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पाकिस्तान की मंडियों तक जाती है यहां की गाजर, किसान हो रहे मालामाल

व्यापारियों की माने तो चांग क्षेत्र की गाजर दिल्ली मंडी से होते हुए नेपाल, बांग्लादेश व पाकिस्तान तक जाती हैं।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 07:33 AM IST

चांग. भिवानी जिले के चांग इलाके की गाजर हरियाणा के अलावा मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों के पांच सितारा होटलों की शान बढ़ाती हैं। वहीं किसानों व व्यापारियों की माने तो चांग क्षेत्र की गाजर दिल्ली मंडी से होते हुए नेपाल, बांग्लादेश व पाकिस्तान तक जाती हैं। व्यापारियों का कहना है कि चांग की गाजरों का रंग, साइज व क्वालिटी काफी अच्छी मानी जाती है।


पहले तो सिर्फ चांग में ही गाजर बोई जाती थी, लेकिन फायदे का सौदा देख पिछले कुछ सालों से तो क्षेत्र के गांव बडेसरा, मित्ताथल, गुजरानी, रिवाड़ी खेड़ा, ढाणी हरसुख, खरक, बामला आदि गांवों में हर साल हजारों एकड़ में गाजर का उत्पादन किया जाता है। यहां के किसान गाजर को लाल सोना भी कहते हैं। अबकी बार गाजर का भाव भी अच्छा मिल रहा है। किसान नरेश मेहता, मेसर सैनी, रामनिवास, पहाड़ी, काला, देवेंद्र आदि ने बताया कि गाजर का भाव 30 से 35 रुपए मिलना शुरू हुआ था, अब भाव 22 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। एक एकड़ में सवा सौ से डेढ़ सौ क्विंटल का उत्पादन हो रहा है। दो से ढाई लाख रुपए की बचत हो रही है। पछेती बिजाई की भाव दस से बारह रुपए भी मिल गया तो भी किसान को डेढ़ से दो लाख की बचत होगी।

अगेती गाजरों में मजदूरी कम

किसान नरेश ने बताया कि उसने दस एकड़ में 20 अगस्त को अगेती गाजर की बिजाई की थी। लगभग साढे तीन महीने में उसकी गाजर तैयार हो गई। गाजर के पत्तों (गजरा) को पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में प्रयोग होता है। मजदूर इसे फ्री में काटकर ले जाते हैं।

बीमारी भी लगती है कम

किसानों का कहना है कि अन्य फसलों की तुलना में गाजर पर पाले, बेमौसमी बरसात व अन्य बीमारियों का दूसरी फसलों की तुलना में बहुत ही कम असर होता है जिस कारण किसानों को ज्यादा कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव की जरूरत नहीं होती। इससे लाभ बहुत अधिक मिलता है।

मशीनों से खुदाई-धुलाई

क्षेत्र के किसान पूरी तरह से गाजर की बिजाई से लेकर खुदाई व धुलाई आधुनिक मशीनों से कर रहे हैं। गाजर से होने वाला फायदा किसानों के जीवन स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। गाजरों के फायदे के कारण ही यहां के किसानों के पास आधुनिक कृषि यंत्र हैं।