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इन मुस्लिम लड़कियों को कंठस्थ हैं गीता के श्लोक

इन बेटियों का जन्म भले ही मुस्लिम परिवार में हुआ है, लेकिन इनका ज्ञान अब इनकी पहचान बन चुका है। ये बेटियां आज धर्म व...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 02:15 AM IST

इन मुस्लिम लड़कियों को कंठस्थ हैं गीता के श्लोक
इन बेटियों का जन्म भले ही मुस्लिम परिवार में हुआ है, लेकिन इनका ज्ञान अब इनकी पहचान बन चुका है। ये बेटियां आज धर्म व भाषा से परे समाज में धर्म, भाषा व शास्त्र ज्ञान के नाम पर जहर घोलने वालों को आइना दिखा रहीं हैं। रविवार को कपालमोचन में हुए संस्कृत भाषा सम्मेलन में इन छह बेटियों ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। गीता के श्लोक पढ़े। इन्हें गीता के संस्कृत में श्लोक तो कंठस्थ हैं ही इनका अर्थ भी समझाती हैं। इन छह बेटियों में तीन सगी बहनें हैं। अक्सर मुस्लिम समुदाय द्वारा सरस्वती वंदना, राष्ट्रज्ञान या गीता पढ़ने को विवाद का कारण बना दिया जाता है। रविवार को कपालमोचन में संस्कृत सम्मेलन में राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयधर की इन मुस्लिम समुदाय की छात्राओं ने मन की वीणा से गुंजित ध्वनि मंगलम, स्वागतम, स्वागतम गीत संस्कृत भाषा में मुख्यअतिथि के स्वागत के लिए गाया। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों के सामने लड़कियों के नाम मुस्कान खातून, साहिबा खातून, साहिजा खातून, शमां परवीन, साहिबा मलिक व सानिया बताए गए तो तो हर कोई हैरान था।

इन छात्राओं को संस्कृत के अलावा पंजाबी, अरबी व उर्दू का भी पूरा ज्ञान है। इनमें मुस्कान, साहिबा व साहिजा सगी बहनें हैं। उनका कहना है कि संस्कृत पढ़ने को लेकर कभी भी परिजनों ने कोई विरोध नहीं किया। शिक्षक अनिल शास्त्री व प्रिंसिपल अश्विनी धीमान के सानिध्य में उन्होंने संस्कृत व पंजाबी सीखी, तो परिजनों से उर्दू का ज्ञान मिला। भाषा पर पकड़ के अलावा इन तीनों बहनों को गीता के श्लोक कंठस्थ है। तीनों गीता के किसी भी अध्याय का अर्थ या प्रसंग सुनाती हैं। संस्कृत बोलने वाली इन छात्राओं का कहना है कि उन्हें संस्कृत में रूचि उस समय हुई जब वे सातवीं कक्षा में थीं। इसके बाद उन्होंने संस्कृत को पढ़ना शुरू कर दिया और इसमें पूरी तरह से पारंगत हैं।

जयधर सरकारी स्कूल की इन छात्राओं में 3 सगी बहनें, संस्कृत-पंजाबी पढ़ने पर परिजनों ने भी प्रोत्साहित किया

बिलासपुर | राजकीय सीसे स्कूल जयधर की संस्कृत श्लोकाच्चारण करने वाली मुस्लिम छात्राओं को सम्मानित करते हुए मुख्यातिथि।

चार राज्यों से आए विद्वान

सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व यूपी के संस्कृत विदों ने भाग लिया। मौके पर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र के प्राच्य विद्या संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर राजेश्वर मिश्र, हरियाणा संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉक्टर सोमेश्वर दत्त, हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष रामप्रसाद कौशिक, प्राचार्य डॉक्टर अरूणेश्वर झा, बीईओ धर्म सिंह राठी, डॉक्टर ललित गौड़, सुरेंद्र मोहन मिश्र, डॉक्टर भारतेंदु पांडे, वीरेंद्र कुमार शर्मा, पांडूलिपि संरक्षक डॉक्टर शिवानी आत्रेय शर्मा, राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर कुंवर पाल शास्त्री, छोटा राम शास्त्री, पवन भारद्वाज, परमेश्वर नाथ शास्त्री, पुष्पेंद्र शास्त्री, अनिल शास्त्री, सोहन लाल, भूषण शास्त्री, श्रीकांत भारद्वाज उपस्थित रहे।

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