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जरूरतमंद महिलाओं की हेल्थ सुधार रहीं शहर की 40 पैडवूमेंस

‘मेंस्ट्रुअल मैन’ अरुणाचलम मुरुगनाथम जिनकी लाइफ पर बनी फिल्म पैडमैन जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसके आने के बाद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:00 AM IST

‘मेंस्ट्रुअल मैन’ अरुणाचलम मुरुगनाथम जिनकी लाइफ पर बनी फिल्म पैडमैन जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसके आने के बाद अब समाज में उन दिनों यानि महिलाओं के पीरियड्स को लेकर खुलकर बात होने लगी है। अभी भी सेनेटरी नैपकिन के यूज और पीरियड्स को लेकर कई तरह की भ्रांतियां जुड़ी हुई है। जिन्हें दूर करने का काम कर रही है फरीदाबाद की 40 पैडवूमेंस। यह ग्रुप ऐसी जरूरतमंद महिलाओं की जिंदगी को सवार रहा है, जिन्होंने आज तक सेनेटरी नैपकिन के बारे में कभी सुना ही नहीं था। इनकी जगह वे गंदे कपड़े व अखबारों का प्रयोग करती थीं।

पहल

ग्रुप सेनेटरी नैपकिन के यूज को लेकर न केवल जागरूकता फैला रहा है, ग्रुप की सदस्य महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन के साथ अंडरगारमेंट्स भी मुफ्त देती हैं

फरीदाबाद. पैडवूमेंस की टीम बीके हॉस्पिटल में महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन वितरित करते हुए ।

ये लीड करती हैं पैडवूमेंस ग्रुप को

इस ग्रुप को मीनू भाटिया, अनुराधा भाटिया, नीलम कुकरेजा, रश्मि भाटिया, निर्मल भाटिया, रानी भाटिया, मलिका गांधी, रजनी बहल, बबिता भाटिया, रेखा रावत, आशा भाटिया, वानी भाटिया, चित्रा लीड करती हैं। इस ग्रुप को बन्नूवाल ग्रुप के दिनेश कपूर, दीपक भाटिया, अविनाश भाटिया, राधे शाम भाटिया, नरेश की टीम सहयोग करती है।

फीमेल हाइजीन को लेकर भी कर रहीं काम

यह पैडवूमेंस ग्रुप 40 महिलाओं का है। जो उमंग एक आशा…बन्नूवाल ग्रुप ने शुरू किया है। ये पैडवूमेंस मुश्किल दिनों में एेसी महिलाअों की परेशानी का हल निकाल रही है जिन्होंने आज तक कभी सेनेटरी नैपकिन के बारे में न सुना था न ही प्रयोग किया था। मुश्किल भरे दिनों में ये गंदे कपड़े व अखबारों का यूज करती थीं। इस ग्रुप को शुरू करने वाली मीनू भाटिया, अनुराधा भाटिया व नीलम कुकरेजा सेनेटरी नैपकिन के यूज को लेकर न केवल जागरूकता फैला रही है, बल्कि महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन के साथ अंडरगारमेंट्स भी मुफ्त देती है। मीनू व अनुराधा के मुताबिक आज तक महिलाआें को सशक्त बनाने को लेकर बहुत कदम उठाए गए हैं। लेकिन हाइजीन और खासतौर पर पीरियड्स अवेयरनेस को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया। जबकि इसे लेकर अभी भी लोगों में जागरूकता की कमी है। उन्होंने जगह-जगह जाकर ऐसी महिलाओं से बातचीत की। तब उन्हें पता चला कि उन्हें पहनने के लिए पूरे कपड़े मिलते नहीं तो सेनेटरी नैपकिन कहां से खरीदेंगी। इसलिए कचरे में या घर जो पुराना कपड़ा मिलता है उसे ही इस्तेमाल करती हैं। इसके बाद नवंबर 2017 पैडवूमेंस ग्रुप बनाया। इससे अब 40 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं।

डाेनेट कर यूज करना सिखाती हैं

अनुराधा ने बताया कि वे खुद यूट्रस कैंसर की पेशेंट रही है। फीमेल हाइजीन काे लेकर बहुत काम करने की जरूरत थी। ऐसे में 40 महिलाओं ने मिलकर पैडवूमेंस ग्रुप बनाया है। महिलाओं के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए सेनेटरी नैपकिन जरूरी है। सेनेटरी नैपकिन के अभाव में महिलाएं व लड़कियां संक्रमण का शिकार हो जाती है, जिससे कई गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। इसलिए यह ग्रुप महिलाओं व लड़कियों को नैपकिन और अंडर गारमेंट्स देती हैं।

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