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2003 में मंजूर हुआ था मातनहेल सैनिक स्कूल का काम, अब तक पूरा नहीं

पूर्व की इनेलो सरकार में मंजूर हुआ मातनहेल सैनिक स्कूल अब मौजूदा सरकार की पहल के बाद भी बनना शुरू नहीं हो सका।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

पूर्व की इनेलो सरकार में मंजूर हुआ मातनहेल सैनिक स्कूल अब मौजूदा सरकार की पहल के बाद भी बनना शुरू नहीं हो सका। हालांकि ग्रामीण इसके निर्माण के लिए प्रशासन और विधायक से लेकर सीएम तक मिल चुके, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों का भविष्य बनाने वाला यह स्कूल खुलने से पहले ही राजनीति की भेंट चढ़ चुका है। इस कारण 15 साल से इसका निर्माण कार्य अधर में लटका है।

मातनहेल में वर्ष 2003 में एक जलसा हुआ था। इसमें पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला लाव लश्कर के साथ गांव आए थे। उस समय देश के रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज ने पंचायत भूमि पर सैनिक स्कूल की आधारशिला रखी थी। अब 15 साल बाद ग्रामीणों को इस समारोह की यादें ही रह गईं हैं। इसके नामो निशान तक गायब हो गए हैं। पूर्व रक्षा मंत्री ने सैनिक स्कूल का जो शिलान्यास पत्थर लगाया था वह भी गायब हो गया। सेना से सेवानिवृत मातनहेल निवासी 43 वर्षीय गुरदीप सिंह सुहाग ने कहा कि 2009 में देश सेवा करके घर आने के बाद वाे सैनिक स्कूल के लिए जिला प्रशासन से लेकर राज नेताअाें काे सैनिक स्कूल के बारे में कई मांग पत्र दिए हैं। यही नहीं, पिछले 14 साल से गांव के लोग कांग्रेस सरकार से सैनिक स्कूल खुलवाने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन कोई फायदा नहीं है। गुरुदीप ने कहा कि कांग्रेस के सीएम और सांसद ने इसके लिए कभी मना नहीं किया तो सैनिक स्कूल खुले, इसके लिए कोई ठोस कदम भी नहीं उठाए गए।

निर्माण के लिए प्रशासन और विधायक से लेकर सीएम तक मिल चुके ग्रामीण

झज्जर. दीपेंद्र हुड्डा को सैिनक स्कूल से संबंिधत ज्ञापन देता हुए पूर्व सैिनक गुरुदीप िसंह (फाइल फोटो)

हर वर्ग को मिलेगा लाभ

पूर्व सरपंच नरेन्द्र कुमार मातनहेल ने कहा कि मातनहेल में सैनिक खुलेगा तो इसका लाभ हर वर्ग को मिलेगा। झज्जर जिले का नाम प्रदेश भर में होगा। सैनिकों की नर्सरी समझे जाने वाले झज्जर जिले का ओहदा और बढ़ेगा। इस स्कूल को खोलने के लिए ग्रामीणों का संघर्ष जारी रहेगा।

पंचायत ने दी थी 274

एकड़ जमीन

वर्ष 2003 में जब भाजपा गठबंधन की सरकार थी तब मातनहेल की पंचायत ने सैनिक स्कूल के लिए उस समय केंद्र सरकार को 314 एकड़ जमीन दी थी। पंचायत के अनुसार यह जमीन अब भी सैनिक स्कूल के नाम है। इसमें मातनहेल पंचायत की 274 और रुडियावास गांव की 40 एकड़ पंचायत भूमि है।

भाजपा सरकार में भी सुनवाई नहीं

मातनहेल में सैनिक स्कूल खुले, इसमें सैनिक परिवारों के अलावा अन्य परिवारों के भी बच्चे पढ़ें। ये उम्मीद वर्ष 2003 में भाजपा की एनडीए सरकार के दौरान जगी थी। स्कूल निर्माण के लिए शिलान्यास भी हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि जब भाजपा सरकार गई तो ये उम्मीद भी टूट गई, लेकिन अब केंद्र में भाजपा सरकार मजबूती से आई है तो सैनिक स्कूल के निर्माण की उम्मीद फिर से जगी है।

पूर्व सेना प्रमुख के पूर्वजों का गांव है मातनहेल

ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में सैनिक स्कूल बनाए जाने की आस इसलिए भी है कि क्योंकि उनके गांव का लाडला व देश के पूर्व सेना अध्यक्ष रहे दलबीर सिंह सुहाग की जड़ें इसी गांव से जुड़ी हैं। पूर्व सेना प्रमुख के पूर्वज मातनहेल के ही हैं जो बाद में बेरी के गांव बिसहान चले गए थे।

सैनिक स्कूल के लिए पंचायत ने कई एकड़ जमीन रक्षा मंत्रालय को दे रखी है। सैनिक स्कूल जरूर मातनहेल में खुलना चाहिए इसके लिए सांसद दीपेंद्र हुड्‌डा ने भी प्रयास किया है। अब भाजपा की सरकार है तो उम्मीद नहीं है कि ये सरकार मातनहेल में सैनिक स्कूल खोलेगी। भाजपा सरकार भेदभाव से काम कर रही है। कांग्रेस कार्यकाल में मंजूर हुए कई प्रोजेक्ट इस सरकार ने रद्द कर दिए, तो लगता नहीं कि सैना की नर्सरी कहे जाने वाला सैनिक स्कूल झज्जर में खुल पाएगा। गीता भुक्कल, कांग्रेस विधायक

इन मंत्रियों और सांसद

को दिया मांग पत्र

सैनिक स्कूल खुलने के लिए केंद्रीय मंत्री भारत सरकार बिरेन्द्र सिंह, हरियाणा सरकार पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़,हरियाणा विधानसभा के विपक्ष नेता अभय चौटाला, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, सांसद दुष्यंत चौटाला, विधायक गीता भुक्कल, पूर्व सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग और जिला प्रशासन को भी मांग पत्र दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं है।

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