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रैन बसेरा मेंं परिवार सा माहौल है, सर्द रात में सहारा बने बाबा

सर्द रात में हाइवे की साइड, पुल के नीचे, ग्रीन बेल्ट व झुग्गियों में अक्सर ठंड से कंपकंपाते लोग सभी को दिखते हैं।

अनीता भाटी | Last Modified - Dec 04, 2017, 07:15 AM IST

रैन बसेरा मेंं परिवार सा माहौल है, सर्द रात में सहारा बने बाबा

फरीदाबाद.सर्द रात में हाइवे की साइड, पुल के नीचे, ग्रीन बेल्ट व झुग्गियों में अक्सर ठंड से कंपकंपाते लोग सभी को दिखते हैं। अफसोस जताने के सिवाय बहुत कम हाथ इनकी मदद के लिए उठते हैं। लेकिन इंसानियत की हिफाजत करने वाले लोग कम ही सही लेकिन अभी हैं। ठिठुरती रात में जब लोग घरों से बाहर निकलना पसंद नहीं करते। ऐसी स्थिति में फरीदाबाद के 70 वर्षीय बुजुर्ग कंबल ओढ़े 200 बेसहारा, अनाथ, जरूरतमंद, विक्षिप्त लोगों को ठंड व भूख से बचाने की कोशिश में जुटे रहते हैं। इनका नाम हैं मुकेश गिरी महाराज। इनके जज्बे को देखकर लाेग हैरान रहते हैं। बिना किसी मदद के ये खुद रैनबसेरा चलाते हैं। यहां रोज 200 से अधिक लोग ठहरते हैं। मुकेश खुद रात में चूल्हे पर सभी के लिए खाना बनवाते। फिर सभी को खाना परोसते हैं।

7 साल पहले इंसानियत को कांपते देख शुरू की सेवा
महंत मुकेश गिरी महाराज 11 साल पहले गाजियाबाद से घूमते-घूमते फरीदाबाद आए थे। रेलवे स्टेशन से बाहर निकले तो ठंड की रात में कुछ लोग फटी-पुरानी गंदी चादरों में खुद को सर्दी से बचाने की कोशिश करते दिख रहे थे। कुछ पेट भरने के लिए भीख मांग रहे थे। यह देखकर उन्हें बुरा लगा। वापस लौटने की बजाय यही ठहरने का निर्णय लिया। रेलवे स्टेशन के पास एक छोटा सा मंदिर बनाया। मंदिर में रात को जो भी आता। वह उसके रुकने का इंतजाम करते। जब लोग ज्यादा आने लगे तो उन्होंने एक छोटी सी धर्मशाला बनवाई।

राेज बदलता है खाने का मैन्यू
रैन बसेरे में रुकने वाले के लिए रात को खाना व सुबह चाय-नाश्ता का बंदोबस्त होता है। खाने का मैन्यू रोज बदलता है। कभी दाल रोटी बनती है तो कभी पूड़ी सब्जी। बाबा की निगरानी में रोज खाना तैयार किया जाता है। पहले वो खाना चखते हैं। इसके बाद रैन बसेरे में आने वाले लोगों को खाना परोसा जाता है। बाबा खुद उन लोगों के साथ बैठकर खाना खाते हैं। रात को साेने से पहले सभी को अध्यात्मिक किस्से सुनाते हैं। लोगों को आत्मनिर्भर बनने व व्यसनों से दूर रहने के प्रति भी जागरूक करते हैं।


लोग रहते हैं कुटुंब की तरह
यहां सरकारी रैन बसेरों जैसा सिस्टम नहीं है। सभी एक-दूसरे के नाम को जानते हैं। खेलते हैं, बात करते हैं। यहां के सिस्टम को देखने के लिए खुद उद्योग मंत्री विपुल गोयल भी पहुंचे थे। उन्होंने रैन बसेरे की व्यवस्था का जायजा लेने के बाद यहां की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए थे। महंत मुकेश गिरी ने कहा कि कोई भूखे पेट सर्द रात में खुले आसमान के नीचे सोने को न मजबूर हो। इसलिए उन्होंने यहां अपने स्तर पर इसकी शुरुआत की।

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Web Title: rain bseraa meinn parivaar saa maahaul hai, srd raat mein shaaraa bane baba
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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