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भारत में ‘पानी’ से चलने वाली पहली बस हुई शुरू, पानी से ऐसे बनता है ईंधन

रिसर्च में पेट्रोल-डीजल से दोगुना खर्च, बाद में ईंधन हो सकता है सस्ता

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 07:06 AM IST

फरीदाबाद. डीजल की जगह पानी से चलने वाली बस का शुरूआत हो चुकी और उसका ट्रायल भी होने लगा है। बता दें कि देश में वैज्ञानिकों ने हाईड्रोजन से चलने वाली पहली बस तैयार कर ली है। इसके लांग ट्रायल्स की भी शुरुआत हो चुकी है। इसे फरीदाबाद स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के अनुसंधान एवं विकास केंद्र में विकसित किया गया है। पहले चलाया जाएगा यहां...


- आईओसी के मुताबिक, अब करीब दो साल तक इसके लंबी अवधि के ट्रायल किए जाएंगे ताकि इसकी ड्यूरेबिलिटी और एफिशिएंसी का आकलन किया जा सके। इसके बाद सफलता के आधार पर इसकी कमर्शियल दिशा तय होगी।

- ट्रायल के दौरान इसे फरीदाबाद में सेक्टर 13 स्थित सेंटर से दिल्ली में द्वारका स्थित आईओसी के अन्य केंद्र तक चलाया जाएगा। यह दूरी करीब 52 किलोमीटर है।

- आईओसी के दोनों ही केंद्रों पर हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन बने हुए हैं।

- इस हाइड्रोजन फ्यूल बस को तैयार करने में टाटा मोटर्स के अलावा डिपार्टमेंट ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (डीएसआईआर) और मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) का भी आंशिक आर्थिक सहयोग रहा है।

पानी से ऐसे बनता है ईंधन

- वैज्ञानिकों के मुताबिक पानी दो एटम हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना होता है। वैज्ञानिक लैब में ‘इलेक्ट्रो लाइसिस’ तकनीक से दोनों को अलग कर देते हैं।

- इसके बाद हाइड्रोजन को सिलेंडर में स्टो‍र कर लिया जाता है। फिर हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन से इन सिलेंडरों के जरिए हाइड्रोजन को बस में डाला जाता है।

2005 में प्रोजेक्ट की शुरुआत

- केंद्र सरकार ने 2005 में प्रोजेक्ट शुरू किया था। इंडियन ऑयल रिसर्च सेंटर को नोडल एजेंसी बनाया गया था। तब सीएनजी में 2% हाइड्रोजन मिलाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे हाईड्रोजन की मात्रा 100% पर ले गए।

इस ईंधन तकनीक में केवल पानी एग्जॉस्ट होगा। इंडियन ऑयल के हाइड्रोजन आपूर्ति केंद्र में ऐसे वाहनों को ट्रॉयल में रखा गया है। इसकी फ्यूल सेल तकनीक के टिकाऊ और सक्षम होने का ट्रायल से पता चलेगा। -अशोक जाम्बर, मुख्य महाप्रबंधक, आईओसी रिसर्च सेंटर, फरीदाबाद