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कभी खुद थे पीड़ित, अब दर्द बांटने के लिए पतियों की अावाज उठा रहा पुरुष आयोग

इस घटना ने सभी काे झकझोर दिया। अात्महत्या का कारण ससुराल पक्ष द्वारा उसे परेशान किया जाना था।

Danik Bhaskar | Jan 28, 2018, 05:34 AM IST

फरीदाबाद. कुछ दिन पहले पंजाब में एक व्यक्ति ने फेसबुक पर लाइव होकर सुसाइड कर लिया। इस घटना ने सभी काे झकझोर दिया। अात्महत्या का कारण ससुराल पक्ष द्वारा उसे परेशान किया जाना था। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार पूरे देश में महिलाओं से दोगुने से ज्यादा पुरुष खुदकुशी कर रहे हैं। इनमें पतियों की संख्या सबसे अधिक है। इस तरह के मामलों को देखते हुए फरीदाबाद के एक शख्स ने पुरुष आयोग के नाम से ग्रुप बनाया है। खुद थे पीड़ित, दर्द बांटने के लिए बनाया ग्रुप ...

- पतियों के हक की मांग कर रहे हैं फरीदाबाद की डबुआ कॉलोनी में रहने वाले नरेश मेहंदीरत्ता। ये खुद भी एक पीड़ित पति है।

- शादी के 17 साल बाद इनकी पत्नी ने इन पर दहेज का केस दर्ज करा दिया। पहली बार मामला शार्ट आउट हो गया। दोबारा से फिर वही केस दर्ज हो गया। वे इस केस में पुलिस कस्टडी में भी रहे।

- समाज के लोगों ने बहिष्कार कर दिया। रिश्तेदारों ने रिश्ता ही तोड़ दिया। नरेश के दो बच्चे हैं, जो उन्हीं के साथ रहते हैं। पत्नी अलग रहती है।

- नरेश ने कहा कि एक मोड़ पर ऐसा लगा कि अब जिंदगी खत्म कर दूं। लेकिन फिर उन्हें यह ख्याल आया कि उनके जैसे और भी कितने पुरुष होंगे, जो इस दर्द और शर्मिंदगी से जूझ रहे होंगे। जबकि इसमें उनकी गलती कुछ नहीं है।

- ऐसे ही पीड़ित पतियों का दर्द बांटने व उनके अधिकारी की मांग को लेकर उन्होंने पुरुष आयोग के नाम से एक ग्रुप बनाया।

- इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 600 पीड़ित पति जुड़े हुए हैं जो अलग-अलग फील्ड से है।

डिप्रेशन में आकर पति न करें आत्महत्या, इसलिए आयोग के सदस्य करते हैं काउंसलिंग

- यह ग्रुप पीड़ित पतियों की काउंसलिंग करता है। ताकि वह आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं। इसके अलावा यह ग्रुप सरकार से महिला आयोग की तर्ज पर पुरुष आयोग, महिला थाने की तरह पुरुष थाने, पति परिवार काउंटर बनाने की मांग कर रहा है। इसके अलावा सरकार से पतियों को भी हक व अधिकार देने की मांग कर रहा है।

- नरेश ने कहा कि हमारे संविधान में महिलाओं के हक व अधिकार के लिए बहुत कानून है और वे होने चाहिए। खासतौर पर बहू के लिए। जबकि पति के लिए कोई कानून नहीं है। पत्नी जब चाहे उन पर दहेज का मुकदमा लगवा सकती है।

- अलगाव या टकराव की वजह कुछ भी हो, लेकिन पति पर सीधा केस दर्ज होता है दहेज प्रताड़ना का और उसमें लपेट लिए जाते हैं सास, ननद, जेठ, जेठानी सब।

- नरेश ने कहा कि ऐसा नहीं है सभी मामले में पुरुष दोषी नहीं होते। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हर मामले में पति ही दोषी हो। लेकिन एक बार केस लगने के बाद उसके पास खुद को बेगुनाह साबित करने का कोई प्रूफ नहीं होता।

- उसका सामाजिक बहिष्कार हो जाता है। लोग उसे हेय दृष्टि से देखने लगते हैं। ऐसे में कई बार वह डिप्रेशन में आकर अपनी जान दे देता है।


पुरुषों की सुनवाई के लिए होना चाहिए सिस्टम
- बार काउंसिल पंजाब एंड हरियाणा अनुशासन व निगरानी समिति के सदस्य एडवोकेट शिवदत्त वशिष्ठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में पुलिस को भी गंभीरता व बारीकी से जांच करनी चाहिए।

-एक बार केस होने के बाद व्यक्ति का सामाजिक व पारिवारिक बहिष्कार हो जाता है। जबकि कई मामले झूठे होते हैं। महिलाओं की तरह इस तरह के केस में पुरुषों की सुनवाई के लिए भी अलग सिस्टम होना चाहिए। जहां वे अपनी बात रख सकें।