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परंपरागत फसलों का मोह त्याग किसान कम पानी वाली खेती अपनाएं

कृषि विभाग के एसडीओ ने बातचीत में किसानों को दी जानकारी भास्कर न्यूज | बादली किसान परंपरागत गेहूं और धान की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 24, 2018, 02:10 AM IST

कृषि विभाग के एसडीओ ने बातचीत में किसानों को दी जानकारी

भास्कर न्यूज | बादली

किसान परंपरागत गेहूं और धान की फसलों का मोह त्याग कर पानी की कम लागत वाली व कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलें उगाएं। इससे किसान कम लागत में अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। यह बातें कृषि विभाग के एसडीओ सुनील कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि धान की जगह अनेक प्रकार की सब्जियों वाली खेती करें।

वे सोमवार को बादली कृषि केन्द्र में किसानों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की काश्त करने से भूमिगत जल निरंतर नीचे जा रहा है। अगर पानी का जल स्तर इसी तरह गिरता गया तो यह भविष्य में गहरा संकट पैदा हो सकता है। किसानों को चाहिए कि वे पानी की कम लागत वाली खेती करें। इससे किसान कम लागत में अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है कि किसान संरक्षित खेती को अपनाएं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि कम लागत में अधिक आय और अधिक उत्पादन के बारे में जानकारी हासिल करें। ताकि किसानों का जीवन स्तर ऊंचा उठ सके। उन्होंने बताया कि बागवानी विभाग के माध्यम से अलग-अलग स्कीमों में किसानों को अनुदान दिया जा रहा है।

किसान परंपरागत फसलों की अपेक्षा नए बाग लगाने, फूलों की खेती, मसालेदार, जैविक खेती मशरूम की खेती, संरक्षित खेती करें। इस अवसर पर एडीओ रमेश लाठर ने कहा कि किसान परंपरागत फसल गेहूं धान के साथ-साथ फल, फूल, सब्जियों मशरूम की खेती करके अपने जीवन स्तर को ऊंचा उठा सकते हैं। बागवानी फसलों में टपका फव्वारा सिस्टम लगाकर किसान पानी को 70 प्रतिशत बचा सकता है।

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