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5 सीएचसी व 13 पीएचसी में ऑपरेशन से डिलीवरी कराने तक के लिए नहीं डॉक्टर

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा व सेवाएं मुहैया कराने के लिए शुरू की गई नेशनल क्वालिटी...

Danik Bhaskar | May 06, 2018, 03:10 AM IST
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा व सेवाएं मुहैया कराने के लिए शुरू की गई नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस व कायाकल्प योजना में जिला पिछड़ गया है। इसका बड़ा कारण जिले की सामुदायिक व प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्थिति है। ये सभी निर्धारित मानकों पर कहीं खरे नहीं उतर पाए हैं। यहां पर सफाई व्यवस्था से लेकर अन्य अन्य इंतजाम चिंताजनक पाए गए हैं। नागरिक अस्पताल 75 प्रतिशत अंक लेकर बेहतर स्थिति में रहा, लेकिन यहां पर फायर फाइटिंग सिस्टम की एनओसी नहीं होने के चलते पुरस्कृत होने से वंचित रह गया। हालांकि बीते वर्ष नागरिक अस्पताल को प्रदेश भर में बेस्ट ऑपरेशन थियेटर(ओटी) का अवार्ड मिल चुका है।


तकनीकी व सेवाओं की दो श्रेणियों में किया जाता है निरीक्षण

केंद्र सरकार ने शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए कायाकल्प योजना शुरू की थी। इसके तहत प्रदेश में सबसे बेहतर अस्पताल को 50 लाख रुपए देने की योजना है। हर साल एक टीम की ओर से अस्पताल में तकनीकी जैसे क्लीनिकल प्रोटोकॉल, संक्रमण नियंत्रण व आपात सेवा में रिस्पोंस को शामिल किया जाता है। वहीं सेवाओं में अस्पताल कर्मियों का व्यवहार, हाइजीन व स्वच्छता, प्राइवेसी एवं डिगनिटी एवं अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं की डिलीवरी शामिल हैं। ओवरऑल मकसद यहां आने वाले मरीज की संतुष्टि है। इतना ही नहीं अस्पताल में छोटी-छोटी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया जाता है। जैसे की गेट पर मैट, सीढ़ियों पर चढ़ते समय पकड़ने किए साथ में हैंडल के ओपीडी के लिए ऑन लाइन सिस्टम जैसी सुविधाओं काे शामिल किया गया है। इस वर्ष प्रदेश के 71 स्वास्थ्य केंद्रों को एक से दो लाख रुपए तक राशि देकर पुरस्कृत किया गया है। सीएचसी रायपुर रानी को स्वच्छता में 15 लाख रुपए देकर पुरस्कृत किया गया है। प्रदेश सरकार ने 84 अस्पतालों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस दिलवाने का लक्ष्य रखा हुआ है। लेकिन अभी तक कुल 22 अस्पताल ही इस श्रेणी में आ पाए हैं।

सफाईकर्मी तक पूरे नहीं, कैसे मिले स्वच्छता पुरस्कार? : प्रदेश सरकार की ओर से बेहतर उपचार देने का दावा किया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी है कि दावे कहीं नहीं ठहरते हैं। जिले की 5 सीएचसी एवं 13 पीएचसी में ऑपरेशन से डिलीवरी कराने तक के लिए डॉक्टर नहीं है। वहीं सफाई के लिए स्वीपर तक मौजूद नहीं हैं। कई सेंटर तो ऐसे हैं, जहां पर सप्ताह में केवल दो बार ही सफाई की जाती है। ऐसे में यहां पर मरीजों में संक्रमण फैलने का डर बना रहता है। इसी के साथ यहां के भवन तक खंडहर हो चुके हैं। पूर्व सीपीएस बावल सीएचसी में निरीक्षण के दौरान सीएमओ को फटकार लगा चुके हैं।

बीते वर्ष भी पुरस्कार की दौड़ में था अस्पताल

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुदर्शन पंवार के अनुसार नागरिक अस्पताल के प्वाइंट 75 से ज्यादा हैं। बीते वर्ष भी हम पुरस्कार की दौड़ में थे। कुछ एनओसी जैसी समस्याएं हैं, जिसके चलते सर्टिफिकेशन मिलने में देरी हो रही है। उम्मीद है कि जल्द ही सर्टिफिकेशन हो जाएगा।

सुधार के लिए करेंगे प्रयास : सीएमओ

हालात सुधारने के लिए सभी सीएचसी व पीएचसी में काम चल रहा है। अगली बार जिले के कम से कम तीन अस्पतालों को इस श्रेणी में लाने का प्रयास किया जाएगा। जहां पर जो कमी है उसको पूरा किया जा रहा है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। - डाॅ. कृष्ण कुमार, सीएमओ, रेवाड़ी