सरकार के ही लेबर विभाग की माने तो अकेले बावल औद्योगिक क्षेत्र में करीब एक लाख रेगुलर एवं ठेके पर कर्मी काम कर रहे हैं। वहीं धारूहेड़ा एवं रेवाड़ी को जोड़ दिया जाए तो यहां पर भी करीब 20 हजार श्रमिक विभिन्न कंपनियों में काम कर रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन की वेबसाइट पर 56 बड़ी एवं मध्यम कंपनियों में 16 हजार कर्मियों का आंकड़ा दिखाया गया है। वहीं छोटी 2250 औद्योगिक इकाइयों में इनकी संख्या 6800 बताई गई है।

आजादी के पूर्व में बनाए गए कानून भी श्रमिकों के अधिकारों में बाधक : श्रमिकों की ओर से अधिकारों को लेकर समय-समय पर संघर्ष होते रहे हैं। लेकिन आजादी के पूर्व के कानूनोेंं में बदलाव नहीं होने के चलते आज भी उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। श्रम विभाग के अधिकारियों की माने तो एक्ट 1947 के तहत कंपनियों पर कार्रवाई के अधिकार काफी सीमित हैं। ऐसे में कुछ कंपनी गड़बड़ी के बाद भी बच निकलती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी कंपनियों में शिकायतें बहुत कम आती हैं। ज्यादा परेशानी छोटी कंपनियों में होती है। सहायक लेबर कमिश्नर हवा सिंह ने बताया कि जिले की विभिन्न कंपनियों में एक लाख से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे हैं। इन श्रमिकों की शिकायत आने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। कानून में बदलाव सरकारों का काम है।

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