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अस्थमा में सावधानियां अपनाकर ही पा सकते हैं कंट्रोल

अस्थमा को आम बोलचाल की भाषा में दमा के नाम से भी जानते हैं। अस्थमा श्वसन और फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 02:00 AM IST
अस्थमा को आम बोलचाल की भाषा में दमा के नाम से भी जानते हैं। अस्थमा श्वसन और फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है। श्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर-बाहर करती हैं। अस्थमा होने के कारण इन नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन और संकुचन पैदा हो जाता है जिससे फेफड़ों में वायु का प्रवाह सही ढंग से नहीं हो पाता हैं।

इसकी वजह से रोगी व्यक्ति को सांस लेने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। इससे रोगी व्यक्ति के शरीर को आवश्यक ऑक्सीजन नहीं मिल पाता हैं, कई विषम परिस्थितियों में रोगी की मौत तक हो जाती है। इस बीमारी पर कुछ सावधानियां के प्रयोग से इस पर कंट्रोल किया जा सकता है। शहर की बात करें तो बढ़ते प्रदूषण, एलर्जी, खराब जीवन शैली व कुछ अन्य कारणों के चलते तेजी से लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं।

चिकित्सकों के अनुसार अस्थमा का कारण वातावरण में प्रदूषण और धूल के गुब्बार के बीच लगातार रहने से लोगों को एलर्जी होती है। जोकि आगे बढ़कर अस्थमा में तब्दील हो जाता है। शहर में बढ़ते प्रदूषण के चलते ही अस्थमा के रोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। प्रदूषण के कारण बड़ी संख्या में लोग श्वसन संबंधी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। एलर्जी का समय पर उपचार न होने पर सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बनती है।

जागरूकता

दिन भर धूल उड़ने से लोगों को सांस लेने में आ रही दिक्कत, अस्पतालों में हर रोज दमा व गले से संबंधित बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं

ये हो सकते हैं कारण






दमा होने के लक्षण






रोग से जुड़ी सावधानियां





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