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प्रदेश के हिस्से में रहा महज 23%, सरकार को 60% रिवेन्यू का नुकसान

इंटर स्टेट कारोबार अधिक होने से दूसरे प्रदेशों को जाता है ज्यादा टैक्स।

उमाशंकर। | Last Modified - Dec 20, 2017, 07:44 AM IST

  • प्रदेश के हिस्से में रहा महज 23%, सरकार को 60% रिवेन्यू का नुकसान

    गुड़गांव.गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लेकर एक ओर जहां आम लोग और व्यापारियों में नाराजगी है, वहीं प्रदेश सरकार की तिजोरी पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। एक जुलाई को लागू होने के बाद से जीएसटी के तहत प्रदेश में अबतक 20464 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ। एसजीएसटी के एवज में प्रदेश सरकार के हिस्से में केवल 4780 करोड़ रुपए रहा है, जोकि कुल कलेक्शन का महज 23.35 फीसदी है। पिछले वर्ष की तुलना में यह 60 फीसदी कम है।

    - यह प्रदेश सरकार के लिए खतरे की घंटी है। दूसरी तरफ, कुल कलेक्शन में से सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स (सीजीएसटी), इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स (आईजीएसटी) और सेस के तौर पर जमा हुई 76.65 फीसदी राशि शुरुआत में केंद्र सरकार की तिजोरी में जा रही है। आईजीएसटी में से अपना हिस्सा वापस लेने के लिए प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार से जिद करनी होगी।

    सरकार के लिए खतरे की घंटी
    - हरियाणा में इंट्रा स्टेट की तुलना में इंटर स्टेट कारोबार अधिक हो रहा है। इससे प्रदेश में कलेक्शन का आधे से अधिक टैक्स अन्य प्रदेशों में जाता है। कुल कलेक्शन में सरकार की हिस्सेदारी केवल 23.35 फीसदी हो रही है। हरियाणा सरकार के लिए यह शुभ संकेत नहीं हैं।

    - हरियाणा सरकार को गत वित्त वर्ष वैट के एवज में कुल 29 हजार करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। इस आधार पर पांच महीनों में कम से कम 12083 रुपए का कलेक्शन होना चाहिए था। मगर, जीएसटी लागू होने के बाद, बीते पांच महीनों में प्रदेश सरकार को महज 4780 करोड़ रुपए हाथ लगे हैं, जोकि पिछले वर्ष पांच महीनों की वसूली से 60 फीसदी कम है।


    जीएसटी में अकेले गुड़गांव की आधी हिस्सेदारी
    - प्रदेश में जीएसटी के तहत 50 फीसदी कलेक्शन अकेले गुड़गांव से हो रही है। बीते 5 महीनों में गुड़गांव से कुल 10261.77 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ है। इसलिए जीएसटी वसूली में प्रदेश और केंद्र सरकार की नजर औद्योगिक नगरी गुड़गांव पर टिकी है। फरीदाबाद से कुल 2052.11 करोड़ रुपए की रिकवरी हुई है, जोकि कुल का 10 फीसदी है।

    केंद्र के हिस्से में 14.6 फीसदी, 7 फीसदी सेस
    सीजीएसटीके एवज में अब तक महज 2996 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जो कुल कलेक्शन का 14.6 फीसदी है। इस राशि पर पूरी तरह से केंद्र सरकार का हक होगा। 5 महीनों में सेस के एवज में 1454 करोड़ रुपए की वसूली हुई है, जो कुल कलेक्शन का 7 फीसदी है। यह राशि भी केंद्र सरकार की तिजोरी में जाएगी।

    अन्य प्रदेशों में जा रही 55 फीसदी
    जीएसटीलागू होने के बाद से अबतक पांच महीनों में प्रदेश में कुल 20464 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ है। इसमें से सबसे अधिक आईजीएसटी के मद में 1123.46 करोड़ रुपए जमा हुए हैं, जोकि कुल कलेक्शन का 55 फीसदी है। इस मद में प्राप्त राशि उन प्रदेशों के हिस्से में जाएगी, जिन प्रदेशों में माल की खपत हो रही है। इसमें हरियाणा की हिस्सेदारी मुश्किल से 225 करोड़ रुपए होगी।


    जीएसटी में शामिल किए जाने के बाद भी राजस्व में क्यों कमी रही है?
    जवाब-जीएसटी उपभोक्ताआधारित टैक्स है। हरियाणा उत्पादक प्रदेश है, यहां उपभोक्ता अपेक्षाकृत कम हैं। इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ रहा है। गुड़गांव उपभोक्ताओं का शहर है, इसलिए यहां राजस्व अधिक मिल रहा है। सरकार को गुड़गांव पर विशेष ध्यान देना पड़ेगा।

    आईजीएसटी को कैसे समझें?
    जवाब-हरियाणा मेंइंट्रा स्टेट की तुलना में इंटर स्टेट कारोबार अधिक हो रहा है। गुड़गांव से दूसरे प्रदेश में जा रहे माल पर आईजीएसटी लग रहा है। इस पर खपत करने वाला प्रदेश और केंद्र सरकार का अधिकार है। उत्पादक प्रदेश को इसका लाभ नहीं मिलेगा।

    सर्विस सेंटर की कितनी भागीदारी है?
    जवाब-प्रदेश मेंसबसे बड़ा सर्विस सेक्टर शहर गुड़गांव है। इस सेक्टर को भी जीएसटी में शामिल किया गया है। सर्विस सेक्टर के कारण ही गुड़गांव के राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। इस सेक्टर को बढ़ावा देने की जरूरत है।

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Web Title: Only 23% In The State Part, The Government Lost 60% Of The Revenues
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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