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दिल्ली में हड़ताल से बाढ़सा एम्स में भी नहीं मिला इलाज

क्षेत्र के अलावा आसपास के गांवों के मरीज शुक्रवार सुबह बाढ़सा एम्स-2 में चल रही ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे। यहां...

Danik Bhaskar | Apr 28, 2018, 02:20 AM IST
क्षेत्र के अलावा आसपास के गांवों के मरीज शुक्रवार सुबह बाढ़सा एम्स-2 में चल रही ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे। यहां उन्हें पता चला कि डाॅक्टर दिल्ली में हड़ताल पर हैं। कोई भी डाॅक्टर अस्पताल में नहीं आया और न ही अाएंगे। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

25 अप्रैल को दिल्ली के एम्स में किसी बात को लेकर फेकल्टी मेम्बर ने एक चिकित्सक के साथ दुर्व्यवहार किया था। मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज सभी चिकित्सक 26 अप्रैल से हड़ताल पर हैं। सभी चिकित्सकों ने इस मामले एकजुट होकर कार्य बहिष्कार करते हुए ओपीडी में काम करने से मना कर दिया है। दिल्ली एम्स में हड़ताल का असर बाढ़सा एम्स-2 में भी देखने को मिला। कोई डाॅक्टर अस्पताल नहीं पहुंचा। दिल्ली एम्स के पीआर की ओर से भेजी गई प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि फेकल्टी मेम्बर ने गलती स्वीकार कर ली है। इस मामले को सुलझाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई बनाई जा रही है। इसके अतिरिक्त रोगियों की मांग को देखते हुए डायरेक्टर ने आरडीए से भी चिकित्सकों की हड़ताल को अनुचित ठहराए जाने की मांग की है। डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दोपहर लगभग 2 बजे तक हजारों मरीजों से आबाद रहने वाला बाढ़सा एम्स-2 अस्पताल शुक्रवार को सुनसान रहा।

बादली. डाॅक्टरों की हड़ताल के चलते अस्पताल में खाली पड़ी मरीजों के बैठने वाली कुर्सी।

तीस हजार रुपए जमा न करने पर उपचार करने से िकया

मना, स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत भेजी

झज्जर | सिविल अस्पताल के पास मौजूद एक निजी अस्पताल में मरीज के प्रति असंवेदनशीलता का मामला। एक वकील के पिता के साथ ऐसा हुआ। मामले में अस्पताल प्रबंधन को शिकायत की गई, तब उन्होंने इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं किया। अब मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भेजी है। वार्ड एक के रहने वाले एडवोकेट मोहित ने बताया कि उनके पिता वजीर सिंह को हार्ट संबंधी समस्या है, इसके लिए घर पर भी ऑक्सीजन की व्यवस्था रखते हैं। 21 अप्रैल को अचानक उनका स्वास्थ्य खराब होने पर सिविल अस्पताल के पास के एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया। यहां उनको उपचार के तहत ऑक्सीजन लगा दी गई साथ ही उनसे कुछ दवा भी मंगवाई। कुछ ही देर के बाद उनकी ओर से अचानक सीधे तीस हजार रुपए जमा कराए जाने की बात कहीं गई। लेकिन ऐसा न करने के साथ ही उन्होंने मरीज की ऑक्सीजन हटा दी और दूसरे दवा उपकरण भी हटा दिए। जिसके कारण उनके पिता को काफी असुविधा रही। उनकी समस्या कहीं अधिक बढ़ गई। जिसके कारण उनको पिता को गंभीर स्थिति में यहां से लेकर जाना पड़ा। इनका आरोप है कि उनके पिता को ऑक्सीजन की स्पोट की बहुत आवश्यकता थी, लेकिन पैसे के लिए अस्पताल ने उनके पिता की जान को खतरे में डाल दिया। जब मामला अस्पताल प्रबंधन के संज्ञान में लगाया गया, तब उनका रवैया भी काफी हैरान करने वाला था। अस्पताल के पैसे के लिए मरीज के प्रति असंवेदनशील होने के मामले की शिकायत अब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को की गई है। साथ ही मामले में पुलिस को भी शिकायत दी है।