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सीएलजी में पहुंच रहे आधे से ज्यादा मामलों में बाप-बेटे में संपत्ति तकरार

Chhachhrauli News - बदले परिवेश में रिश्ते दरक रहे हैं। पिता-पुत्र के रिश्तों में भी खटास आ रही है। घर की चारदीवारी से बाहर निकल ये...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:00 AM IST
सीएलजी में पहुंच रहे आधे से ज्यादा मामलों में बाप-बेटे में संपत्ति तकरार
बदले परिवेश में रिश्ते दरक रहे हैं। पिता-पुत्र के रिश्तों में भी खटास आ रही है। घर की चारदीवारी से बाहर निकल ये विवाद थानों तक पहुंच रहे हैं। इन विवादों के पीछे नशा और बेरोजगारी मुख्य कारण सामने आया है। पिता नशा करने से बेटे को रोकता है तो बेटा बाप पर ही हाथ उठा रहा है, वहीं बेरोजगारी के चलते बेटा बड़ा होकर भी बाप पर निर्भर है। जेब में पैसे न होने से वह पिता से खर्चा मांगता है और इससे विवाद होता है।

घरेलू विवादों को निपटाने के लिए सीएलजी ब्रांच (समुदाय संपर्क समूह) को जिम्मेदारी दी गई है। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए सीएलजी ब्रांच की टीम ने टूटते और बिखरते परिवारों को फिर से जोड़ने का काम किया है। साल 2017 मेें 462 शिकायतें ब्रांच में आई। इसमें से 461 शिकायतों को ब्रांच ने आपसी सहमति से निपटाकर फिर से परिवारों को जोड़ने का काम किया है। इस साल 40 शिकायतें अब तक आई हैं, इनमें से 30 में आपसी सहमति से फैसला करा दिया है। इन परिवारों को कोर्ट और कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़े।

दहेज उत्पीड़न के केस में आपसी सहमति नहीं करा पाए: ब्रांच के चेयरमैन एडवोकेट सुशील आर्य और इंचार्ज सब इंस्पेक्टर कंवरपाल ने बताया कि साल 2017 में 462 मामले उनके पास आए थे। ये मामले थानों से, एसपी आफिस से आए थे। इन मामलों में मात्र एक केस सहमति से नहीं निपट पाया। वह केस दहेज उत्पीड़न का था। फर्कपुर निवासी महिला ने ससुरालियों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सहमति न होने पर केस को थाने में ट्रांसफर कर दिया गया था। वहां पर एफआईआर दर्ज हुई थी।

मिटे शिकवे

साल 2017 में घरेलू हिंसा, पैसे के लेनदेन और अन्य पारिवारिक 462 मामले पहुंचे, सीएलजी ब्रांच ने 461 में कराया समझौता, मात्र एक में केस दर्ज हुआ

यमुनानगर | पारिवारिक मामले निपटवाने के लिए सीएलजी ब्रांच में बैठी टीम।

इस तरह के मामले आते हैं यहां पर

यहां पर पारिवारिक जमीनी विवाद, पैसों का लेनदेन, छोटे झगड़े, घरेलू हिंसा, दान दहेज के विवाद आते हैं। सीएलजी ब्रांच की जिम्मेदारी एडवोकेट सुशील आर्य, भूषण कुमार, विजय बब्बर, साक्षी गुप्ता, सुरेंद्र मदान, पुरुषोत्तम परुथी, संदीप जैन, बलविंद्र सिंह को दी गई है। वहीं पुलिस का सब इंस्पेक्टर ब्रांच में बैठता है। लघु सचिवालय के कमरा नंबर 311 में यह टीम बैठती है।



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