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राजस्थान से लाए गोवंश को मुख्य गोशाला में छोड़ने पर हुआ विवाद

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:10 AM IST

शहर की मुख्य गोशाला में राजस्थान का गोवंश लेने को लेकर बुधवार को मुख्य गोशाला संचालकों व शिव नंदीशाला के संचालकों...
शहर की मुख्य गोशाला में राजस्थान का गोवंश लेने को लेकर बुधवार को मुख्य गोशाला संचालकों व शिव नंदीशाला के संचालकों में विवाद हो गया। बाद में गोशाला के संचालकों की ओर से भविष्य में ऐसा नहीं करने के आश्वासन पर समझौता हुआ। शहर की सबसे प्राचीन मुख्य गोशाला में करीब 900 गोवंश हैं। इस गोशाला के रखरखाव का खर्चा अनाज मंडी में निर्धारित फीस व जनसहयोग से चलता है। गोशाला के संचालक इससे अधिक गोवंश को गोशाला में रखने में असमर्थता जताते रहे हैं। इसके बावजूद शहर में घूम रहे बेसहारा गोवंश व नंदियों की समस्या से निपटने के लिए करीब 6 माह पूर्व उपमंडल प्रशासन के सहयोग से ढाणी शेरां रोड पर एक अस्थायी शिव नंदीशाला स्थापित की गई, जिसमें इस समय 1500 से अधिक नंदी रखे गए हैं। इन नंदियों के चारे आदि की व्यवस्था का कोई स्थायी साधन नहीं है। इसके संचालक जनसहयोग से जैसे-तैसे करके बड़ी मुश्किल से नंदीशाला का संचालन कर रहे हैं।

जब पशु रखने को नहीं जगह तो क्या ला रहे पैसों में गोवंश

नंदीशाला के संचालकों रूपराम जैपाल व एनआर सिद्ध ने बताया कि बुधवार को किसी गौभक्त ने एक कैंटर में भरे गोवंश को देखकर उसका पीछा किया। पूछताछ करने पर कैंटर सवार व्यक्तियों ने बताया कि उक्त कैंटर में भरा गोवंश राजस्थान के गांव ढंढेला से लाया गया है। इस गोवंश को ऐलनाबाद की प्रमुख गौशाला में भिजवाया जाना है जिसके लिए गोशाला के संचालकों ने बाकायदा 2500 रुपये प्रति नंदी की दर से 40 हजार रुपये भी जमा करवाए हैं। इस बात को लेकर शिव नंदीशाला के संचालकों व अन्य गोभक्तों में रोष फैल गया जब शहर में इतना गोवंश भरा पड़ा है, तो पैसों के बदले राजस्थान से गोवंश लेने की क्या आवश्यकता है।

उन्होंने इस प्रकरण के लिए गोशाला संचालकों व नंदीशाला संचालकों में काफी कहासुनी हुई। उन्होंने कहा कि जब शहर की नंदीशाला में 1500 नंदियों को बिना किसी सरकारी सहायता के बड़ी मुश्किल से रखा गया है, ऐसे में यहां की प्रमुख गोशाला उनकी सहायता ना करके पैसे लेकर राजस्थान के पशुओं को गौशाला में रख रही है। गोभक्तों व किसानों ने आरोप लगाया कि गौशाला के संचालक एक गेट से पैसे लेकर गोवंश को गोशाला में रखती है, जबकि कुछ समय बाद उस गोवंश को पिछले गेट से बाहर निकाल देते हैं। यही गोवंश या तो सड़कों पर निकल कर दुर्घटनाओं का कारण बनता है या फिर नंदीशाला में पहुंच जाता है।

इस प्रकरण की सूचना पाकर नगरपालिका के चेयरमैन रविंद्र कुमार लढ़ा, सचिव सुरेंद्र शर्मा, मुख्य गौशाला के अध्यक्ष पवन लढ़ा, हनुमान प्रसाद अग्रवाल, मुरारीलाल पोहड़केवाला, नंदीशाला के रूपराम जैपाल, एनआर सिद्ध, उपमंडल ऑफिस से तेजप्रकाश शर्मा, काशी का बास के पूर्व सरपंच साहबराम भांभू, भूपेंद्र नंबरदार एकत्र हो गए। उन्होंने मिलकर फैसला लिया कि भविष्य में किसी भी गांव से कोई भी बेसहारा गोवंश को ऐलनाबाद की गोशालाएं नहीं लेगी।

श्री गोशाला में राज्स्थान से लाए गए गोवंशों को लेकर आपसी बहस करते दोनो पक्षों के लोग।

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Web Title: राजस्थान से लाए गोवंश को मुख्य गोशाला में छोड़ने पर हुआ विवाद
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