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विश्व पर्यावरण दिवस आज : मानसून सत्र में होगा साढ़े 5 लाख पौधों का रोपण, 50 हजार बंटेंगे फ्री

हर घर हरियाली योजना के बाद अब पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने व गांवों में हरियाली बढ़ाने के लिए जिलाभर में मानसून...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 05, 2018, 03:20 AM IST

विश्व पर्यावरण दिवस आज : मानसून सत्र में होगा साढ़े 5 लाख पौधों का रोपण, 50 हजार बंटेंगे फ्री
हर घर हरियाली योजना के बाद अब पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने व गांवों में हरियाली बढ़ाने के लिए जिलाभर में मानसून सत्र के दौरान साढ़े 5 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। इनमें 50 हजार पौधे किसानों को फ्री वितरित किए जाएंगे। वन राजिक अधिकारी संदीप यादव के अनुसार इसके अलावा 50 हजार पौधे ग्रामीणों को प्रति पौधा एक रुपए में प्रदान किया जाएगा। मानसूनी सीजन के दौरान पंचायतों के साथ मिलकर विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसमें गांव की पंचायती भूमि से लेकर विभिन्न जगह पौधे लगाए जाएंगे।

वायु प्रदूषण के संरक्षण के लिए सामान्य बातें समझनी जरूरी : एक्सपर्ट की सलाह पर नजर डाले तो लगातार कम होती पेड़-पौधों की संख्या के कारण पर्यावरण का संतुलन भी तेजी से गड़बड़ा रहा है। वायु प्रदूषण के कारण लगातार बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को बरकरार रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाए जाने जरूरी है। साथ ही पौधों की देखभाल सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए हमें कनेर, सफेदा सहित चौड़ी पत्ती वाले अन्य पौधे लगाने चाहिए। चौड़ी पत्ती वाले पौधे वायु प्रदूषण को रोकने में काफी सहायक होते हैं। दूसरे हम सभी को पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, तभी पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

करें यह पहल.. पौधे लगाएं, संरक्षण की उठाएं जिम्मेदारी : पर्यावरण संरक्षण में एक-एक पौधे का महत्व है। क्योंकि एक पौधा हमारे बड़े काम का है। एक पौधा लगाने से 17.50 लाख रुपए की ऑक्सीजन का उत्पादन, 35 लाख रुपए के वायु प्रदूषण पर नियंत्रण, 3 किलो कार्बन डाई ऑक्साइड सोखता है हर साल, 41 लाख रुपए के पानी की रिसाइक्लिंग होती है, तापमान में लगभग 3 फीसदी गिरावट, जमीन के कटाव को रोकने के लिए खर्च किए जाने वाले 18 लाख रुपए बचाएं जा सकते हैं। ऐसे में हमें अपने जीवन में एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल और सुरक्षा की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

प्रदूषण बढ़ने के ये 4 बड़े कारण

घटती हरियाली : शहर व गांवों में आज प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। गांवों में पेड़-पौधों का अवैध कटान भी एक कारण है। अगर पेड़ों का अवैध कटान रुके और ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाकर उनकी देखभाल हो तो इस पर नियंत्रण हो सकता है।

बढ़ते वाहन : शहर के सरकुलर रोड पर वाहनों का सबसे ज्यादा दबाव रहता है। जिससे जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाली धुआं पर्यावरण में घुल जाती हैं और यह भी प्रदूषण बढ़ने का विशेष कारण हैं। वाहनों से हानिकारक गैसें निकलती हैं। इसका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

प्लास्टिक का प्रयोग : प्रदूषण का बढ़ता कारण शहर में प्लास्टिक की थैलियों का हर जगह जमकर इस्तेमाल होना है। शहर के विभिन्न जगहों पर प्लास्टिक की थैलियां जलती रहती हैं, जिनसे जहरीली गैसें भी निकलती रहती हैं।

जनरेटर, एसी, इंडस्ट्री : इन तीनों से भी प्रदूषण बढ़ता है। जनरेटर का भी इस्तेमाल आज ज्यादा होने लगा है। गर्मी के दिनों हर घर में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल होने लगा है। जिले के धारूहेड़ा व बावल औद्योगिक एरिया पड़ता है। इसलिए वहां प्रदूषण का स्तर ज्यादा है।

रेवाड़ी. दिल्ली रोड स्थित नर्सरी में पौध तैयार करते कर्मचारी।

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