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अब पाठ्यक्रम में शामिल होंगे नशे के दुष्प्रभाव और बचने के तरीके

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं परिषद (एससीईआरटी) स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली नैतिक शिक्षा की किताबों के पाठ्यक्रम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:05 AM IST

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं परिषद (एससीईआरटी) स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली नैतिक शिक्षा की किताबों के पाठ्यक्रम में नशा के शरीर पर दुष्प्रभाव व इससे बचाव के तरीके शामिल करेगी।

यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से 8वीं से 10वीं तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने के लिए यह योजना बनाई गई है। एससीईअारटी ने सर्वे रिपोर्ट में माना है कि नशे में पड़ने की ज्यादा आशंकाएं 8वीं से 12वीं तक की कक्षाओं के बीच में ही ज्यादा होती है। इस अवस्था में स्कूली बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए शिक्षा निदेशालय ने यह पहल की है।

छात्रों से लिया था फीडबैक

एससीईआरटी ने विद्यार्थियों से तनाव, नशीले पदार्थ और यौन शोषण की स्थिति जानने के लिए सर्वे कराया था। इसमें कक्षा 9 से 12 तक के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी शामिल किए गए थे। सर्वे रिपोर्ट में 12.84 प्रतिशत विद्यार्थियों ने माना था कि नशीले पदार्थ दोस्तों के द्वारा ऑफर किए जाते हैं। 7.50 प्रतिशत ने माना कि उन्होंने खुद ही नशा करना शुरू किया था। 52 प्रतिशत के फीडबैक के अनुसार पता चला कि घर में कोई न कोई नशे का सेवन करता है। उन्हें देखकर नशा करना शुरू किया। शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर एससीईआरटी ने संबंधित विषयों को पाठ्यक्रम में जोड़ने की तैयारियां शुरू कर दी है। पांच सदस्यीय टीम गठित करके सिलेबस तैयारी की जिम्मेदारी दी है।

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