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शिक्षा विभाग की चेतावनी : बंद नहीं किए स्कूल तो होगी सख्त कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की शिकायत पुलिस शिक्षा विभाग के जिला स्तर के अधिकारियों से कर दी है।

bhaskar news | Last Modified - Dec 28, 2017, 08:12 AM IST

  • शिक्षा विभाग की चेतावनी : बंद नहीं किए स्कूल तो होगी सख्त कार्रवाई

    पलवल.निजी स्कूल संचालक सरकार के आदेशों की अनदेखी करने से बाज नहीं रहे है। ऐसा ही एक मामला बुधवार को हथीन उपमंडल के अंधरोला गांव के निकट चल रहे एक निजी स्कूल में देखने को मिला। स्कूल खुला होने की सूचना पर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ स्कूल संचालक द्वारा दुर्व्यवहार किया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की शिकायत पुलिस शिक्षा विभाग के जिला स्तर के अधिकारियों से कर दी है।

    प्रदेश सरकार ने प्रदेश में सरकारी गैर-सरकारी स्कूलों को आठ जनवरी तक बंद करने के आदेश दिए हुए हैं, लेकिन जिले के अनेक निजी स्कूल सरकार के आदेशों को धता बताकर खोले हुए हैं। ऐसा ही मामला बुधवार को अंधरोला गांव के समीप बने एक गैर-सरकारी स्कूल में देखने को मिला। खंड शिक्षा अधिकारी सगीर अहमद खंड समन्वयक अख्तर हुसैन जब स्कूल में जांच करने के लिए पहुंचे। बताया गया है कि वहां पर स्कूल संचालक से जब स्कूल की मान्यता दिखाने के लिए कहा गया तो वह बिफर गए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्कूल संचालक से सरकार के आदेशों की बात की तो वह अधिकारियों के साथ उलझ गए। आरोप है कि स्कूल संचालक ने अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार भी किया तथा देख लेने की धमकी तक दे डाली।

    स्कूल संचालक की कार्यशैली को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले में पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने की शिकायत कर दी है। इसके अलावा शिक्षा विभाग जिले के आलाधिकारियों को लिखित में शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई के लिए कहा गया है। हथीन के खंड शिक्षा अधिकारी सगीर अहमद ने बताया कि कोई भी स्कूल सरकार के आदेशों के विपरीत खुला मिला तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। इसलिए सभी स्कूल संचालकों से उन्होंने अपील करते हुए कहा कि वे सरकारी आदेशों पर अमल करें।


    अधिकारियों ने मामले की शिकायत पुलिस शिक्षा विभाग के अफसर से की

    सर्दियों में 26 डिग्री तापमान है। सुबह 8 बजे से ही धूप निकल आती है। ऐसे में किस वजह से 8 जनवरी तक अवकाश घोषित किया गया है यह समझ से परे है। -एसएस गोसाई, अध्यक्ष, हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन।

    बुधवार को दोबारा से रिमाइंडर भेजकर स्कूल बंद करने का आदेश दिया गया है। वहीं कई स्कूलों को शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जाकर बंद भी कराया है। अगर किसी भी स्कूल के खुलने की जानकारी मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -सतेंद्र कौर, जिला शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद।

    जिला स्तर पर होना चाहिए कमेटी का गठन
    सरकारके आदेश के बाद उपजे विवाद के बाद सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी डीसी चौधरी का कहना है कि जिले में एक कमेटी का गठन होना चाहिए। इसमें डीसी, डीईओ, सीएमओ स्कूल एसोसिएशन का सदस्य शामिल होना चाहिए। जिले में मौसम की स्थिति को देख कमेटी काे निर्णय लेना चाहिए कि किस समय स्कूलों में अवकाश घोषित करना है। यह एक आदर्श स्थिति हो सकती है।

    स्कूल खुला तो दर्ज कराई जाएगी एफआईआर
    छुटि्टयोंको लेकर जिला प्रशासन भी सख्त है। डीसी अतुल कुमार ने कहा है कि 25 दिसंबर से 8 जनवरी तक स्कूल बंद रखने के बारे में जारी आदेश की पालना जिले में सख्ती से कराई जाएगी। इस दौरान जिले में जो भी स्कूल खुला पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा उक्त अवधि के दौरान यदि जिले में कोई भी स्कूल खुला मिला तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में किसी प्रकार की ढील नहीं की जाएगी।

    अभिभावक एकता मंच : भ्रम फैला रहे हैं निजी स्कूल
    सरकारके इस आदेश को लेकर अभिभावक एकता मंच का कहना है कि स्कूल भ्रम फैला रहे हैं। बुधवार को स्टूडेंट्स को तो वापस भेज दिया गया, लेकिन शिक्षकों को फ्री नहीं किया गया। अभिभावक एकता मंच के संयोजक कैलाश शर्मा के अनुसार स्कूल शिक्षकों को जान बूझकर परेशान कर रहे है। जब सरकार से स्कूलों को पूरी तरह से बंद करने का आदेश दिया है तो उन्हें शिक्षकों को भी फ्री करना चाहिए। वहीं स्कूल पूरे साल में बेवजह की इतने अवकाश करते हैं, जिन्हें बंद कर सिलेबस पूरा कराया जा सकता है। जो स्कूल सरकार के आदेश का पालन नहीं कर रहे उन पर डीसी को कार्रवाई करनी चाहिए।

    शिक्षा मंत्री से कहा 10 साल में सबसे अधिक है तापमान
    आदेशसे नाराज निजी स्कूल एसोसिएशन ने शिक्षामंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि पिछले 10 साल में इस बार सबसे अधिक तापमान है। सुबह नौ बजे से ही चटक धूप निकल आती है। ऐसे में सर्दियों की छुटि्टयों का आदेश उनकी समझ से परे हैं। एसोसिएशन ने कहा साल की शुरुआत में ही सभी स्कूल पूरी प्लानिंग तय कर लेते हैं। पूरे साल प्लानिंग के हिसाब से स्कूलों को चलाया जाता है। एेसे में सरकार की ओर से अचानक जारी होने वाले इस तरह के आदेश का पालन करना मुश्किल हो जाता है। कई स्कूलों में 26 दिसंबर से इंटरनल परीक्षाएं भी आरंभ हो गईं। स्कूलों का कहना है कि बेवजह की छुटि्टयों के कारण स्टूडेंट्स का सिलेबस अधूरा रह जाता है। इसका प्रभाव उनकी परीक्षाओं पर पड़ता है।

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Web Title: Education Department Warning
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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