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रीडिंग 0, बिल 1132 रु. का, लास्ट डेट थी 5, मिला 14 को

बिजली निगम की उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की बैठक शुक्रवार को सेक्टर-23 स्थित बिजली दफ्तर में हुई।

Danik Bhaskar | Dec 23, 2017, 07:48 AM IST

फरीदाबाद। बिजली निगम की उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की बैठक शुक्रवार को सेक्टर-23 स्थित बिजली दफ्तर में हुई। इसमें सबसे अधिक शिकायतें बिलिंग से संबंधित आई। इसमें एक मामला सामने आया कि इसमें एक उपभोक्ता को जीरो रीडिंग का बिल 1132 बनाकर भेज दिया। यही नहीं बिल में लास्ट डेट 5 दिसंबर की थी।


जबकि उसे बिल 14 दिसंबर को मिला। जब वह इसे लेकर निगम अधिकारियों के पास पहुंचा तो उन्होंने पेनाल्टी के साथ बिल जमा कराने के लिए कह दिया। शिकायतकर्ता ने जब बैठक में अपनी शिकायत रखी तो वहां भी उसकी सुनवाई नहीं हुई।

नहींहुई शिकायत की सुनवाई
संजयकालोनी से आए हरिदत्त शर्मा ने कहा कि उनके पास बिजली निगम की ओर से जीरो यूनिट का 1132 रुपए बिल बनाकर भेजा गया है। जब उन्हें बिल मिला उस पर लास्ट डेट पांच दिसंबर थी। जबकि उन्हें यह बिल 14 दिसंबर को मिला है। अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की तो हरिदत्त शुक्रवार को फोरम की बैठक में पहुंचे। यहां भी अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की। उन्हें एक फार्म भरकर देने को कहा और अगली मीटिंग में आने को कहा। कंज्यूमर ने कहा कि बिजली निगम में कहीं कोई सुनवाई नहीं है।

बिनारीडिंग लिए उपभोक्ताओं को भेज दिया बिल
इसीतरह एक अन्य उपभोक्ता ने बताया कि मेरे मीटर में कम रीडिंग थी। जबकि उन्हें गलत रीिडंग के हिसाब से बिल दिया गया। अधिकारियों से शिकायत करने पर कहीं सुनवाई नहीं होती है। इसी तरह एनआईटी दो निवासी तनुज गुप्ता ने अपनी समस्या में कहा कि अगस्त माह में विभाग ने मुझे करीब 70 हजार रुपए का बिल भेज दिया। इसे अधिकारी ठीक नहीं कर रहे। चेयरमैन ने शिकायत सुनने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इसमें सुधार करने के निर्देश दिए।

चेयरमैन ने सुनी शिकायतें
फोरमके चेयरमैन केडी बंसल की अध्यक्षता में उपभोक्ता की शिकायतें सुनवाई हुई। इसमें आठ शिकायतें आईं। सभी गलत बिलिंग से संबंधित थीं। इनमें से चार शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। इसके अलावा बाकी शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर उन्हें अगली डेट दे दी गई।

जो उपभोक्ता मीटिंग में आए, उनकी कंप्लेंट ले ली गई
सीजीआरएफमें सुनवाई के लिए उपभोक्ता को कप्लेंट का रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसे संबंधित एसडीओ को भेजकर सॉल्व कराने के बारे में कहा जाता है। फिर मीटिंग में उपभोक्ता निगम के अधिकारी को बुलाया जाता है। जो उपभोक्ता मीटिंग में आए, उनकी कंप्लेंट ले ली गई हैं। उनके समाधान के लिए भी संबंधित अधिकारियों से कहा गया है। -केडीबंसल, चेयरमैन, उपभोक्ता फोरम।
फरीदाबाद. बिजलीका बिल दिखाते हरिदत्त।