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20 साल में प्रदूषण स्तर मापने की नहीं लगी मशीन, पीएम-10 100 एमजी के पार / 20 साल में प्रदूषण स्तर मापने की नहीं लगी मशीन, पीएम-10 100 एमजी के पार

Bhaskar News Network

Jun 22, 2018, 03:10 AM IST

Bawal News - धारूहेड़ा-बावल सहित जिले में मल्टी नेशनल से लेकर छोटे-बड़ी करीब 1 हजार फैक्ट्रियां चल रही हैं। लेकिन हालात ऐसे हैं कि...

20 साल में प्रदूषण स्तर मापने की नहीं लगी मशीन, पीएम-10 100 एमजी के पार
धारूहेड़ा-बावल सहित जिले में मल्टी नेशनल से लेकर छोटे-बड़ी करीब 1 हजार फैक्ट्रियां चल रही हैं। लेकिन हालात ऐसे हैं कि इन फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए पॉल्यूशन विभाग के पास ऑटोमेटिक मशीन तक नहीं है। विभाग की ओर से सैंपल लेकर लैब में भेजा जाता है। इसके बाद 5 दिन बाद रिपोर्ट आती है। बीते दिनों शहर की हवा में भी प्रदूषण का लेवल पीए-10 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर को पार कर चुका है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र के हालात किस तरह के होंगे आसानी से समझा जा सकता है।

1995 में बावल में 1220.35 एकड़ क्षेत्र में इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप का पहला फेज विकसित किया गया था। 12 साल बाद 2007 में 1015.07 एकड़ क्षेत्र में दूसरा फेज, 2009 में 451.67 एकड़ में तीसरा, व 2010 में 679.12 एकड़ क्षेत्र में चौथा फेज विकसित किया गया। यहां पर 1207 प्लॉट में से 554 फैक्ट्रियों में उत्पादन हो रहा है। इनमें ऑटो पार्ट्स से लेकर मेडिकल क्षेत्र की कई बड़ी कंपनी भी शामिल हैं। बावजूद इसके यहां पर उड़ती धूल व फैक्ट्रियों से निकलने वाले पॉल्यूशन को मापने का कोई साधन नहीं है।


धारूहेड़ा से लगते भिवाड़ी के हालात हैं बदतर

धारूहेड़ा से लगते राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में पीएम-10 की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है। यहां की हवा में सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में धारूहेड़ा में भी फैक्ट्रियों की संख्या कम नहीं है। वहीं भिवाड़ी की तरफ से आने वाले पॉल्यूशन से भी यहां की हवा खराब रहती है। धारूहेड़ा में ही पॉल्यूशन विभाग का रीजनल ऑफिस है। बावजूद इसके इस दफ्तर का काम महज फैक्ट्रियों को एनओसी देने का रह गया है। क्योंकि विभाग प्रदूषण मापने व कंट्रोल के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है।

अब दो माह में मशीन लगाने का दावा

पॉल्यूशन विभाग के एसडीओ हरीश ने बताया कि जिला में सैंपल लेकर लैब में भेेजे जाते हैं। इसकी रिपोर्ट 5 दिन में आती है। दो महीने के अंदर मशीन लग जाएगी। समय-समय पर रेवाड़ी शहर के साथ बावल व धारूहेड़ा का पॉल्यूशन स्तर मापा जाता है।

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