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गिरता भूजल स्तर भावी पीढ़ी के लिए खतरे की घंटी किसान काबू पा सकते हैं स्थिति पर : डाॅ. रमेश

लगातार गिरता भूजल स्तर आने वाली पीढ़ी के लिए खतरे की घंटी है। इसे किसान अपनी सूझबुझ से और गिरने से बचा सकते हैं। साथ...

Danik Bhaskar | Mar 17, 2018, 03:15 AM IST
लगातार गिरता भूजल स्तर आने वाली पीढ़ी के लिए खतरे की घंटी है। इसे किसान अपनी सूझबुझ से और गिरने से बचा सकते हैं। साथ ही फसली चक्र अपना कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। फसल अवशेष जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति लगातार घटती जा रही है। जिसे पूरा करने के लिए किसानों को रसायन का अधिक प्रयोग करना पड़ रहा है। उक्त विचार हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. रमेश यादव ने मुसिंबल गांव में आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। यह कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से मुसिंबल गांव स्थित मावी पैलेस में आयोजित किया गया। मौके पर बड़ी संख्या में जिले के किसान उपस्थित रहे। मुख्यातिथि डॉ. यादव ने कहा कि जिले का खंड रादौर सबसे अधिक धान उत्पादक क्षेत्र है। भूजल संसाधनो का अत्याधिक दोहन हाने के कारण यह खंड डार्क जोन में आ गया है। जो कि खतरे की घंटी है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि फसल-चक्र में ऐसी फसलों को अपनाए जो कम पानी में ज्यादा मुनाफा दें।

किसान फसल चक्र में दलहन व तिलहन भी उगाएं: डॉ. सुरेंद्र

चेयरमैन ने कहा कि 50 किसान कलस्टर बनाकर सरकार की योजना का लाभ ले सकते हैं। ये किसान जैविक खेती अपना कर कलस्टर में शामिल प्रत्येक किसान को 20 हजार रुपए का लाभ दिला सकते हैं। कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र यादव ने कहा कि किसान फसल चक्र में दलहन व तिलहन फसलों को भी उगाए। भूमि की उर्वरा शक्ति बढाने के लिए रासायनिक खादों के साथ-साथ हरी खाद, केंचूआ खाद, जैव उर्वरक, मुर्गी की खाद व अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र दामला के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. टाया ने किसानों को गेहूं में मंडूसी व अन्य खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवारनाशकों को बदल-बदल कर प्रयोग करने की सलाह दी। नाबार्ड के जिला प्रबंधक राजेश सैनी ने बैंकों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। पशु पालन विभाग के डॉ. सतबीर सिंह एवं मछली पानी विभाग के डॉ. प्रदीप बख्शी ने भी अपने विभाग की जानकारियां दी।