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जीएसटी के साथ हर साल उद्यमियों से 10 करोड़ की लाइसेंस फीस भी वसूली जा रही है

जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) लागू होने के बाद भी जिले के 23 हजार उद्योग डबल टैक्स की मार झेल रहे हैं। प्रति वर्ष...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:00 AM IST

जीएसटी के साथ हर साल उद्यमियों से 10 करोड़ की लाइसेंस फीस भी वसूली जा रही है
जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) लागू होने के बाद भी जिले के 23 हजार उद्योग डबल टैक्स की मार झेल रहे हैं। प्रति वर्ष औद्योगिक नगरी से जीएसटी के 5 से 7 हजार करोड़ रुपए जाने के बाद भी उद्योगों को हर साल निगम काे 10 करोड़ रुपए लाइसेंस फीस भी देनी पड़ रही है। निगम टर्नओवर के हिसाब से लाइसेंस फीस की वसूली करता है। ऐसे में डबल टैक्स की मार झेल रहे उद्यमियों ने राहत के लिए प्रदेश सरकार का दरवाजा खटखटाया है। इन्होंने निगमायुक्त को भी पत्र भेजा है।

छोटे कारोबारी हो रहे हैं सबसे अधिक प्रभावित

चार्टर्ड अकाउंटेंट नवनीत कुमार के मुताबिक जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश से सभी प्रकार के टैक्स खत्म हो गए हैं। इसलिए लाइसेंस फीस नहीं होनी चाहिए। उद्योग इनकम अधिक होने के कारण डबल टैक्स का बोझ झेल भी जाते हैं, लेकिन लाइसेंस फीस वसूलने से सबसे अधिक प्रभावित छोटे उद्योग हो रहे हैं। क्योंकि उन्हें कम इनकम में जीएसटी, लाइसेंस फीस और कर्मचारियों का वेतन भी मैनेज करना पड़ता है। नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद अधिकतर उद्योग अभी भी मंदी से नहीं उभर पाए हैं। एेसे में डबल टैक्स चुकाना काफी मुश्किल भरा है।

फरीदाबाद. सेक्टर 24 औद्योगिक क्षेत्र।

हर साल जीएसटी में औद्योगिक नगरी से जाते हैं 5 से 7 हजार करोड़ रुपए

केंद्र ने कहा था जीएसटी के बाद कोई टैक्स नहीं

औद्याेगिक संगठन के मुताबिक जीएसटी लागू होने के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दावा किया गया था कि उद्यमियों को जीएसटी के अलावा प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को किसी भी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ेगा। ऐसे में उद्यमियों ने भी राहत की सांस ली थी। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद निगम इंंडस्ट्री से लाइसेंस फीस भी ले रहा है।

सदन की बैठक में इंडस्ट्री की समस्या को उठाया गया था। प्रदेश सरकार को औद्योगिक नगरी से सबसे अधिक राजस्व जाता है। ऐसे में लाइसेंस फीस का बोझ नहीं डालना चाहिए। उम्मीद है जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा। - मनमोहन गर्ग, डिप्टी मेयर, नगर निगम।

टर्नओवर के हिसाब से वसूल की जाती है फीस

सालाना 50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले उद्योग से 20 हजार, 1 करोड़ रुपए तक के इनकम वाले से 25 हजार रुपए और एक से पांच करोड़ रुपए तक की इनकम वाले से 30 से 35 हजार रुपए लाइसेंस फीस वसूली जाती है। वहीं इन उद्योगों को जीएसटी भी देना पड़ रहा है।

लाइसेंस फीस न देने पर जुर्माना लगाता है निगम

नगर निगम की ओर से एक बार लाइसेंस फीस का नोटिस जारी होने के बाद उद्यमियों को मजबूरन भुगतान करना पड़ता है। अगर कोई उद्यमी 30 मार्च तक लाइसेंस फीस नहीं भरता है तो एक अप्रैल से डेढ़ प्रतिशत ब्याज लगना शुरू हो जाता है। वहीं लगातार दो साल की फीस भुगतान नहीं होने पर कोर्ट में चालान पेश कर दिया जाता है।

लघु उद्योग भारती की ओर लाइसेंस फीस हटाने को लेकर ज्ञापन दिया गया है। इस मामले में सदन की बैठक में भी रखा गया था। फीस हटाने को लेकर शहरी स्थानीय निकाय के उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। इसके बाद ही कोई निर्णय हो पाएगा। मोहम्मद शाइन, आयुक्त नगर निगम।

लघु उद्योग भारती ओर प्रदेश सरकार और निगम आयुक्त को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है। आयुक्त से मांग की है कि वह लाइसेंस फीस को लेकर मुख्यमंत्री के सामने उद्यमियों की समस्या रखें। जिससे उद्योगों को डबल टैक्स नहीं चुकाना पड़े। -रविभूषण खत्री, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती।

23000

कुल इंडस्ट्री

10

करोड़ रुपए

कुल लाइसेंस फीस

5

7

हजार करोड़ रुपए

जीएसटी से

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