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हैफेड की रोस्टर प्रणाली लागू न हाेने व ज्यादा नमी से अटकी सरसों की खरीद

सरकार ने 15 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद करने के आदेश जारी कर रखे है। मगर 5 दिन बीतने बाद भी खरीद एजेंसी हैफेड अभी तक...

Dainik Bhaskar

Mar 20, 2018, 02:15 AM IST
हैफेड की रोस्टर प्रणाली लागू न हाेने व ज्यादा नमी से अटकी सरसों की खरीद
सरकार ने 15 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद करने के आदेश जारी कर रखे है। मगर 5 दिन बीतने बाद भी खरीद एजेंसी हैफेड अभी तक गांवों का चयन करके रोस्टर प्रणाली लागू नहीं कर सकी है। इसलिए अभी तक किसी किसान को पता ही नहीं कि उसकी सरसों किस दिन मंडी में बिकेगी। हालांकि हैफेड के अधिकारी इस प्रक्रिया में जुटे हुए हैं,मगर अभी तक तहसील से रिकार्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण इसमें देरी हो रही है। वहीं किसान अनाज मंडी स्थित सरकारी दुकान पर चक्कर लगाना शुरू कर चुके हैं। रोस्टर प्रणाली के तहत ही सरसों खरीदी जाना है। इस बार तहसील के हिसाब से किसान सरसों बेच सकेंगे। सिरसा तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव के किसान सिरसा मंडी में रोस्टर प्रणाली के तहत सरसों लेकर आएंगे। वहीं चौपटा तहसील के चौपटा मंडी की सरकारी दुकान पर सरसों लेकर जाएंगे। इस बार सरकार ने जिले में 3 मंडियों की बजाए 6 मंडियों में खरीद शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है। अब तक जिले में सिरसा, ऐलनाबाद, कालांवाली मंडी में ही सरसों की खरीद की जाती रही है। मगर इस बार नाथूसरी चौपटा, डबवाली और खारिया मंडी में किसान अपनी सरसों ले जाकर सरकारी रेट पर बेच सकेंगे। रानियां तहसील के किसान खारियां मंडी में सरसों लेकर आएंगे।

सरकार की योजना अनुसार एक-एक किसान से 25 क्विंटल सरसों की खरीद की जाएगी। सरसों का खरीद मूल्य 4 हजार रुपये निर्धारित किया गया है, 4 हजार रुपये से कम कोई भी किसान सरसों न बेचे। उन्होंने कहा कि 8 प्रतिशत तक की नमी की सरसों की खरीद की जाएगी। उससे अधिक नमी की सरसों नहीं खरीदी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान अपनी सरसों को बिलकुल सुखा कर लाएं। किसान सरसों की फसल को बेचने के समय अपने साथ भूमि की फर्द को पटवारी व तहसीलदार से प्रमाणित कर लाएं, आधार कार्ड, पेन कार्ड, वोटर कार्ड व बैंक कॉपी भी साथ लाएं।

10 प्रतिशत से अधिक आ रही नमी, इसलिए नहीं हुई एक भी ढेरी की खरीद

अनाज मंडी की सरकारी दुकान के अकाउंटेंट भीम सिंह बताते हैं कि अभी तक मंडी में कुछके किसानाें ने सरसों की ढेरी लगाई है। उनकी नमी मापी गई तो 10 से 12 प्रतिशत तक आ रही है। इसलिए अभी कोई ढेरी की खरीद नहीं हुई है, दुकान पर नमी मापक यंत्र लगा हुआ है। कोई भी किसान नमी आकर माप सकता है। जानकारी के लिए हेल्प डेस्क भी बनाया हुआ है। यहां बता दें कि किसान मंडी में गीली सरसों लेकर आ रहे हैं। इसलिए वे प्राइवेट एजेंसियों को ही बेच रहे हैं। उनकी सरसों सरकारी रेट से 500 रुपये सस्ती बिक रही है। जिनको सरकारी दुकान पर बेचनी है। वे मंडी में ही अपनी सरसों सुखा रहे हैं।

किसान लगा रहे सरकारी दुकानों के चक्कर, सैंपल लाकर दुकान पर नमी चेक करा रहे हैं किसान

5०० रुपये प्रति क्विंटल सस्ती सरसों बेचने पर मजबूर हुए किसान

किसानों को नहीं आने देंगे परेशानी


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