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शहीदों के परिवारों ने 1858 में नीलाम हुई जमीन वापस लेने को प्रदर्शन किया

Bhiwani News - रोहनात के शहीद परिवारों ने 1858 में नीलाम हुई जमीन को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी कर प्रशासन...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 02:00 AM IST
शहीदों के परिवारों ने 1858 में नीलाम हुई जमीन वापस लेने को प्रदर्शन किया
रोहनात के शहीद परिवारों ने 1858 में नीलाम हुई जमीन को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी कर प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व सीटू प्रधान कामरेड ओमप्रकाश ने किया।

शहीद कमेटी अध्यक्ष वेद प्रकाश, संतलाल, ओम प्रकाश, राजेंद्र ने आदि ने रोहनात के ग्रामीणों ने प्रशासन से नीलाम हुई जमीन का मुआवजा देने की मांग कि गई ताकि शहीद परिवारों के उत्तराधिकारियों को न्याय मिल सके। इस अवसर पर वेद प्रकाश, संतलाल, राजेंद्र, प्रेम, सतबीर, रोशनी, दयावंती, संतरो, लखपति, सोनू, जोगीराम आदि उपस्थित थे। प्रदर्शन करने वालों ने बताया कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता में रोहनात गांव के लोगों के भाग लेने पर अंग्रेजों ने नागरिकों को तोपों से उड़ा दिया व कई लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। अंग्रेजों ने रोहनात गांव की जमीन को नीलाम कर दिया। इस गांव के कई लोग मानहेरू, अजीतपुरा आदि गांवों में रहने लगे। आजादी मिलने के बाद भी तत्कालीन पंजाब सरकार ने 1957 में रोहनात गांव को शहीद गांव घोषित किया था। पंजाब सरकार ने 1966 में 57 प्लाट 52 परिवारों के उत्तराधिकारियों के नाम अलाट कर दिए थे परन्तु कब्जा नहीं दिया गया। इसके बाद हरियाणा राज्य अलग बनने के बाद तत्कालीन हरियाणा सरकार ने 1970 में अंग्रेजों ने जब्त की गई जमीन का मुआवजा देने के लिए सवा लाख बतौर टोकन राशि 25 स्वतंता सैनानियों को 5,000 प्रति परिवार वितरित की गई। उसके बाद किसी भी सरकार ने इस गांव की सुध नहीं ली।

भिवानी | सीटू व सर्व कर्मचारी संघ ने संयुक्त रूप से नेहरू पार्क में मजदूर दिवस मनाया। सभा को संबोधित करते हुए कामरेड ओमप्रकाश, सीटू जिला कोषाध्यक्ष राममेहर सिंह, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान यादविरेंद्र शर्मा ने कहा कि 26 साल से लागू उदारीकरण, निजीकरण की नीतिओ ने मजदूर कर्मचारी व मेहनकश जनता पर भारी बोझ डाल दिया है। आम जनता का पुंजिपतियो द्वारा भरपूर शोषण किया जा रहा है इसके बाद उन्होंने शहर में विरोध प्रदर्शन किया।

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