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आम बजट से इंडस्ट्री को झटका, नहीं मिली मदर यूनिट, कारपोरेट टैक्स में छूट मिलने के बाद भी राहत नहीं

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:00 AM IST

नाेटबंदी और जीएसटी के बाद आम बजट से जिले की इंडस्ट्री को राहत की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन कोई बड़ी घोषणा न होने से...
नाेटबंदी और जीएसटी के बाद आम बजट से जिले की इंडस्ट्री को राहत की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन कोई बड़ी घोषणा न होने से इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है। लंबे समय से इंडस्ट्री की मदर यूनिट की मांग इस बार भी पूरी नहीं हुई है। इसके अलावा कारपोरेट टैक्स में पांच प्रतिशत की छूट मिलने के बावजूद उद्यमियों को कोई राहत नहीं मिली। कारपोरेट टैक्स में छूट पाने के लिए इंडस्ट्री का टर्नओवर 50 से 250 करोड़ तक का होना चाहिए, जबकि औद्योगिक संगठनों के अनुसार 90 प्रतिशत इंडस्ट्री ऐसी हैं जिनका टर्नओवर 30 करोड़ से अधिक नहीं है। इससे जिले के उद्यमी इस छूट का लाभ नहीं ले पाएंगे।

फरीदाबाद इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुसार जिले में 24 हजार इंडस्ट्री हैं। इनमें से करीब 18 हजार इंडस्ट्री ऑटो कंपोनेंट, टेक्सटाइल और रबड़ का काम करती है। इंडस्ट्री से प्रदेश सरकार को सालाना तीन हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। माइक्रो स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज आफ इंडिया के चेयरमैन राजीव चावला के अनुसार नोटबंदी और जीएसटी का सबसे अधिक असर जिले की छोटी इंडस्ट्री पर पड़ा था। इन इंडस्ट्रियों पर सबसे अधिक मार 30 प्रतिशत कारपोरेट टैक्स की है। उद्यमियों को उम्मीद थी कि आम बजट में कारपोरेट टैक्स में छूट देने का नियम सभी इंडस्ट्री पर लागू होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे कारोबारियों को निराशा हाथ लगी है। एसोसिएशन के रिकार्ड के अनुसार जिले की करीब तीन हजार इंडस्ट्री का टर्नओवर 20 करोड़ से अधिक नहीं है। बाकी के टर्नओवर में 25 से 30 करोड़ के बीच है। ऐसे में छूट की घोषणा से भी कोई लाभ नहीं हुआ। एमएएफ के महासचिव रमणीक प्रभाकर के अनुसार जिले की कई यूनिटों में केवल 5 से 10 लोग ही काम करते हैं। ऐसे में उनका टर्नओवर तो 3 से 4 करोड़ के बीच में ही होता है। कारपोरेट टैक्स में छूट का लाभ ये यूनिट नहीं उठा पाएंगी। इसके अलावा छोटे उद्यमियों को राहत देने के लिए कोई विशेष घोषणा नहीं की गई। सेक्टर-37 डीएलएफ इंडस्ट्री के प्रधान जेपी मल्होत्रा के अनुसार नोटबंदी और जीएसटी से सबसे बड़ा झटका टेक्सटाइल यूनिटों को लगा था। जिले में तीन हजार के हजार के करीब टेक्सटाइल यूनिट हैं।

फरीदाबाद. बजट को लेकर मीटिंग करते उद्यमी।

फाइल फैक्ट

औद्योगिक इकाइयां : 24 हजार

ऑटो कंपोनेंट यूनिट : 16 हजार

टेक्सटाइल यूनिट : 3 हजार

रबड़ यूनिट : 3 हजार

सरकार को राजस्व : 3000 करोड़

साझेदारी में मिलकर खड़ा करते हैं कारोबार

लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष रविभूषण के अनुसार साझेदारी में काम करने वाली इंडस्ट्री को कारपोरेट टैक्स में छूट का लाभ नहीं मिलेगा। पांच प्रतिशत छूट केवल उन्हीं उद्यमियों को दी जाएगी जिनकी खुद की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी होगी, जबकि जिले की अधिकतर इंडस्ट्री साझेदारी में खुली हुई हैं। इनका टर्नओवर भी 50 करोड़ से अधिक होना चाहिए। ऐसे में इस शर्त को जिले का कोई गिना चुना उद्यमी ही पूरा कर पाएगा।

यात्री करते रहे इंतजार, नहीं बढ़ीं ट्रेनें, धक्के खाकर ही करना पड़ेगा सफर

फरीदाबाद| मोदी सरकार के अंतिम पूर्ण बजट में रेलयात्री ट्रेन बढ़ने का इंतजार करते रहे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पलवल-फरीदाबाद से दिल्ली तक सफर करने वाले एक लाख से अधिक दैनिक यात्रियों को रेलमंत्री ने निराश किया है। ऐसे में लोगों को धक्के खाकर ही सफर करना पड़ेगा। खास बात यह है कि साल दर साल फरीदाबाद सेक्शन में करीब 4500 से 5000 यात्री बढ़ रहे हैं, लेकिन ट्रेन और कोचों की संख्या जस की तस है। रेलवे से रिटायर्ड अधिकारी जहां रेलवे में सुधार करने पर जोर देने की बात कर रहे हैं, वहीं दैनिक यात्री संघ इसे निराशाजनक बता रहा है। फिलहाल दैनिक यात्रियों को सफर में कोई सुविधा नहीं मिलेगी।

बता दें फरीदाबाद स्टेशन पर लोकल और एक्सप्रेस समेत 107 ट्रेनों का स्टापेज है। फरीदाबाद से नई दिल्ली और पलवल तक एक लाख से अधिक यात्री रोज सफर करते हैं। इनमें कॉलेज-यूनिवर्सिटी गोइंग विद्यार्थी और नौकरीपेशा के लोग शामिल हैं। हालात ये हैं कि पीक आवर्स में दैनिक यात्रियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।

क्या कहते हैं पूर्व अधिकारी

रेलवे के रिटायर स्टेशन अधीक्षक डीडी सिंघल का कहना है कि यह सही है कि रेल बजट में यात्रियों को कुछ नहीं मिला, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा पर रेलवे जोर देगा। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद सेक्शन में पहले से ही ट्रेनों के परिचालन की व्यस्तता अधिक है। रेलवे को चाहिए कि वह क्वालिटी ऑफ सर्विस को मजबूत करे। खासकर पैंट्री कारों से मिलने वाला खाना, निर्धारित समय पर ट्रेनों का परिचालन तथा साफ सफाई।

क्या कहते हैं दैनिक यात्री संघ

रेल पैसेंजर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान प्रकाश मंगला और दैनिक यात्री महिला संघ की सचिव शांति आर्या ने इस बजट को दैनिक यात्रियों के साथ धोखा बताया। उनका कहना है कि साल दर साल 4500 से 5000 यात्री बढ़ रहे हैं, लेकिन चलने वाली ट्रेनों और उनके कोचों की संख्या जस की तस है। इस बजट में न कोई ट्रेन मिली और न किसी ट्रेन में कोच बढ़ाने का भरोसा।

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Web Title: आम बजट से इंडस्ट्री को झटका, नहीं मिली मदर यूनिट, कारपोरेट टैक्स में छूट मिलने के बाद भी राहत नहीं
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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