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किसानों ने नई फसल मां के चरणों में रखकर मन्नतें मांगी

बेरी मेले में चौदस का मेला शुक्रवार काे भरा। किसानों ने अपनी नई फसल और इससे बने पकवान मां बेरी वाली के चरणों में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 31, 2018, 02:00 AM IST

बेरी मेले में चौदस का मेला शुक्रवार काे भरा। किसानों ने अपनी नई फसल और इससे बने पकवान मां बेरी वाली के चरणों में रखकर आगामी फसल की बेहतरी के लिए मन्नत मांगी। इस तरह सदियों ये चली आ रही इस परंपरा में मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में पहले नवरात्र से चौदस तक दाे लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाया है।

चौदस के दिन बेरी व आस पास के सैकंडों गांव केे किसान परिवार अपनी पुरानी फसल गेहूं का भोग लगाकर नई फसल गेहूं की ठीक ठाक पैदावार होने की कामना करते हैैं। वही मां के दरबार में नवविवाहित जोड़े ने माथा टेका ओर श्रद्धालुओं ने बच्चों के बाल उतरवाएं। श्रद्धालु मनीष नंबरदार ने बताया कि यह मान्यता महाभारत काल से चली आ रही है। मां के दरबार में हर कोई अपनी हाजरी लगाना चाहता हैं। जो श्रद्धालु खेती बाड़ी का काम नहीं करते वह मां के दरबार में अपनी भैंस व गो के दूध की खीर लेकर मां के दरबार में भोग लगाने के लिए आते हैं। यह सिलसिला अगले रोज पूर्णमासी तक चलता है। श्रद्धालु कमलेश कादयान का कहना था कि हम जमीदार परिवार से है। ज्यादातर हम लोग खेतों में काम करते है, लेकिन छ माह में आज के दिन मां अन्नपूर्णा का भोग लगाकर अपनी अच्छी फसल की कामना करते हैं। आज के ही दिन घर में कंजक को खाना खिलाया जाता है। थाना प्रभारी तेलू राम ने बताया कि आज चौदस मेले में हजारों श्रद्धालु मां के दरबार मे माथा टेकते है। पुलिस की ओर से पुरी व्यवस्था की गई है।

बेरी. चौदस मेले में अपनी फसल का भोग लगाते श्रद्धालु।

भास्कर न्यूज | बेरी

बेरी मेले में चौदस का मेला शुक्रवार काे भरा। किसानों ने अपनी नई फसल और इससे बने पकवान मां बेरी वाली के चरणों में रखकर आगामी फसल की बेहतरी के लिए मन्नत मांगी। इस तरह सदियों ये चली आ रही इस परंपरा में मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में पहले नवरात्र से चौदस तक दाे लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाया है।

चौदस के दिन बेरी व आस पास के सैकंडों गांव केे किसान परिवार अपनी पुरानी फसल गेहूं का भोग लगाकर नई फसल गेहूं की ठीक ठाक पैदावार होने की कामना करते हैैं। वही मां के दरबार में नवविवाहित जोड़े ने माथा टेका ओर श्रद्धालुओं ने बच्चों के बाल उतरवाएं। श्रद्धालु मनीष नंबरदार ने बताया कि यह मान्यता महाभारत काल से चली आ रही है। मां के दरबार में हर कोई अपनी हाजरी लगाना चाहता हैं। जो श्रद्धालु खेती बाड़ी का काम नहीं करते वह मां के दरबार में अपनी भैंस व गो के दूध की खीर लेकर मां के दरबार में भोग लगाने के लिए आते हैं। यह सिलसिला अगले रोज पूर्णमासी तक चलता है। श्रद्धालु कमलेश कादयान का कहना था कि हम जमीदार परिवार से है। ज्यादातर हम लोग खेतों में काम करते है, लेकिन छ माह में आज के दिन मां अन्नपूर्णा का भोग लगाकर अपनी अच्छी फसल की कामना करते हैं। आज के ही दिन घर में कंजक को खाना खिलाया जाता है। थाना प्रभारी तेलू राम ने बताया कि आज चौदस मेले में हजारों श्रद्धालु मां के दरबार मे माथा टेकते है। पुलिस की ओर से पुरी व्यवस्था की गई है।

बेरी. मेले में माता के दर्शन के िलए लाइनों में लगे भक्तगण।

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