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लोहगढ़ में मंच से उठी आवाज, हरियाणा के सिखों को भी एक झंडे के नीचे आकर मांगना होगा हक

सिख पंथ की शिरोमणि जत्थेबंदी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बाबा बंदा सिंह बहादुर द्वारा स्थापित पहली...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 28, 2018, 02:20 AM IST

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    सिख पंथ की शिरोमणि जत्थेबंदी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बाबा बंदा सिंह बहादुर द्वारा स्थापित पहली सिख राजधानी लोहगढ़ साहब के स्थापना दिवस पर आयोजित गुरमत समागम में सिख संगत का सैलाब उमड़ा। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग गुरु साहब के आगे शीश झुकाने के लिए घंटों कतारों में लगे रहे। समागम से करीब दो किलोमीटर दूर ही बसों व निजी वाहनों का काफिला रोक दिया गया था। तपती धूप में संगत नंगे पांव समागम की ओर खिंची चली आ रही थी।

    बाबा बंदा सिंह बहादुर की पहली सिख राजधानी के 308वें स्थापना दिवस पर इस समागम में शिरोमणि अकाली दल के प्रधान एवं पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल मुख्यातिथि रहे। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल सिखों की सबसे बड़ी पंचायत है। राजनीतिक तौर पर सिख कौम को हरियाणा में भी मजबूत होने की जरूरत है। इसलिए सभी एक झंडे के नीचे आकर अपने हक की मांग करें। उन्होंने कहा कि सियासत के बिना धर्म नहीं चल सकता। समागम में आई संगत से अपनी युवा पीढ़ी को यादगार स्थलों पर ले जाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों द्वारा दी गई शहादत को सदैव याद रखें। उनकी दो प्रमुख योजनाएं विरासत-ए-खालसा और छप्पर चिड़ी परियोजनाएं इसी से जुड़ी हैं। बादल ने चिंता जताई कि पिछली सरकारों ने लोहगढ़ साहब का विकास नहीं किया। अब एसजीपीसी ने इसे विकसित करने का बीड़ा उठाया है। यहां बाबा बंदा सिंह बहादुर की राजधानी का भव्य व जीवंत किला बनाया जाएगा।

    बिलासपुर | समागम में मौजूद पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल व अन्य।

    बिलासपुर | लोहगढ़ में आयोजित समागम में भारी संख्या में संगत ने कीर्तन-गुरबाणी का पाठ किया और माथा टेका।

    तपती रेत पर दो किमी पैदल चलकर भी न कम हुआ संगत का उत्साह

    पांच सिखों ने की पहली सिख राजधानी स्थापित

    एसजीपीसी प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोंवाल ने कहा कि लोहगढ़ वह स्थान है जहां से केवल पांच सिखों ने सिख राज की स्थापना की थी। हजारों की सिख संगत हरियाणा से अपने राजनीतिक हक की आवाज बुलंद क्यों नहीं कर सकती। अकाली दल के मीत प्रधान बलविंद्र सिंह भुंदड़ ने कहा कि खट्टर सरकार ने पांच सदस्यों का ट्रस्ट बनाकर उन्हें सिख इतिहास से छेड़छाड़ का हक दे दिया। इसे सिख संगत बर्दाश्त नहीं करेगी। सिख इतिहास को तोड़ मरोड़ कर लिखी गई किताब जब्त की जाए। सिख इतिहास को केवल सिख स्कॉलर ही जानते हैं।

    इधर, एचएसजीपीसी के पूर्व प्रधान बाजवा बोले- अकाली दल बादल कर रहा है संगत के पैसे का दुरुपयोग

    एचएसजीपीसी के पूर्व जिला प्रधान दलजीत सिंह बाजवा ने जारी बयान में में कहा कि लोहगढ़ ट्रस्ट के अस्तित्व में आने के बाद ही एसजीपीसी को लोहगढ़ की याद आई। इससे पूर्व यह संस्था भी चुप थी। दस साल पहले एसजीपीसी ने यहां विकास के लिए जमीन खरीदी थी, लेकिन एक पैसा खर्च नहीं किया। अब अपनी राजनीति के लिए एसजीपीसी बाबा बंदा सिंह बहादुर की सिख राजधानी के स्थापना दिवस के बहाने गुरमत समागम कर अपने राजनीतिक लाभ के लिए भीड़ जुटा रही है। उनका कहना है कि धार्मिक समागम तो एक बहाना था एसजीपीसी व शिरोमणि अकाली दल बादल का मुख्य उद्देश्य केवल राजनैतिक रोटियां सेकना था। हरियाणा की सिख संगत इन्हें प्रदेश में राजनीति नहीं करने देगी। हरियाणा का पैसा लूटना ही इनका मकसद है। सिख इतिहास के छेड़छाड़ मामले पर उन्होंने कहा कि एसजीपीसी सही इतिहास सार्वजनिक क्यों नहीं करती। प्रदेश की जनता एसजीपीसी के हरियाणा में राजनीति के सपने को कभी पूरा नही होने देंगी।

    ये रहे मौजूद:एसजीपीसी के सीनियर वरिष्ठ उपप्रधान रघुजीत सिंह विर्क, बाबा सुखा सिंह कार सेवा वाले, एसजीपीसी के पूर्व वरिष्ठ उपप्रधान बलदेव सिंह कायमपुर, अंतरिम कमेटी मेंबर बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला, मेंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना, जत्थेदार भूपिंद्र सिंह असंध, बीबी मनजीत कौर गधौला, शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष शरणजीत सिंह सौथा, शिअद महिला विंग की राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्या बीबी करतार कौर, इंजि. बलबीर सिंह, सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़, जसदीप बेदी, हरकेश मोहड़ी, बेअंत सिंह, मैनेजर नरिंद्र सिंह पंजोखरा, परमजीत सिंह, बाबा बुढ्डा दल प्रमुख बाबा बलबीर सिंह, बाबा अवतार सिंह, बलविंद्र सिंह जोड़ा, अवतार सिंह, पूर्व चेयरमैन अमरजीत सिंह मंगी, तजिंद्र पाल सिंह ढिल्लो, श्री दरबार साहिब अमृतसर से आए हजूरी रागी भाई ओंकार सिंह, धर्म प्रचार कमेटी का कविशरी जत्था भाई गुरइंद्र पाल सिंह बैंका, ढाडी जत्था भाई गुरभेज सिंह चविंडा, पंथक ढाडी जत्था ज्ञानी गुरप्रीत सिंह लांडरां व इंटरनेशनल ढाडी जत्था अजैब सिंह अनखी।

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