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नेशनल कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए बनेगा मेंटर ग्रुप

Ellenabad News - शहर के राजकीय नेशनल कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब विद्यार्थियों को पढ़ाई, करिअर, फार्म भरने में आ...

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2018, 02:10 AM IST
नेशनल कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए बनेगा मेंटर ग्रुप
शहर के राजकीय नेशनल कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब विद्यार्थियों को पढ़ाई, करिअर, फार्म भरने में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। विद्यार्थियों के शिक्षक ही अब उनके पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाएंगे और समय-समय पर विद्यार्थियों की समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से जानकर उनका समाधान भी करेंगे।

विद्यार्थी की समस्या चाहे पढ़ाई से संबंधित हो, परिवार से जुड़ी हो या फिर कोई आर्थिक-व्यक्तिगत समस्या, इस पर उसका मेंटर (शिक्षक) चर्चा करके समाधान भी सुझाएगा। उच्चतर शिक्षा विभाग के आदेश पर राजकीय नेशनल कॉलेज में मेंटर (संरक्षक या पथ प्रदर्शक) ग्रुप बनाए जाएंगे।उच्चतर शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए हैं कि प्रदेश के सभी कॉलेजों में मेंटर (संरक्षक या पथ प्रदर्शक) ग्रुप गठित किए जाएं। इस पर कार्रवाई करते हुए राजकीय नेशनल कॉलेज प्रशासन ने प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि उच्चतर शिक्षा विभाग के आदेश हैं कि प्रत्येक 40 विद्यार्थियों पर एक ग्रुप बनाया जाए लेकिन राजकीय नेशनल कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या अधिक और शिक्षकों की संख्या कम है, इसलिए यहां 60 विद्यार्थियों का एक ग्रुप बनाया जाएगा। इस लिहाज से नेशनल कॉलेज में करीब 66 ग्रुप बनकर तैयार होंगे।

कार्यकारी प्रिंसिपल डॉ. केएल गुप्ता ने सभी शिक्षकों की स्टाफ काउंसिल की मीटिंग भी ली और दिशा-निर्देश जारी किए। राजकीय नेशनल कॉलेज में करीब 5100 विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं जबकि करीब 100 शिक्षक काम कर रहे हैं। हालांकि इस योजना में 91 शिक्षकों को शामिल किया गया है जिसमें 61 शिक्षक नियमित जबकि 30 शिक्षक अनुबंधित हैं। इस योजना में उन शिक्षकों को शामिल नहीं किया गया है जो आगामी कुछ महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं क्योंकि यह ग्रुप तीन साल के लिए गठित होना है।

सरस्वती की खोज में 960 फुट ड्रिल के बाद रास्ते में आई चट्‌टान, अब कंपनी नई तकनीक से करेगी बोर

पत्थर आते ही ड्रिलिंग की रफ्तार हुई धीमी, केवल 10 से 20 फुट ही हो पा रही प्रतिदिन खुदाई, अब तक 40 फुट पत्थर किया पार

कुलदीप शर्मा | सिरसा

जिले के गांव फरवाईकलां में चल रही सरस्वती नदी की खोज में आखिर पत्थर बाधा बन ही गया है। जमीन में अब तक हुई 960 फुट गहरी ड्रिलिंग के बाद एकाएक पत्थर आ गया है। जिसका अनुमान अधिकारियों ने पहले से ही लगा रखा था। इसलिए अब तक तेजी से चल रहा ड्रिलिंग का कार्य अचानक धीमा पड़ गया है। पहले जहां औसतन 500 फुट से अधिक की खुदाई एक दिन में हो रही थी।

