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बेरी में ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान झज्जर मंडी में 50 हजार क्विंटल गेहूं भीगा

बेरी के दूबलधन माजरा क्षेत्र में ओले गिरने से फसल गिर गई। कृषि विभाग के मुताबिक क्षेत्र में औसतन 5 एमएम बारिश हुई।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 10, 2018, 02:00 AM IST

बेरी में ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान झज्जर मंडी में 50 हजार क्विंटल गेहूं भीगा
बेरी के दूबलधन माजरा क्षेत्र में ओले गिरने से फसल गिर गई। कृषि विभाग के मुताबिक क्षेत्र में औसतन 5 एमएम बारिश हुई। आने वाले तीन दिन बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है। सोमवार को सुबह साढ़े पांच बजे बारिश शुरू हुई। इस बीच कई जगह बूंदाबांदी तो कुछ जगह तेज बारिश रही। बेरी में गरज के साथ ओले गिरे। जिसके कारण किसानों की चिंता बढ़ गई। शहर के पुराना बस स्टैंड रोड, सब्जी मंडी, अनाज मंडी व सिविल अस्पताल परिसर में पानी भर गया। लेकिन बारिश रुकने के साथ ही पानी को निकाल दिया गया। कुछ जगह यह स्थिति नाली जाम होने के कारण बनी। बारिश के कारण सबसे अधिक मंडी प्रभावित हुई। जहां पर गेहूं पानी में भीग गया। आढ़ती इसको निकलवाने की जुगत करते रहे। दिनभर गेहूं के बचाने के लिए प्रयास चले। कट्टों को उठाकर एक ओर लगाया गया। ताकि आगे बारिश आने पर ये खराब न हो।

तीन दिन प्रभावित रहेगी कटाई

बारिश के कारण गेहूं की फसल भीग गई है। इसके कारण कटाई का काम प्रभावित रहा। कृषि विभाग का कहना है कि यदि धूप निकलती है, तो भी आने वाले तीन दिनों तक कटाई संभावना नहीं है। बेरी क्षेत्र में सुबह 6 बजे एकाएक झमाझम बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी से तो राहत मिली। लेकिन किसानों की पूरे साल भर की फसल चौपट हो गई वही बेरी के छाजान पाना में कई कई फीट पानी भर गया।

बूंदाबांदी से पारा लुढ़का, अगले तीन दिन बूंदाबांदी की उम्मीद

बेरी. बारिश के बाद खेतों में किसानों के साथ फसल का जायजा लेते बेरी विधायक डाॅ. रघुबीर कादयान।

झज्जर . सुबह के समय हुई बारसात के कारण सब्जी मंडी में भरे बरसात के पानी से सब्जी लेकर कर जाते हुए लोग।

माता भीमेश्वरी देवी मंदिर वाली गली में भरा पानी :बेरी में 40 लाख की लागत से नगरपालिका ने नाले बनाए गए थे और बेरी की जल निकासी के लिए लाखों की लागत से बूस्टर दो साल पहले बनाया गया था। दो साल से बूस्टर नगरपालिका द्वारा नाले बनाने का इंतजार कर रहा था। अब नगरपालिका ने नाले बना दिए तो भी छाजान पाने में पानी भर गया अब बारिश हुई तो समूची व्यवस्था फेल साबित हुई। नाले पानी ओवरफ्लो कर रहे थे। विश्व प्रसिद्ध माता भीमेश्वरी देवी मंदिर वाली गली में भी कई कई फीट पानी भर गया था।

40 लाख के नाले बनवाए

नगरपालिका एमई मनदीप धनखड़ का कहना था कि बरसाती पानी की निकासी के लिए 40 लाख की लागत से नाले बनाए थे लेकिन सुबह बरसात हुई तो जनस्वास्थ्य विभाग ने बूस्टर नहीं चलाया। पब्लिक हेल्थ के एसडीओ प्रेम सिंह का कहना था कि नगरपालिका ने नाले की दीवार को ओपन छोड़ दिया। जिसके कारण बूस्टर के अंदर पानी भर गया था पब्लिक हेल्थ की टीम ने अपने रिस्क पर पानी के अंदर घुसकर मशीन को चालू किया। जिस समय पानी भरा उस समय लाइट का कट था उसके बाद पानी की निकासी हुई।

बेरी में िगरे ओले।

सूखा गेहूं ही

कट्‌टों में भरे

झज्जर | मंडी में बारिश से बचाव के पूरे इंतजाम न होने के कारण 50 हजार क्विंटल गेहूं भीग गया। कई जगह तो गेहूं पानी के बहाव में बह गया, जबकि कुछ दूसरी जगह पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण गेहूं के कट्टों के नीचे पानी पहुंच गया। इस बीच मार्केट कमेटी की ओर से आढ़तियों को निर्देश दिए गए हैं कि आढ़ती जो भी गेहूं कट्टों में भरे, वह सूखा हो, उसमें किसी प्रकार की गंदगी न हो। यदि खराब गेहूं कट्टों में मिला तो इसके लिए आढ़तियों को दोषी समझा जाएगा और उस पर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मार्केट कमेटी के इन आदेशों से आढ़ती नाराज है। इनका कहना है कि मंडी छोटी है और इसमें ढेरियों के अंदर गेहूं को रखने और उसके बाद उसको तोलने की व्यवस्था संभव नहीं है।

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