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कुछ विद्वानों ने लोहगढ़ को मुकलिसगढ़ बताया गया है, लेकिन

कुछ विद्वानों ने लोहगढ़ को मुकलिसगढ़ बताया गया है, लेकिन नए शोध के अनुसार यह गलत है। मुकलिसगढ़ जिस जगह को बताया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 04, 2018, 02:15 AM IST

कुछ विद्वानों ने लोहगढ़ को मुकलिसगढ़ बताया गया है, लेकिन नए शोध के अनुसार यह गलत है। मुकलिसगढ़ जिस जगह को बताया जाता है, वह जगह हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित हथनीकुंड बैराज के साथ लगते गांव फैजाबाद में है। शोध में सामने आया कि गुरु हरगोविंद साहिब की ग्वालियर के किले से रिहाई के बाद 1626 में बिलासपुर, नाहन हिंदुवार का राजा गुरु साहिब से मिलने के लिए अमृतसर गए थे और वहीं से इस किले के निर्माण की इन चार व्यक्तियों द्वारा रुप रेखा बनाई गई। मौजूदा लोहगढ़, नाहन के राजा के क्षेत्र में बनाया गया। गुरु हरराय साहब (1645-1666) 17 साल की गुरु गद्दी के कार्यकाल में से 13 साल लोहगढ़ यमुनानगर में रहे। उनके दोनों पुत्र रामराय गुरु हरकृष्ण साहब बेटी स्वरूप कौर भी यहीं लोहगढ़ किले में पैदा हुए। गुरु तेग बहादुर साहब भी 1644 से लेकर 1656 तक यहां पर मौजूद रहे और उनके साथी भाई लक्की राय बंजारा, भाई मक्खन शाह लबाना ने किला लोहगढ़ के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई। इसके बाद गुरु गोबिंद सिंह ने लोहगढ़ किले से लगभग 10 किलोमीटर दूर पौंटा साहिब में 4 साल गुजरे और लोहगढ़ में स्थित सिख फौज को मुख्य ट्रेनिंग दी।

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