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6 हजार बच्चों का जांचेंगे लर्निंग लेवल, गणित और हिंदी के व्यवहारिक ज्ञान के आधार पर होगा एसेस्मेंट टेस्ट

सरकारी स्कूलों के बच्चों का लर्निंग लेवल जांचने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से थर्ड पार्टी एसेस्मेंट टेस्ट लिया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 10, 2018, 04:10 AM IST

सरकारी स्कूलों के बच्चों का लर्निंग लेवल जांचने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से थर्ड पार्टी एसेस्मेंट टेस्ट लिया जाएगा। इसके तहत कक्षा 3, 5 और सातवीं के बच्चों का अगस्त के पहले सप्ताह में होने वाले इस टेस्ट में 4 ब्लॉक में 6 हजार विद्यार्थी इस परीक्षा में बैठेंगे। इसके तहत अगस्त में रेवाड़ी, बावल व नाहड़ ब्लॉक के बच्चे लर्निंग लेवल टेस्ट देंगे। इसके बाद खोल ब्लॉक के बच्चों का यह टेस्ट सितंबर माह में रखा गया है। सक्षम सर्टिफिकेट को लेकर जिला के स्कूलों में एसडीएम व जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य अधिकारियों की ओर से निरीक्षण भी किया जा रहा है। वहां जो न्यूनतम स्तर का लेवल निर्धारित किया गया है, उस स्तर के आधार पर बच्चों से सवाल भी पूछे जा रहे हैं।

पिछले टेस्ट में रह गए थे रेवाड़ी व खोल खंड : सक्षम हरियाणा के तहत पिछले दिनों आए रिजल्ट में रेवाड़ी व खोल खंड पिछड़ गए थे। रेवाड़ी खंड के बच्चे तो तीनों ही कक्षाओं के हिंदी व मैथ्स में 80 फीसदी का आंकड़ा छू नहीं पाए थे। अब जिस कमी से बच्चे पिछड़े थे, उस कमी को दूर किया जा रहा है।

शिक्षा सुधार

80 फीसदी से ज्यादा बच्चे उत्तीर्ण होने पर मिलेगा सक्षम सर्टिफिकेट

स्कूलों में हो रही मॉनीटरिंग

शैक्षणिक दृष्टि से जिला के 4 ब्लॉक को सक्षम बनाने के लिए हर सप्ताह रिपोर्ट भेजी जानी है। इसके तहत बच्चों की मॉनीटरिंग भी की जाएगी। अगस्त माह में रेवाड़ी, बावल व नाहड़ खंड के बच्चों का टेस्ट लिया जाएगा। उस टेस्ट में अगर 80 फीसदी से ज्यादा बच्चे उत्तीर्ण होंगे, तब ही उस खंड को सक्षम का सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

जिस विषय में कमजोर, उसका करेंगे आंकलन : विद्यार्थी जिस विषय में कमजोर हैं, उस विषय की अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर भी बच्चों को सक्षम बनाने की दिशा में काम हो रहा है। अधिकारी निरीक्षण कर स्कूल मुखिया व शिक्षकों को निर्देशित कर रहे हैं। इस टेस्ट में हिंदी भाषा और गणित के व्यवहारिक ज्ञान को भी परखा जाएगा। उसी आधार पर टेस्ट लिए जाएंगे।

बच्चों की कराई जा रही बेहतर तैयारी : बीईओ

स्कूलों में लर्निंग लेवल टेस्ट को लेकर बच्चों की बेहतर तैयारी कराई जा रही है। कक्षा 3, 5 और सातवीं के बच्चों को मैथ्स व हिंदी में व्यवहारिक ज्ञान के साथ ही जो कमजोरी निकल रही है, उसे भी दूर करने की कोशिश की जा रही है। -डॉ. खुशीराम, बीईओ, खंड खोल।

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