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अलग-अलग इंडस्ट्रियल सेक्टर का 70 करोड़ रु. का माल अटका, खड़े रहे 600 ट्रक

दीपक पांडेय | Last Modified - Feb 02, 2018, 07:27 AM IST

पहले दिन ही ई-वे की साइट क्रैश हो गई। इससे उद्यमियों को माल भेजने के लिए ई-वे बिल नंबर नहीं मिल सका।
अलग-अलग इंडस्ट्रियल सेक्टर का 70 करोड़ रु. का माल अटका, खड़े रहे 600 ट्रक

फरीदाबाद। केंद्र सरकार द्वारा सेल्स टैक्स की चोरी रोकने के लिए देशभर में लागू किया गया ई-वे बिल पहले दिन ही जिले के उद्यमियों के लिए गले की फांस बन गया। पहले दिन ही ई-वे की साइट क्रैश हो गई। इससे उद्यमियों को माल भेजने के लिए ई-वे बिल नंबर नहीं मिल सका। इससे अलग-अलग इंडस्ट्रियल सेक्टर में करीब 70 करोड़ रुपए का माल 600 ट्रकों में लोड होकर खड़ा रह गया।

साइट क्रैश होने से केवल लोहा मंडी में ही 10 करोड़ का माल अटक गया। इस समस्या को लेकर उद्यमियों ने जब सेल्स टैक्स आफिस में शिकायत की तो जवाब मिला कि साइट क्रैश होने की सूचना चंडीगढ़ मुख्यालय में दे दी गई है। जिला स्तर पर इसका कोई समाधान नहीं हो सकता।
केंद्र सरकार ने सेल्स टैक्स में चोरी रोकने के लिए देशभर में ई-वे बिल लागू किया है। सेल्स टैक्स विभाग के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद से कुछ उद्यमी और व्यापारी टैक्स नहीं चुका रहे हैं।

बिल काटने के बाद भी उसमें रिटर्न नहीं दिखाया जा रहा जिससे टैक्स चोरी की आशंका बढ़ गई है। इसलिए सरकार की तरफ ई-वे बिल को लागू क दिया गया, ताकि टैक्स चोरी करने वालों को सही सिस्टम में लाया जा सके। इस नियम से माल की आवाजाही पर नजर आसानी से रखी जा सकेगी। देर रात तक साइट खुलने तो लगी, लेकिन स्पीड काफी स्लो रही।

जिले से 50 से 80 करोड़ का माल रोज सप्लाई होता है

लघु उद्योग भारती के सदस्य अरुण बजाज के अनुसार जिले की अलग-अलग इंडस्ट्री से 50 से 80 करोड़ रुपए का माल रोज सप्लाई होता है। अलग-अलग इंडस्ट्री से रोज ऑटो कंपोनेंट, रबड़ और गारमेंट का माल सप्लाई किया जाता है। वे बताते हैं कि सुबह 10 बजे जब उन्होंने फार्म जनरेट करने के लिए ई-वे बिल की साइट खोली तो वह नहीं खुली। काफी देर तक परेशान रहने के बाद उन्होंने दूसरे उद्यमियों से इसके बारे में जानकारी मांगी तो पता लगा साइट क्रैश हो गई। उद्यमी रविभूषण ने बताया कि वह जयपुर के जेसीबी प्लांट में रोज दो से तीन लाख रुपए का माल सप्लाई करते हैं। लेकिन साइट क्रैश होने से वह माल नहीं भेज सके। एमएएफ के महासचिव रमणीक प्रभाकर के अनुसार इस बिल को उद्यमियों के लिए सुविधा के लिए शुरू किया गया था। लेकिन पहले दिन ही यह परेशानी का सबब बन गया।

माल न जाने के बावजूद ट्रांसपोर्टरों को अपनी जेब से पैसा चुकाना पड़ा

फरीदाबाद आयरन एंड स्टील ट्रेडर्स के सचिव अरुण गुप्ता के अनुसार सुबह 10 बजे ई-वे बिल की साइट क्रैश हो गई। इससे लोहा मंडी का 10 करोड़ का 1500 टन माल अटक गया। वहीं माल न जाने के बावजूद ट्रांसपोर्टरों को अपनी जेब से पैसा चुकाना पड़ा। इस बारे में सेल्स टैक्स आफिस में शिकायत की गई थी। जवाब मिला कि मुख्यालय को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। जिलास्तर पर इसका कोई समाधान नहीं हो सकता।

क्या है ई-वे बिल

यह एक टोकन है, जो माल की आवाजाही के लिए ऑनलाइन जनरेट किया जा सकता है। यह देशभर में वैलिड होगा। कोई भी माल भेजने वाला व प्राप्त करने वाला और ट्रांसपोर्टर इसे जनरेट कर सकता है। ट्रैकिंग के लिए यूनिक ई-वे बिल नंबर और क्यूआर कोड मिलेगा। अगर ट्रांसपोर्टर के पास प्रिंटेड कॉपी नहीं है तो एसएमएस भी मान्य होगा। सामान्य व्यक्ति भी 50 हजार रुपए से अधिक का माल प्रदेश से बाहर भेजता है या मंगवाता है तो वह भी ई-वे बिल काट सकता है। इसके लिए उसे ई-वे बिल की वेबसाइट पर जाकर पैन नंबर से खुद को पंजीकृत करना होगा।

50 हजार के ऊपर बिल पर होगा लागू

50 हजार रुपए से ऊपर के बिल पर ही ई-वे बिल लागू होगा। इस बिल की वैधता दूरी के हिसाब से तय होगी। इसमें माल पर लगने वाले जीएसटी की पूरी जानकारी होगी। ई-वे बिल से पता लगेगा कि सामान का जीएसटी चुकाया गया है या नहीं। एक बार बिल कटने पर सारा सामान जीएसटी के अंतर्गत आ जाएगा। हालांकि 24 घंटे में बिल को कैंसिल किया जा सकता है, लेकिन अगर सेल्स टैक्स विभाग इंस्पेक्टर ने माल को चेक कर लिया तो बिल कैंसिल नहीं होगा।

ये रहेगी ई-वे बिल की वैधता
100 किमी की दूरी के लिए ई-वे बिल की वैधता एक दिन की होगी, जबकि 200 किमी दूर सामान भेजने के लिए बनाया गया ई-वे बिल 2 दिन तक वैध होगा। इसी तरह 300 किमी की दूरी के लिए ई-वे बिल की वैधता 3 दिन की होगी और 1000 किमी की दूरी के लिए ई-वे बिल की वैधता 10 दिन की होगी। इसी तरह प्रतिदिन के हिसाब से हर 100 किलोमीटर पर बिल की वैधता बढ़ती जाएगी।

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Web Title: alga-alga indstreal sektr ka 70 karoड़ ru. ka maal atka, khड़e rahe 600 trk
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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