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अधर्म वंश काे जानना भी जरूरी: श्यामानंद

नव संवत् की पावन आगमन बेला पर गीता मनीषी महामण्डेलश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज की कृपा से श्री कृष्ण कृपा सेवा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 13, 2018, 02:15 AM IST

नव संवत् की पावन आगमन बेला पर गीता मनीषी महामण्डेलश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज की कृपा से श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से कस्बा के खेड़ा मंदिर में श्री मद्भागवन सप्ताह शक्ति ज्ञान एवं भजन संध्या आरंभ की गई। इससे पूर्व कस्बा में भव्य क्लश यात्रा निकाली गई। मुख्य यजमान अशोक केसरी सिर पर श्री मद्भागवत उठाए चल रहे थे।

कथा वाचक रसिक शिरोमणि ब्रज रज रसका स्वामी श्यामानंद महाराज ने पहले दिन कथा में करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत में धर्म का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है, लेकिन अज्ञानतावश हम इसे समझ नहीं पाते। संसार की हर वस्तु के दो पहलू होते हैं। हम एक पहलू को तो स्वीकार कर लेते है लेकिन दूसरे को छोड़ देते हैं। इसलिए दुख पाते हैं। जैसे सुख और दुख, पुण्य और पाप, दिन व रात, ऊंच व नीच इन सब में से हम केवल एक को ही पकड़ कर रखते हैं। भागवत के अनुसार अगर हम दोनों पहलूओं को समझ ले हमें जीवन में कभी दुख नहीं आएगा। धर्म से पहले अधर्म वंश का जानना जरूरी है। भक्ति ही भक्त को संसार रूपी भव सागर से पार लगा सकता है। मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए लालच वंश कुसंगतियों का शिकार हो रहा है। मानव केवल भक्ति के माध्यम से मुक्ति पा सकता है। श्री मदभागवत पुराण कथा कलयुग के समस्त पापों को जलाने के लिए अग्नि के समान है। भगवान का आश्रय लेने पर मनुष्य की बुद्धि संसार के बंधनों में नहीं फंसती है। किसी प्रकार का मद नहीं आता है।

कथा व्यास ने संगीतमय ढंग से भजन प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को धार्मिक बना दिया। आयोजन में सतीश चुघ, रमेश मेहंंदीरता, रवि भूषण, ललित गांधी, सुभाष गौड़, हरीश मेहंदीरता, अशोक झाम, मुकेश बंसल, राजीव कुमार, राजेश गर्ग, प्रदीप वर्मा समेत अनेक श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

बिलासपुर | श्रीमद् भागवत कथा से पूर्व निकाली गई कलश यात्रा में कलश लेकर निकली महिलाएं।

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