वो अब 10 से 20 फुट प्रतिदिन की रह गई है। पत्थर हार्ड इतना है कि अत्याधुनिक तरीके से की जा रही ड्रिलिंग के बाद भी उसको पार करने में समय लग रहा है। पत्थर की सख्ती को देखते हुए ड्रिलिंग करने वाली नई दिल्ली की वेपकोश कंपनी ने अब स्पेशल तकनीक (बिट ) का प्रयोग करके पत्थर को पार करने का निर्णय लिया है। इस तकनीक से ड्रिलिंग का कार्य पहले के मुकाबले अधिक तेजी से होगा। कंपनी के अधिकारी गौरव शर्मा ने बताया कि अब तक 1 हजार फुट की ड्रिलिंग हो पाई है। 960 फुट के बाद पत्थर आना शुरू हुआ था। जो लगातार जारी है। अब यह कहां तक चलेगा इसका कोई अनुमान नहीं है। हमारे अनुमान मुताबिक 1500 फुट के आस पास सरस्वती नदी की जलधारा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। जब तक पत्थर चलेगा तब तक ड्रिलिंग का कार्य धीमा ही चलेगा। इसलिए उनकी कोशिश है कि जल्दी से जल्दी पत्थर को पार किया जाए। गौरव शर्मा ने बताया कि अब तक सरस्वती के लिए जहां भी बोर किया है। वहां ऐसी कोई बाधा नहीं आई है। जबकि सिरसा के इतिहास में उन्होंने अब तक यह नहीं सुना कि इस पत्थर को पार करके किसी ने बोर किया हो। पत्थर आने के बाद बोर को बीच में ही छोड़ दिया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वसूला डेढ़ लाख का जुर्माना

भास्कर न्यूज | ऐलनाबाद

जन स्वास्थ्य विभाग एवं जल स्वच्छता सहायक संगठन की ओर से चलाये जा रहे ग्रामीण जल संरक्षण अभियान के तहत सक्षम युवाओं के सहयोग से खंड ऐलनाबाद के गांव मैहनाखेड़ा व ढाणी शेरां में अवैध पानी कनेक्शनों को वैद्य किया गया। उपमंडल अभियंता ऐलनाबाद जयवीर ढांडा ने बताया कि गांव मैहनाखेड़ा में कुल 281 अवैध पेयजल कनेक्शनों को वैद्य किया गया जिसके दौरान कुल 1 लाख40 हजार 500 रुपये का राजस्व प्राप्त किया। इसके अलावा 98 टूटियां लगवाई गई व 351 सैंपल में क्लोरीन की जांच की गई तथा 52 घरों में पानी की सप्लाई में सुधार किया गया। उन्होंने बताया कि इसी तरह ढाणी शेरां पंचायत में भी कुल 107 अवैध पेयजल कनेक्शन वैध किये गये व 53 हजार 500 रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया। 16 टूटियां लगवाई गई जिससे 21 घरों में पानी की सप्लाई में सुधार हुआ व लाखों लीटर पानी की बचत हुई।

उपमंडल अधिकारी ने बताया कि दोनों गांवों में 100 प्रतिशत कनेक्शन वैध हो चुके हैं और जल्द ही दोनों गांवों का नाम जल संरक्षण पुरस्कार के लिए सरकार को भेजा जाएगा। इस अभियान में ग्राम पंचायत का सराहनीय योगदान रहा है। रानियां व ऐलनाबाद में खण्ड संसाधन संयोजक व कनिष्ठ अभियंता के नेतृत्व में सक्षम टीमों का गठन किया गया है जो गांव के हर घर में पहुंच कर ग्रामीणों को अपने पेयजल कनेक्शनों को वैध करवाने के साथ ही पानी संबंधी अन्य समस्याओं की जानकारी जुटा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वह 500 रुपये राशि देकर पानी का अवैध कनेक्शन कटवा लें।

उच्चतर शिक्षा विभाग के आदेश पर बनाया प्लान, 60 विद्यार्थियों के लिए एक शिक्षक को बनाया संरक्षक

सरस्वती नदी की खोज के लिए हो रही ड्रिलिंग के दौरान पत्थर को काटा जा रहा है।

365 फुट मोटी परत का पत्थर होने की संभावना

यह है योजना और ऐसे काम करेगा मेंटर ग्रुप

आदेश हैं कि 60 विद्यार्थियों का एक मेंटर ग्रुप गठित किया जाए यानी प्रत्येक ग्रुप का एक शिक्षक मेंटर होगा। यह शिक्षक ग्रुप के सभी विद्यार्थियों से व्यक्तिगत रूप से जुड़ेगा और विद्यार्थियों की पढ़ाई, कैरियर, परिवार या व्यक्तिगत रूप से जुड़ी समस्याओं को भी जानकर उनका समाधान करने में मदद करेगा। यहां तक कि यदि किसी विद्यार्थी को आर्थिक परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा हो तो उस स्थिति में भी मेंटर यानी शिक्षक विद्यार्थी की मदद करेगा। इस ग्रुप की प्रत्येक 15 दिन बाद एक मीटिंग होगी। मेंटर सभी विद्यार्थियों के परिवार वालों के भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क में रहेगा।

