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भक्ति मुक्ति का माध्यम, संसार रूपी भव सागर से पार लगा सकती है : श्यामानंद

भक्ति ही मानव को संसार रूपी भव सागर से पार लगा सकती है। भक्ति ही मुक्ति का माध्यम है। मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 02:20 AM IST

भक्ति ही मानव को संसार रूपी भव सागर से पार लगा सकती है। भक्ति ही मुक्ति का माध्यम है। मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए लालच वश कुसंगतियों का शिकार हो रहा है। मानव अपने आत्मिक ज्ञान के माध्यम से जीवन की नैया को पार लगा सकता है। उक्त विचार कथावाचक श्यामानंद जी महाराज ने श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के सहयोग से खेड़ा मंदिर परिसर में चल रही कथा के दौरान मंगलवार को व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संत का कार्य केवल हरि भजन करना है। कथा व्यास ने श्री शुकदेव जी की जन्म कथा व नारद की पूर्व जन्म कथा का विस्तार से प्रसंग सुनाया। कथा में दीपक अरोड़ा व ब्राह्मण संस्था के सदस्य मुख्य यजमान रहे। आयोजन में महिंद्र गांधी, सतीश चुघ, रमेश मेहंदीरत्ता, गुलशन गांधी, अशोक झाम, राजू वर्मा, सुमित शर्मा, हरीश मेहंदीरत्ता, रमेश गुर्जर, राजेंद्र अग्रवाल समेत खेड़ा मंदिर समिति सदस्यों ने सहयोग किया।

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