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हादसे रोकने को बेलदार करेंगे नहर पर गश्त

गर्मी का प्रकोप शुरू हो चुका है और इस बार अप्रैल माह में ही जबरदस्त गर्मी पड़ रही है। भारी गर्मी के चलते दिन के समय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 18, 2018, 02:05 AM IST

गर्मी का प्रकोप शुरू हो चुका है और इस बार अप्रैल माह में ही जबरदस्त गर्मी पड़ रही है। भारी गर्मी के चलते दिन के समय आम लोगों का घरों से निकलना बंद हो चुका है। ऐसे गर्म मौसम में एक बार फिर बादली से गुजरने वाली एनसीआर नहर में नहाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी है। हर बार की तरह अनजान व दूर-दराज के लोग तथा ईंट भट्ठों के लेबर के अलावा स्थानीय युवा, बच्चे व महिलाएं नहर पर नहाने व कपड़े धोने के लिए पहुंचने लगे हैं।

बादली से गुजरने वाली एनसीआर नहर को बने लगभग 8 वर्ष का समय हुआ है। इन 8 वर्षों के समय में एनसीआर नहर में डूबने से 80 से ज्यादा बच्चों व युवाओं की मौत हो चुकी है। इसका मुख्य कारण लगातार बढ़ती गर्मी से निजात पाने के लिए दूर-दराज के गांव व दिल्ली क्षेत्र के स्कूली बच्चे तथा अन्य युवा नहर पर नहाने के लिए आने लगे हैं। मुख्य रूप से दिल्ली क्षेत्र से आने वाले बच्चों या युवाओं को तैरना नहीं आता है। इसलिए नहर में उतरने के उपरांत इस प्रकार के युवा और बच्चे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

पिछले 8 वर्षों के दौरान ऐसे अनेक हादसे हुए हैं, जिनमें नहर में डूबकर मरने वाले युवा व बच्चे बाहरी क्षेत्रों मुख्य रूप से दिल्ली क्षेत्र के रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के युवा और बच्चे ज्यादातर तैरना जानते हैं। बाहरी युवा तथा बच्चे खासतौर से दिल्ली क्षेत्र के युवा और बच्चे नहरों में डूबने व मरने जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के ज्यादा शिकार होते हैं। बाहर से आए युवाओं तथा बच्चों को नहर की गहराई, उसका जलस्तर, उसमें बहने वाले पानी का बहाव आदि के बारे में जानकारी नहीं होती। वे मुख्य रूप से दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।

बादली. एनसीआर नहर में कपड़े धोती प्रवासी महिलाएं।

पुलिस-प्रशासन बरतें सतर्कता

गर्मी बढ़ने के साथ ही एनसीआर नहर पर पुलिस व प्रशासन को सतर्कता दिखानी होगी। नहरों पर लगातार गश्त करनी होगी। ताकि बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं से कुछ हद तक बचा जा सके। युवाओं तथा बच्चों को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सके। प्रशासन व पुलिस को भारी गर्मी को देखते हुए इस ओर विशेष ध्यान देना होगा। सख्ती दिखानी होगी तथा नहरों में नहाने व कपड़े धोने पर सख्त रूख अख्तियार करना होगा। कुछ हद तक संभव है कि हर साल दर्जनों की संख्या में होने वाली डूबने व मरने की घटनाओं से कुछ हद तक निजात मिल सके।

नहर में कपड़े धाेना दंडनीय

हालांकि पुलिस ने इस पर काम करते हुए नहरों पर नहाने व कपड़े धोने के स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए हुए हैं। एनसीआर नहर में नहाने व कपड़े धोने को दंडनीय अपराध घोषित किया हुआ है। उपमंडल प्रशासन ने नहर विभाग को घाटों पर तारबंदी करने का पत्र भी दिया है।

कोई अनहोनी न हो

पुलिस की ओर से पहले भी सूचना बोर्ड लगाएं गए हैं। इसके उपरांत हमारी कोशिश है कि दिन में दो से तीन बार नहरों पर गश्त भी की जाए। वे इस विषय में गंभीर है और चाहते है कि कोई भी अनहोनी न हो। - श्रीभगवान, बादली चौकी प्रभारी

तारबंदी का मिला पत्र

घाटों पर तारबंदी को लेकर बादली प्रशासन का पत्र मिला है। इसे उच्च अधिकारियों को भेजा है, लेकिन यह काम कम संभव है, क्योंकि नहर पीने के पानी की है और साल में दो बार कम से कम इसकी सफाई होती है। तार लगने से मशीन चलने में परेशानी होगी। बेलदारों को इस विषय में नहर पर लगातार गश्त करने व अन्य उपायों के लिए बोला है। हमने नहर के हर घाट पर बोर्ड लगाएं है। -दिग्विजय शर्मा, एसडीओ, सिंचाई विभाग, गुरुग्राम मंडल

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