विद्यार्थियों को ये होगा लाभ




ढाणी रामपुरा के ग्रामीणों अनुसार यह पत्थर 1325 फुट तक हो सकता है इसको पार करने के बाद ही सरस्वती मिलेगी। माना जा रहा है कि जब ड्रिलिंग 325 फुट और पहुंच जाएगी तब जाकर पत्थर खत्म होगा। उसके बाद सरस्वती नदी की जलधारा कभी भी मिल सकती है। जबकि सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड की टीम की ओर से फरवाईकलां में की जा रही ड्रिलिंग अभी तक 1000 फुट तक पहुंची है। टीम प्रत्येक 10 फुट के बाद मिट्टी और पानी के सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेज रही है। यहां बता दें कि हरसेक द्वारा तैयार नक्शे के अनुसार सरस्वती नदी आदि बद्री से शुरू होकर हरियाणा के कुरुक्षेत्र , कैथल, जींद, फतेहाबाद व सिरसा जिला से होकर राजस्थान में प्रवेश करती है।

मेंटर ग्रुप जल्द ही काम शुरू कर देंगे


वर्ष 2015 में किया था प्रयास, पत्थर की वजह से 1040 फुट ही कर पाए थे बोर

ढाणी रामपुरा में वर्ष 2001 में 180 फुट तक जल स्तर था। गिरते भूजल से चिंतित ढाणी रामपुरा के ग्रामीणों ने गुड़गांव की एक कंपनी से भूमिगत पानी के बारे में जानकारी ली। कंपनी ने उन्हें बताया कि करीब 1325 फीट की गहराई पर एक ठंडे पानी की जलधारा बह रही है। यदि वहां से पानी की धारा फूटेगी तो भूजल स्तर ऊपर जाएगा। मगर इस पर आने वाले लाखों रुपये के खर्च के कारण ग्रामीणों ने इतनी गहराई पर बोर करने में उस समय असमर्थता जताई। करीब पंद्रह साल बाद वर्ष 2015 में ग्रामीणों ने उसी कंपनी के संचालक से बातचीत करके दोबारा से बोर करने का फैसला किया। इसके लिए पूरे गांव ने 20 लाख रुपये सामूहिक रूप से इकट्ठे किए और गांव के किसान लाभचंद की जमीन पर बोर का कार्य शुरू किया। करीब 950 फुट की डीप बोरिंग के बाद पत्थर आ गया। पत्थर को 70 फुट तक तोड़ा गया तो 1020 फुट पर जलधारा फूट पड़ी थी। मगर वह पानी खारा था। इससे आगे ग्रामीण कुल 1040 फुट तक ही बोर कर पाए । आगे कार्य बंद करना पड़ा। सर्वे के दौरान ग्रामीणों ने माना कि 1325 के करीब जाने के बाद ही मीठे पानी की जलधारा फूटेगी। जिसे ग्रामीण सरस्वती नदी का भी पानी मानकर चल रहे थे। मगर वहां तक ग्रामीणों का प्रयास नहीं पहुंच पाया। पत्थर की वजह से बोर का बीच में ही अधूरा छोड़ना पड़ा।

शहीद भगत सिंह स्टेडियम में 12 करोड़ से बनेगा नया सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक

गुणवत्ता को सुधारने और बेहतर परिणाम लाने के लिए विभाग ने बनाया प्लान

भास्कर न्यूज. सिरसा

शहर के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में जल्द ही करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से नया सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनाया जाएगा। खेल विभाग ने प्लानिंग बनानी शुरू कर दी है। प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेज दिया गया है। सरकार की मंजूरी मिलते ही सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बिछाने पर काम शुरू हो जाएगा। इससे जहां एक ओर सिरसा क्षेत्र के खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए हाई क्वालिटी का ट्रैक मिलेगा वहीं दूसरी ओर यहां अंतरराष्ट्रीय स्तरीय खेल आयोजन भी किए जा सकेंगे।

खेल विभाग की ओर से खिलाड़ियों को सुविधाएं प्रदान करने के लिए नया फैसला लिया गया है। इसके तहत प्रस्ताव बनाया गया है कि शहर के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक बनाया जाए। इसके लिए जिला स्तरीय अधिकारियों ने प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इस पर करीब 12 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सरकार की ओर से मंजूरी मिलते ही स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक बनाने का काम शुरू हो जाएगा।

