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एशिया में 35 साल बाद दिखा सुपर ब्लू ब्लड मून

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:05 AM IST

बीजिंग में सुपर, ब्लू, ब्लड मून को कैमरे में कैद करते लोग। देशभर में 3 घंटे 23 मिनट चंद्रग्रहण रहा, 65% आबादी ने पहली...
बीजिंग में सुपर, ब्लू, ब्लड मून को कैमरे में कैद करते लोग।

देशभर में 3 घंटे 23 मिनट चंद्रग्रहण रहा, 65% आबादी ने पहली बार सुपर, ब्लू, ब्लड मून देखा

अमेरिका में 152 साल बाद नजर आया दुर्लभ चंद्रग्रहण, शहरों में जश्न

भारत में करीब 76 मिनट तक लोगों ने खुली आंखों से चंद्रग्रहण को देखा

नई दिल्ली| देशभर में बुधवार को इस साल का पहला चंद्रग्रहण दिखाई दिया। 35 साल बाद यह पहला मौका था, जब भारत समेत एशियाई देशों में ब्लू मून, ब्लड मून और सुपर मून एक साथ नजर आए। भारत में शाम 5.20 बजे से रात 8.43 मिनट तक चंद्रग्रहण नजर आया। यानी करीब 3 घंटे 23 मिनट तक चंद्रग्रहण को देखा गया। कुछ मिनट के लिए चंद्रमा का रंग लाल भी हो गया। यह दुर्लभ चंद्रग्रहण एशिया, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के करीब 100% आबादी को आंशिक या पूर्ण रूप से दिखा। जबकि यूरोप में करीब 90%, दक्षिणी अमेरिका में 10% और अफ्रीका की 80% आबादी को नजर आया। भारत में 76 मिनट तक लोगों ने बिना टेलीस्कोप, थ्री-डी चश्मे या किसी उपकरण की मदद से सीधे खुली आंखों से इस नजारे को देखा।

फरीदाबाद, गुरुवार, 01 फरवरी, 2018

भारत में 35 से कम उम्र के लोगों के लिए यह पहला मौका था, जब उन्होंने सुपर, ब्लू, ब्लड मून को एक साथ देखा।

भारत में करीब 65% आबादी की उम्र 35 या इससे कम है। इस लिहाज से 65% लोगों को पहली बार यह दुर्लभ चंद्रग्रहण देखने का मौका मिला।

इससे पहले ऐसा चंद्रग्रहण एशिया में 1982 में हुआ था। अगला संयोग 2037 में यानी 19 साल बाद आएगा। अमेरिका में 152 साल बाद सुपर मून, ब्लू मून और ब्लड मून नजर आया। इससे पहले 1866 में दिखाई दिया था।

चंद्रमा पहले से 15% बड़ा और 30% ज्यादा चमकीला नजर आया

सुपर मूनः इसमें चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे करीब होता है। साथ ही पहले से 15% तक बड़ा और 30% ज्यादा चमकीला दिखाई दिया। इसे पेरिगी मून भी कहते हैं। यह दुनिया के लिए दो महीने में तीसरी बार देखने को मिला।

कब और क्यों लगता है चंद्रग्रहण

सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चंद्रमा, धरती की छाया से छिप जाता है। यह घटना पूर्णिमा के दिन होती है।

ब्लू मूनः यहां ब्लू का मतलब चंद्रमा के रंग से नहीं है। जब एक माह में दो बार फुल मून (पूर्णिमा) होती है तो दूसरे वाले फुल मून को ब्लू मून कहते हैं। इस बार 2 और 31 जनवरी को पूर्णिमा रही। ब्लू मून ढाई साल बाद नजर आता है।

फिलीपींस मंे मायोन ज्चालामुखी के ऊपर सुपरमून की तस्वीर।

ब्लड मूनः इस दौरान पृथ्वी की छाया से चंद्रमा काला दिखाई देता है। कुछ सेकंड के लिए चंद्रमा पूरी तरह लाल भी दिखाई दिया, इसे ब्लड मून कहते हैं। यह स्थिति तब बनती है, जब सूर्य की रोशनी छितराकर चंद्रमा तक पहुंचती है।

इस चंद्रग्रहण के अलावा दुनिया में 2018 में एक चंद्रग्रहण और 3 सूर्यग्रहण होंगे।

भारत में इस साल सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देंगे। जबकि दूसरा चंद्रग्रहण 27 जुलाई को दिखेगा।

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Web Title: एशिया में 35 साल बाद दिखा सुपर ब्लू ब्लड मून
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