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बालकों को अच्छे संस्कार देकर ध्रुव जैसा बनाएं : भरत मुनि

शहर के श्री रामलीला मैदान में चल रही श्री मद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास महंत भरतमुनि महाराज ने ध्रुव चरित्र...

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 02:20 AM IST
शहर के श्री रामलीला मैदान में चल रही श्री मद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास महंत भरतमुनि महाराज ने ध्रुव चरित्र सुनाया। उन्होंने कहा कि मन की दो वृतियां होती है, सुरूचि और सुनीति। जीव की रूचि संसार के भोगों में अधिक रहती है। सुरूचि नीति की ओर उसका झुकाव कम ही रहता है। सुनीति ब्रह्म की ओर ले जाती है, जबकि सुरूचि पतन की ओर। सुनीति अंगीकार कर जीव ब्रह्म को अचल पद को प्राप्त कर सकता है, जबकि सुरूचि को गले लगाने वाला जीव संसार के जन्म-मरण के चक्र में ही पड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता को सुनीति जैसा बनना चाहिए और सुनीति का अनुगमन कर अपने बालकों को अच्छे संस्कार देकर ध्रुव जैसा बनाना चाहिए। ध्रुव जैसे भगवान भक्त एवं संस्कारवान बालक समाज में होंगे, तो यह संसार ही विष्णुलोक बन जाएगा और भगवान भी अपना लोक छोड़कर यहीं निवास करने लगेंगे। ध्रुव का यह आख्यान संसार को सुंदर बनाने के लिए दिव्य भागवत संदेश है। उन्होंने कहा कि इस लोक और परलोक में जो साथ देता है, उसे धर्म कहते हैं। धर्म का अर्थ भी यही है कि जो वर्तमान को आनंदित कर देता है।

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