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ब्लड कैंसर से गई पति की नौकरी, फिर भी नहीं मानी हार, खोला जॉब पोर्टल, कैंसर पीड़ित और उनके परिवार के सदस्यों को रोजगार दिलाती हैं कविता

दीपक पांडेय | फरीदाबाद deepak.kumar3@dhrsl.com कैंसर का नाम सुनते ही अधिकतर लोग जीने की हिम्मत ही छोड़ देते हैं, लेकिन सेक्टर-37...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:00 AM IST

ब्लड कैंसर से गई पति की नौकरी, फिर भी नहीं मानी हार, खोला जॉब पोर्टल, कैंसर पीड़ित और उनके परिवार के सदस्यों को रोजगार दिलाती हैं कविता
दीपक पांडेय | फरीदाबाद deepak.kumar3@dhrsl.com

कैंसर का नाम सुनते ही अधिकतर लोग जीने की हिम्मत ही छोड़ देते हैं, लेकिन सेक्टर-37 अशोका एंक्लेव में रहने वाली कविता और उनके पति अरुण गुप्ता ने न केवल कैंसर से जंग लड़ी, बल्कि उसके खाैफ पर जीत पाने के लिए लोगों को जागरुक करने की मुहिम शुरू की है। कविता की टीम कैंसर पीड़ित का इलाज, उनको या परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिलाने की काम करती है।

इसके अलावा वह कैंसर पीड़ित महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी देती है। जिससे महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हाे सकें। पिछले दो साल में कैंसर अवेयरनेस को लेकर कविता 500 वॉलंटियर तैयार कर चुकी हैं। तीन कैंसर पीड़ितों की नौकरी लगवा चुकी है। वहीं कविता ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित महिलाओं को प्रोस्थेटिक ब्रा भी निशुल्क देती हैं। यह कैंसर पीड़ित महिलाआें के शरीर का संतुलन बनाने का काम करती है।

2 साल में कैंसर अवेयरनेस को लेकर कविता 500 वॉलंटियर तैयार कर चुकी हैं

अशोका एंक्लेव में रहने वाली कविता और उनके पति अरुण ने न केवल कैंसर से जंग लड़ी, बल्कि लोगों को जागरुक करने की मुहिम शुरू की

7 साल पहले पति को हुआ था ब्लड कैंसर

कविता के पति अरुण गुप्ता मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर सीए के पद पर नियुक्त थे। वर्ष 2011 में अरुण को पता लगा कि उन्हें ब्लड कैंसर हो गया है। इलाज के लिए अरुण को अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब 3 साल तक लगातार इलाज चला। इस दौरान कैंसर से अरुण की नौकरी भी चली गई। नौकरी जाने के बाद परिवार को कई तरह की आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। ऐसी परिस्थिति में कविता ने निर्णय लिया कि वह कैंसर से पीड़ित लोगों की न सिर्फ इलाज में मदद करेगी, बल्कि उनको नौकरी दिलाने में भी सहयोग करेगी।

कैंसर पीड़ित महिलाओं को देती हैं स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग

हर बुधवार एम्स में प्रोस्थेटिक ब्रा मुफ्त में करती हैं वितरित

कविता ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं को हर बुधवार प्रोस्थेटिक ब्रा मुफ्त में वितरित करती हैं। यह ब्रा पीड़ित महिलाओं के शरीर का संतुलन बराबर करने का काम करती है। वही मार्केट में इस ब्रा की कीमत सात से 12 हजार रुपए है। बेटी आकृति बताती है कि पूरे परिवार ने कैंसर के खौफ को खत्म करने के लिए मुहिम शुरू की है। वह लोगों के भीतर इससे लड़ने को जज्बा पैदा करते हैं।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं

कविता ने दोस्तों के साथ मिल विन ओवर कैंसर संस्था बनाई। वहीं बेटी आकृति के साथ मिलकर जॉब पोर्टल तैयार किया। इसमें कैंसर पीड़ित या उनके परिवार वालों के बायोडाटा मांगे गए। वहीं कंपनियों से संपर्क कर उनसे वैकेंसी की जानकारी ली। पिछले दो साल में कविता की टीम तीन लोगों को नौकरी दिलवा चुकी है। इसके अलावा वह कैंसर पीड़ित महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी देती हैं। कविता के अनुसार अधिकतर मामलों में देखा जाता है कि कैंसर से पीड़ित होने के बाद अधिकतर महिलाएं अकेली हो जाती हैं। परिवार के लोग भी उनसे किनारा कर लेते हैं। स्किल डेवलपमेंट के कोर्स से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जाता है।

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Web Title: ब्लड कैंसर से गई पति की नौकरी, फिर भी नहीं मानी हार, खोला जॉब पोर्टल, कैंसर पीड़ित और उनके परिवार के सदस्यों को रोजगार दिलाती हैं कविता
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