सिरसा और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी हैं जो एथलेटिक्स में मेहनत कर रहे हैं। शहीद भगत सिंह स्टेडियम में प्रतिदिन 100 से अधिक खिलाड़ी प्रैक्टिस करने के लिए आते हैं। इसके अलावा सिरसा के बड़ी संख्या में खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी खेल प्रतियोगिताओं में न केवल भाग लेने जाते हैं बल्कि मेडल भी हासिल करते हैं। हालांकि समस्या यह है कि अभी फिलहाल एथलेटिक का केवल एक कोच है वह भी छुट्टी पर चल रहा है।

राजस्थान से एमपीटी किट मंगवाकर महिला ने गिराया था चार महीने का गर्भ

पुलिस ने भरोखां की महिला पर केस दर्ज किया

भास्कर न्यूज | सिरसा

फर्जी अल्ट्रासाउंड चक्कर में फंसकर गर्भपात करवाने के शक में आई गांव भरोखां की महिला के खिलाफ पुलिस जांच का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। पुलिस को प्राथमिक जांच में पता चला है कि महिला ने गर्भपात करवाने वाली प्रतिबंधित एमपीटी किट का प्रयोग किया था। हालांकि अभी तक मामला पूरा क्लियर नहीं है। इसलिए पुलिस ने महिला के खिलाफ केस दर्ज करके उसकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए है। मगर गर्भपात की वजह से अधिक रक्तस्त्राव होने के कारण आरोपी महिला अस्पताल में ही भर्ती है। इसलिए पुलिस अभी उसको गिरफ्तार नहीं कर सकती।

मेडिकल फिट होने के बाद सदर थाना पुलिस उसे गिरफ्तार करेगी। उसके बाद महिला से सच उगलवाया जाएगा। पुलिस सूत्रों की मानें तो आरोपी महिला ने राजस्थान के किसी इलाके से एमपीटी किट मंगवाई थी। इसमें उसके परिजनों का भी हाथ हो सकता है। वहीं किसी फर्जी अल्ट्रासाउंड करने वाले गिरोह का शिकार होकर उसने गर्भपात करवाया हो सकता है। इसलिए पुलिस महिला से पूछताछ करने के बाद ही सच्चाई पता करेगी। पुलिस सबसे पहले उस एमपीटी किट देने वाले शख्स की पड़ताल करेगी। उसके बाद अल्ट्रासाउंड की आड़ में गोरखधंधा करने वाले का पता लगाएगी। पुलिस के पास स्वास्थ्य विभाग की ओर से आई शिकायत की मानें तो महिला ने पेट में लड़की का भ्रूण होने के शक में ही यह कदम उठाया था।

यह है पूरा मामला

गांव भरोखां की एक महिला अधिक रक्तस्त्राव होने के चलते तीन दिन पहले गांव पनिहारी की पीएचसी में आई थी। हालत गंभीर देखते हुए उसे सिविल अस्पताल सिरसा रैफर कर दिया। यहां आने के बाद जब महिला की जांच हुई तो पता लगा कि महिला ने गर्भपात वाली मेडिसिन ली हुई है। जांच करने पर पता चला कि चार महीने का गर्भ गिराया गया है। गर्भपात करवाकर जिस भ्रूण को खत्म किया गया वो लड़के का था। इस पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पड़ताल की तो पता चला कि महिला के पहले से दो बेटियां हैं। इससे शक बढ़ गया और विभाग ने इसकी शिकायत पुलिस को कर दी। शिकायत में स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि महिला को किसी ने पेट में पल रहे भ्रूण को लड़की का बताया है। उसी के शक में यह गर्भपात करवाया गया है।

सिरसा। शहीद भगत सिंह स्टेडियम के ग्रास एथलेटिक्स ट्रैक पर दौड़ते धावक।

ये है सिंथेटिक ट्रैक और ये होगा लाभ

सिंथेटिक ट्रैक धावकों के लिए स्पेशल ट्रैक होता है। ग्रास ट्रैक और सिंथेटिक ट्रैक में दिन-रात का अंतर है। ट्रैक पर दौड़ने वाले धावक कम मेहनत में बेहतर रिजल्ट दे सकते हैं क्‍योंकि कम क्षमता में अधिक काम होता है। इस पर अभ्यास करने से खिलाड़ियों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। यदि सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में यह ट्रैक स्थापित हो जाए तो निश्चित ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सिरसा के खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे।

प्रस्ताव बनाकर भेजा है, खिलाड़ियों को होगा लाभ


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