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प्रद्युम्न मर्डर केस : वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफी के जरिए दबे हुए राज खोलेगी सीबीआई

प्रद्युम्न की हत्या के मामले में सीबीआई अब तक दबे हुए राज खोलने के लिए हाइटेक मशीनों का सहारा लेगी।

Danik Bhaskar | Nov 30, 2017, 04:28 AM IST

फरीदाबाद. गुड़गांव के रेयान इंटरनेशल स्कूल में दूसरी क्लास के स्टूडेंट प्रद्युम्न की हत्या के मामले में सीबीआई अब तक दबे हुए राज खोलने के लिए हाइटेक मशीनों का सहारा लेगी। इसमें वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफी और फ्रेड नाम के फोरेंसिक वर्क स्टेशन का उपयोग किया जाएगा। इसकी अनुसंधान सटीकता को चैलेंज नहीं किया जा सकता। क्या कर रही है सीबीआई

1. वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफी : सीबीआईके अनुसार टॉयलेट में प्रद्युम्न की हत्या के ठीक पहले और बाद के सीसीटीवी फुटेज की वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफी की जाएगी। नारको, ब्रेन मैपिंग, और पॉलीग्राफी टेस्ट की तर्ज पर आवाज के नमूनों की जांच की जाती है। इसके अलावा इससें किसी व्यक्ति से संबंधित तस्वीरों या फुटेज को देखकर होंठ हिलाने के आधार पर यह पता किया जाता है कि उसने क्या बोला होगा।

2. फ्रेड : यह एक मशीन की तरह है। जिसके जरिए हत्याकांड से जुड़े साइबर फैक्ट्स जैसे- सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों या हत्याकांड से जुड़े लोगों के कॉल रिकॉर्ड, चैट वगैरह को खंगाला जाता है। सीबीआई का कहना है कि कई बार मौके से पुलिस ठीक से सबूत इकट्‌ठा नहीं कर पाती। ऐसे में फ्रेड मशीन का उपयोग किया जाता है। इसमें मोबाइल या संबधित मशीन से डिलीट किए गए डाटा और चैट रिकॉर्ड को भी 100 फीसदी तक रिकवर किया जा सकता है।


हामिद मीर के लिए आरूषी हत्याकांड से भी कठिन साबित होगा यह केस : सीबीआई
सीबीआई का मानना है कि प्रद्युम्न हत्याकांड में बचाव पक्ष की तरफ से पैरवी के लिए हां कहने वाले एडवोकेट तनवीर अहमद मीर के लिए यह केस आरुषि हत्याकांड से भी कठिन साबित होगा। जिस स्कूल में प्रद्युम्न की बेरहमी से गला रेतकर हत्या की गई, वहां लगे सीसीटीवी रिकॉर्ड कब्जे में लिया जा चुका है।


सीबीआई के लिए मुश्किलें भी
- प्रद्युम्न की हत्या 8 सितंबर 2017 को हुई थी। हरियाणा पुलिस ने इस हत्याकांड में जितने बड़े पैमाने पर लापरवाही का सबूत पेश किया, वह बहुत देर बाद सामने आया।
- इस दौरान केस से जुड़े कई अहम फैक्ट , सबूत जो वारदात वाले दिन ही ढूंढ़े जा सकते थे, वे सीबीआई को नहीं मिल पाए।
- 22 सितंबर को सीबीआई ने दिल्ली में एफआईआर दर्ज की। 24 सितंबर को जांच शुरू हुई। सीबीआई को केस में पहली लीड कथित हत्यारोपी अशोक ने ही दी।
- अशोक ने बताया कि उसने हत्या नहीं की। अशोक ने ही संदिग्ध हत्यारों के बारे में सीबीआई को बताया। सीबीआई इन फैक्ट्स के सहारे ही जांच के बाद नाबालिग आरोपी तक पहुंची।
- सीबीआई सूत्रों के मुताबिक हरियाणा पुलिस इस अहम हत्याकांड में घटना वाले दिन ही जो कुछ जुटा सकती थी, वह अब सीबीआई के पास नहीं है। हालांकि सीबीआई ये मान रही है कि आरुषि मर्डरकेस जैसी किरकिरी प्रद्युम्न केस में नहीं झेलनी पड़ेगी। आरुषि की हत्या सेल्फ होम इनसाइड मिस्ट्री थी। जबकि प्रद्युम्न की हत्या आउटसाइड मर्डर मिस्ट्री है।

जस्टिस लेकर ही रहूंगा : वरूण ठाकुर

प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर का कहना कि आरुषि के मर्डर में उसके माता-पिता पकड़े गए थे। आरुषि की हत्या उसके घर में हुई थी। प्रद्युम्न केस आरुषि जैसा नहीं है। मासूम की मौत स्कूल कैंपस में हुई है। बहुत से गवाह हैं।

सीसीटीवी फुटेज, कॉल और साइबर एवं डिजिटल रिकार्ड्स हैं। जो इस हत्याकांड को आरुषि मर्डर मिस्ट्री से बिल्कुल अलग करते हैं। आरुषि के माता-पिता भले ही अपनी बच्ची के हत्यारों को सजा दिलाने में नाकामयाब रहे हों। लेकिन मैं न्याय लेकर ही रहूंगा। दोषी को सजा दिलाकर रहूंगा।"